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करौली के डूडीपुरा में पानी से भरे रास्ते से होकर गुजरी अंतिम यात्राराजस्थान
7 सित॰ 2026, 1:54 pm (1 घंटे पहले)· 2

करौली के डूडीपुरा में पानी से भरे रास्ते से होकर गुजरी अंतिम यात्रा

करौली जिले के डूडीपुरा गांव में बारिश के बाद रास्तों में भरे पानी के बीच से एक व्यक्ति की अंतिम यात्रा निकालनी पड़ी, जिससे परिजनों और ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। ग्रामीणों ने श्मशान घाट तक पक्का रास्ता बनाने की मांग की है।

राजस्थान के करौली जिले में एक गांव से ऐसी तस्वीर सामने आई है जो शासन-प्रशासन के दावों पर सवाल खड़ा करती है। सपोटरा क्षेत्र की जोड़ली ग्राम पंचायत के डूडीपुरा गांव में हाल की बारिश ने रास्तों को इस कदर पानी से भर दिया कि एक ग्रामीण की अंतिम यात्रा तक इसी जलभराव से होकर निकालनी पड़ी। परिजन और गांव वाले शव को कंधों पर लिए हुए जगह-जगह पानी भरे रास्तों के बीच से गुजरे, और आखिरकार शव को श्मशान घाट तक पहुंचाया।

पानी से होकर श्मशान तक पहुंची अंतिम यात्रा

घटना उस वक्त की है जब गांव में एक व्यक्ति की मौत के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव को लेकर श्मशान घाट की ओर रवाना हुए। रास्ते में जगह-जगह बारिश का पानी भरा हुआ था, कहीं-कहीं तो पानी इतना अधिक था कि लोगों को उसी में उतरकर आगे बढ़ना पड़ा। शव के साथ चल रहे लोगों के लिए यह सफर आसान नहीं था, फिर भी उन्हें कीचड़ और पानी के बीच से रास्ता बनाना पड़ा। अंतिम यात्रा में शामिल बुजुर्गों को खासतौर पर परेशानी झेलनी पड़ी, क्योंकि फिसलन भरे और जलमग्न रास्ते पर चलना उनके लिए मुश्किल हो गया था। ग्रामीणों ने बताया कि यह कोई एक दिन की समस्या नहीं है, बारिश के मौसम में हर बार गांव को इसी तरह की मुश्किल का सामना करना पड़ता है।

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बरसात में हर बार बनती है यही मुश्किल

डूडीपुरा के लोगों के अनुसार गांव से श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता आज तक पक्का नहीं बन पाया है। आम दिनों में भी यह रास्ता ठीक हालत में नहीं रहता, लेकिन बारिश शुरू होते ही हालात और बिगड़ जाते हैं। पानी की निकासी की कोई ठोस व्यवस्था न होने के कारण बरसात का पानी लंबे समय तक रास्ते में जमा रहता है। इससे गांव वालों को रोजमर्रा के आने-जाने में भी दिक्कत होती है, लेकिन अंतिम यात्रा जैसे मौकों पर यह परेशानी कई गुना बढ़ जाती है, क्योंकि उस समय कीचड़ और पानी से बचकर चलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों और खेतों की ओर जाने वाले किसानों को भी इसी रास्ते से जूझना पड़ता है, इसलिए यह समस्या पूरे गांव की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हुई है।

ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी

इस पूरे मामले को लेकर गांव वालों में पंचायत प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि बार-बार इस समस्या को उठाने के बावजूद अब तक श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते को दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों का मानना है कि जिंदा रहते हुए तो पहले से ही कई मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं, लेकिन जब मौत के बाद भी अंतिम यात्रा के लिए आसान रास्ता नसीब नहीं होता, तो यह प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा है। गांव के लोगों ने कहा कि हर साल बारिश के मौसम में यही हालात दोहराए जाते हैं, फिर भी कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। कई ग्रामीणों ने कहा कि इस बार की घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया है और अब वे इस मुद्दे को लेकर लामबंद होने की तैयारी में हैं।

स्थायी रास्ते और जल निकासी की मांग

ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन से मांग की है कि श्मशान घाट तक जल्द से जल्द पक्का और सुगम रास्ता बनवाया जाए, ताकि बारिश के दिनों में भी लोग आसानी से आ-जा सकें। इसके साथ ही उन्होंने रास्ते में होने वाले जलभराव की समस्या का स्थायी हल निकालने की भी अपील की है, जिसके लिए पानी की उचित निकासी की व्यवस्था करना जरूरी बताया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द काम शुरू करने की अपील की है, ताकि आने वाले समय में किसी और परिवार को अपने किसी सदस्य की अंतिम यात्रा के दौरान इस तरह की तकलीफ से न गुजरना पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक हर बारिश में गांव को इसी शर्मनाक स्थिति से गुजरना पड़ेगा।

सवाल-जवाब

यह घटना कहां की है?
यह राजस्थान के करौली जिले के सपोटरा क्षेत्र की जोड़ली ग्राम पंचायत के डूडीपुरा गांव की है।
समस्या क्या हुई?
बारिश के बाद रास्तों में भरे पानी के बीच से एक व्यक्ति की अंतिम यात्रा श्मशान घाट तक ले जानी पड़ी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से क्या मांग की है?
ग्रामीणों ने श्मशान घाट तक पक्का और सुगम रास्ता बनाने और जलभराव का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
क्या यह समस्या पहली बार सामने आई है?
नहीं, ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के मौसम में हर साल यही समस्या सामने आती है।
रास्ते में पानी जमा होने की वजह क्या बताई गई है?
रास्ते में पानी की उचित निकासी की व्यवस्था न होने को इसकी वजह बताया गया है।
अंतिम यात्रा के दौरान किसे सबसे ज्यादा परेशानी हुई?
अंतिम यात्रा में शामिल बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों को कीचड़ और पानी के बीच चलने में सबसे ज्यादा दिक्कत हुई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 मिनट पहले

यह घटना न केवल बुनियादी ढांचे की पोल खोलती है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की गंभीर संवेदनहीनता को भी उजागर करती है। श्मशान घाट तक जाने वाले मार्ग पर जलभराव और जल निकासी का अभाव नागरिकों के गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। यदि पंचायत स्तर पर इस प्रकार की बुनियादी समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं किया गया, तो यह प्रशासनिक विफलता स्थानीय स्तर पर बड़े रोष और जन-आंदोलन का रूप ले सकती है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·28 मिनट पहले

डूडीपुरा की यह घटना प्रशासनिक उदासीनता और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के खोखले दावों की पोल खोलती है। जल निकासी की ठोस व्यवस्था न होने से केवल अंतिम यात्रा ही नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों और किसानों का रोजमर्रा का जीवन भी प्रभावित हो रहा है। यदि समय रहते पंचायत स्तर पर इस रास्ते को पक्का नहीं किया गया, तो ग्रामीणों का यह आक्रोश आगामी समय में बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही तय करना अनिवार्य हो गया है।

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