राजस्थान के सीकर जिले में मौजूद खाटूश्यामजी धाम आज वैश्विक स्तर पर सनातन आस्था और भक्ति का एक विशाल केंद्र बन चुका है। प्रतिदिन देश और विदेश से हजारों और लाखों की तादाद में श्रद्धालु बाबा श्याम के शीश के दर्शन करने यहां पहुंचते हैं। भारत के विभिन्न कोनों में प्रतिदिन श्याम संकीर्तन, भजन संध्या और भव्य जागरणों का आयोजन होता है, जहां सुप्रसिद्ध भजन गायक बाबा के भजनों की प्रस्तुति देते हैं और घरों में श्याम नाम के जयकारे गूंजते हैं। हालांकि, जब खाटूधाम का इतना व्यापक प्रसार नहीं हुआ था, तब इस भक्ति मार्ग को जन-जन तक ले जाने का बीड़ा भक्त शिरोमणि आलू सिंह महाराज ने उठाया था। उन्होंने निस्वार्थ भाव से बाबा की महिमा को गांव-गांव और नगर-नगर तक पहुंचाया।
उस दौर में जगाई थी श्याम भक्ति की अलख
धार्मिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, आलू सिंह महाराज का स्थान खाटूश्यामजी के इतिहास में अत्यंत आदरणीय माना जाता है। जिस कालखंड में संचार और यात्रा के आधुनिक साधन नहीं थे और खाटूधाम की प्रसिद्धि आज जितनी व्यापक नहीं थी, उस समय उन्होंने समर्पित होकर भजन और कीर्तन के माध्यम से लोगों को बाबा श्याम से जोड़ा था। आलू सिंह महाराज स्थान-स्थान पर जाकर बाबा की अलौकिक कृपा और महिमा का गुणगान करते थे, जिससे आम जनमानस में श्याम भक्ति की गहरी जड़ें जमीं। इसी अटूट निष्ठा के कारण उन्हें बाबा श्याम का परम और प्रिय भक्त कहा गया। वर्तमान समय में भी खाटूश्यामजी मंदिर की दैनिक आरती और धार्मिक अनुष्ठानों में आलू सिंह महाराज का स्मरण अत्यंत श्रद्धा के साथ किया जाता है, और उनके द्वारा शुरू की गई परंपराएं धाम में आज भी जीवंत हैं।
श्याम बगीची और सेवा की अविराम परंपरा
आलू सिंह महाराज का आध्यात्मिक केंद्र खाटूधाम स्थित श्याम बगीची रहा है। मोहनदास महाराज के अनुसार, इसी पवित्र स्थल पर बैठकर आलू सिंह महाराज ने भक्ति, भजन और कीर्तन की उस अविरल धारा को आगे बढ़ाया जिसने लाखों भक्तों को आकर्षित किया। उनके भौतिक रूप से देहावसान के उपरांत श्याम बगीची के प्रांगण में ही उनके स्मृति मंदिर की स्थापना की गई। वर्तमान में भी यहां हर दिन विधि-विधान से आलू सिंह महाराज की अर्चना की जाती है। खाटूधाम आने वाले श्रद्धालु मुख्य मंदिर में बाबा श्याम के दर्शन के बाद श्याम बगीची जरूर आते हैं और आलू सिंह महाराज के मंदिर में बैठकर श्याम नाम का जाप और ध्यान करते हैं। आलू सिंह महाराज के जाने के बाद मोहनदास महाराज इस सेवा और पूजन की बागडोर संभाल रहे हैं, जबकि जितेंद्र सिंह चौहान और श्याम सिंह चौहान भी मुख्य मंदिर की सेवा-पूजा में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
37वीं पुण्यतिथि पर दो दिवसीय भव्य महोत्सव
इस पावन परंपरा को सम्मान देने के लिए श्याम बगीची में भक्त शिरोमणि आलू सिंह महाराज की 37वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में दो दिवसीय विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इस अवसर पर 2 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से एक विशाल भंडारे का आयोजन तय किया गया है, जिसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। पूरे श्याम बगीची परिसर को सुगंधित व मनमोहक फूलों तथा भगवान के बहुरंगी चित्रों से अलंकृत किया गया है। फूलों की भव्य सजावट से तैयार आलू सिंह महाराज का दरबार यहां आने वाले भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। महाराज मोहनदास सिंह चौहान के सानिध्य में आयोजित हो रहे इस धार्मिक समागम में हिस्सा लेने के लिए देश के कोने-कोने से भारी संख्या में श्रद्धालु खाटू पहुंच रहे हैं।
















