यदि आप अपने खुद के नए व्यवसाय की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं, तो कोल्ड स्टोरेज का विकल्प आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। किसान और नए उद्यमी इस कारोबार के जरिए कृषि उपज, ताजे फल, हरी सब्जियों और अन्य तापमान के प्रति संवेदनशील रहने वाले उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की सुविधा दे सकते हैं। आज के समय में इस प्रकार के भंडारण की मांग न केवल कृषि क्षेत्र में बल्कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों और चिकित्सा जगत में भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, इस व्यापार में उतरने से पहले शुरुआती निवेश, सही जगह के चुनाव, आधुनिक तकनीक और बाजार की असल मांग का गहराई से अध्ययन करना बहुत जरूरी होता है।
कोल्ड स्टोरेज बनाने में आने वाला खर्च और लागत
किसी भी कोल्ड स्टोरेज यूनिट को स्थापित करने में आने वाला कुल खर्च उसकी कुल भंडारण क्षमता, जमीन की कीमत, भवन के निर्माण, भारी मशीनों और उसमें इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीक पर पूरी तरह निर्भर करता है। इसके ढांचे को तैयार करने में विशेष इंसुलेटेड दीवारें, तापमान को नियंत्रित करने वाले शक्तिशाली उपकरण, निर्बाध बिजली व्यवस्था, सुरक्षा यंत्र और अन्य तमाम बुनियादी सुविधाओं को विकसित करना पड़ता है। एक छोटे स्तर के कोल्ड स्टोरेज और एक बड़े स्तर के गोदाम के खर्च में बहुत बड़ा अंतर होता है। इसलिए इस बिजनेस को जमीन पर उतारने से पहले किसी अनुभवी विशेषज्ञ से अपनी परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट जरूर तैयार करवानी चाहिए। इसमें केवल निर्माण पर आने वाले खर्च ही नहीं बल्कि बिजली बिल, कर्मचारियों के वेतन, रखरखाव और अन्य मासिक खर्चों का भी सटीक आकलन शामिल होना चाहिए।
सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी और वित्तीय सहायता
इस कारोबार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से आकर्षक वित्तीय सहायता और अनुदान का प्रावधान किया गया है। मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर योजना के अंतर्गत 5,000 मीट्रिक टन तक की क्षमता वाले योग्य कोल्ड स्टोरेज के निर्माण, उसके विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए सामान्य क्षेत्रों में कुल परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। यह वित्तीय मदद सीधे बैंक से मिलने वाले ऋण से जुड़ी होती है और सभी तय मानकों व शर्तों को पूरा करने के बाद नियमानुसार जारी की जाती है। चूंकि राजस्थान राज्य सामान्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए यहां पर सामान्य तौर पर 35 प्रतिशत तक की सहायता का प्रावधान लागू होता है। इसके विपरीत, पूर्वोत्तर राज्यों और कुछ विशेष श्रेणी के पहाड़ी तथा अनुसूचित क्षेत्रों में यह सरकारी मदद बढ़कर 50 प्रतिशत तक हो जाती है। इसके अलावा 5,000 मीट्रिक टन से अधिक और 20,000 मीट्रिक टन तक की क्षमता वाली पात्र परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजनाओं के जरिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। हालांकि, मिलने वाली सब्सिडी की वास्तविक रकम सरकार के तय लागत मानकों, प्रोजेक्ट की पात्रता और उसकी आधिकारिक स्वीकृति पर निर्भर करती है।
खाद्य और चिकित्सा के क्षेत्र में व्यापक मांग
इस व्यवसाय से जुड़े कारोबारी कमलेश कुमावत ने जानकारी देते हुए बताया कि कोल्ड स्टोरेज का उपयोग मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर खाद्य उद्योग, दवाइयों के चिकित्सा क्षेत्र और ब्लड बैंक जैसी बेहद महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। अलग-अलग प्रकार के उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए भिन्न तापमान और विशेष प्रकार की सुविधाओं की आवश्यकता पड़ती है। यही वजह है कि कोल्ड स्टोरेज की स्थापना करते समय यह पहले ही तय कर लेना चाहिए कि इस यूनिट का उपयोग मुख्य रूप से किस विशेष क्षेत्र के लिए किया जाना है।
व्यवसाय शुरू करने से पहले इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
कोई भी नया कोल्ड स्टोरेज शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार में इसकी मांग का जायजा लेना चाहिए, साथ ही वहां पर चौबीस घंटे बिजली की उपलब्धता, आवागमन के लिए मजबूत परिवहन सुविधा और अपने संभावित ग्राहकों का सही आकलन करना चाहिए। इसके साथ ही किसी पेशेवर विशेषज्ञ की सलाह लेकर तकनीकी योजना और पूरी परियोजना रिपोर्ट समय पर बनवा लेनी चाहिए। सरकारी अनुदान के लिए किसी भी तरह का आवेदन करने से पहले संबंधित सरकारी विभाग से वर्तमान दिशा-निर्देशों, अपनी पात्रता और सभी जरूरी दस्तावेजों की सटीक और पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त कर लेनी चाहिए।



















