बारिश के दिनों में कुछ गरमागरम और मसालेदार खाने का मन हो तो अंबाला की पारंपरिक उड़द धुली दाल कचौड़ी एक बेहतरीन विकल्प बन सकती है। आमतौर पर बाजार में मिलने वाली आलू कचौड़ी से यह पूरी तरह अलग रेसिपी है, क्योंकि इसके अंदर आलू की जगह उड़द धुली दाल की मसालेदार भरावन डाली जाती है। अंबाला के घरों में यह डिश खासतौर पर माएं अपने बच्चों के लिए बनाती आई हैं, और स्थानीय महिला बिंद्रा का कहना है कि इसे रसोई में बिना किसी खास मेहनत के तैयार किया जा सकता है।
दाल भिगोने और पीसने की तैयारी
बिंद्रा के मुताबिक इस कचौड़ी की शुरुआत दाल को सही तरीके से भिगोने से होती है। करीब 250 ग्राम उड़द धुली दाल लेकर उसे रातभर पानी में डुबोकर रखना होता है। अगली सुबह जब दाने अच्छी तरह फूल जाएं, तब उन्हें साफ पानी से एक बार धो लिया जाता है। इसके बाद भीगी दाल को मिक्सर में डालकर बारीक पीसा जाता है, जब तक कि एक चिकना और गाढ़ा पेस्ट न बन जाए। यही पेस्ट आगे चलकर कचौड़ी के अंदर भरी जाने वाली मसालेदार स्टफिंग की नींव बनता है।
मसालेदार भरावन कैसे तैयार करें
पेस्ट तैयार होने के बाद बारी आती है तड़का लगाने की। एक कढ़ाई में थोड़ा तेल डालकर गर्म किया जाता है और उसमें जीरे का तड़का लगाया जाता है। इसके बाद बारीक कटे दो प्याज कढ़ाई में डाले जाते हैं, साथ ही एक-दो हरी मिर्च भी काटकर मिलाई जाती है। प्याज और मिर्च को तब तक भूना जाता है जब तक प्याज हल्के सुनहरे रंग का न हो जाए। इसी दौरान स्वादानुसार हल्दी, नमक, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और गरम मसाला डालकर मसाले को अच्छी तरह पकाया जाता है, ताकि उसका कच्चापन पूरी तरह निकल जाए और स्टफिंग में गहरा स्वाद आ जाए। मसाला भुनने के बाद उसमें मिक्सर में तैयार किया गया उड़द दाल का पेस्ट मिलाया जाता है और धीमी आंच पर तब तक भूना जाता है जब तक पूरा मिश्रण एक साथ अच्छी तरह पक न जाए। तैयार भरावन को कुछ देर ठंडा होने के लिए अलग रख दिया जाता है, ताकि उसे आसानी से लोइयों में भरा जा सके।
आटा गूंथने का तरीका
स्टफिंग तैयार होने के दौरान या उसके बाद आटा गूंथने का काम किया जाता है। इसके लिए करीब आधा किलो आटा लेकर उसमें स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। चाहें तो स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ी अजवाइन भी डाली जा सकती है। इसके बाद पानी की मदद से आटे को इस तरह गूंथा जाता है कि वह न ज्यादा सख्त रहे और न बहुत ढीला। सही बनावट का आटा गूंथने के बाद उसे कुछ देर के लिए ढककर रख दिया जाता है, जिससे बाद में उसकी छोटी-छोटी लोइयां आसानी से बनाई जा सकें।
कचौड़ी भरना और बेलना
जब स्टफिंग हल्की ठंडी हो जाए तो उसमें बारीक कटा हरा धनिया मिला दिया जाता है, जिससे भरावन की खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं। इसके बाद गुंथे हुए आटे से छोटी-छोटी लोइयां तोड़ी जाती हैं। हर लोई को हल्के हाथों से फैलाकर उसके बीच में तैयार उड़द दाल की स्टफिंग भरी जाती है, फिर किनारों को चारों तरफ से बंद कर गोल आकार दिया जाता है। बिंद्रा के अनुसार इसके बाद चकले-बेलन पर हल्के हाथ से इसे बेला जाता है, ताकि अंदर की भरावन बाहर न निकले। इसे चाहें तो पूरी जैसा बड़ा आकार दिया जा सकता है, या फिर छोटी आकार वाली कचौड़ियां भी बनाई जा सकती हैं, यह पूरी तरह पसंद पर निर्भर करता है।
तलने की सही विधि
कचौड़ियां बेलने के बाद इन्हें तला जाता है। इसके लिए कढ़ाई में रिफाइंड या सरसों के तेल की पर्याप्त मात्रा डालकर उसे अच्छी तरह गर्म किया जाता है। तेल पूरी तरह गर्म होने पर एक-एक कर कचौड़ियां उसमें डाली जाती हैं। इन्हें मध्यम आंच पर तलना बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे कचौड़ी बाहर से कुरकुरी बनती है और अंदर भरी स्टफिंग भी अच्छी तरह गर्म हो पाती है। जब कचौड़ियों का रंग सुनहरा हो जाए, तब उन्हें तेल से निकाल लिया जाता है। इस तरह गरमागरम उड़द दाल कचौड़ी परोसने के लिए तैयार हो जाती है।
परोसने का सुझाव
बिंद्रा बताती हैं कि इस कचौड़ी को धनिया, पुदीना और हरी मिर्च की चटनी के साथ परोसा जाए तो इसका स्वाद और निखर जाता है। बारिश के ठंडे मौसम में इसे नाश्ते के तौर पर या शाम की चाय के साथ स्नैक की तरह भी बनाया जा सकता है। आलू की जगह उड़द धुली दाल की मसालेदार स्टफिंग होने की वजह से इसका स्वाद आम कचौड़ियों से अलग और खास बन जाता है। घर पर बनी यह डिश बच्चों को भी खूब पसंद आती है और बाजार में मिलने वाली कचौड़ियों के मुकाबले सेहत और स्वाद, दोनों में बेहतर विकल्प बन सकती है।



















