आस्था और कठिन तपस्या का एक असाधारण रूप राजस्थान की सड़कों पर दिखाई दे रहा है, जहां हरियाणा के झज्जर जिले के सुबाणा गांव की निवासी रेणु हरिवंशी खाटूश्यामजी के दरबार की ओर दंडवत आगे बढ़ रही हैं। सड़क की तपिश, घुटनों की असहनीय पीड़ा और शारीरिक थकान के बावजूद उनके कदमों का यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आम पैदल चलने के उलट, वह पूरे शरीर को सड़क पर दंडवत प्रणाम करते हुए एक-एक कदम आगे बढ़ा रही हैं। उनका मुख्य ध्येय सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध धाम खाटूश्यामजी पहुंचकर बाबा श्याम के पावन चरणों में माथा टेकना है। इस कठिन साधना की शुरुआत 5 जुलाई को हुई थी, जिसमें उनकी सहायता और सुरक्षा के लिए लगभग 15 लोग साथ चल रहे हैं। रेणु ने इस बार 273 किलोमीटर की कुल दूरी बिना किसी गद्दे का सहारा लिए सीधे जमीन पर दंडवत करते हुए पूरी करने का कठोर संकल्प लिया है।
साल 2023 में 67 दिनों के भीतर तय किया था 237 किलोमीटर का सफर
यह पहला अवसर नहीं है जब रेणु इस तरह के दुर्गम मार्ग पर निकली हैं। इससे पहले वर्ष 2023 में भी उन्होंने खाटूश्यामजी के लिए अपनी पहली दंडवत यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न की थी। उस समय उन्होंने 237 किलोमीटर की लंबी दूरी 67 दिनों में जमीन पर दंडवत लेटते हुए पूरी की थी। उस यात्रा में भी उन्होंने अपने शरीर को विश्राम या राहत देने के लिए किसी गद्दे अथवा चटाई का प्रयोग नहीं किया था। अब दूसरी बार वह उसी भक्ति भाव और कठिन प्रण के साथ इस बार 273 किलोमीटर के लंबे मार्ग पर निरंतर बढ़ रही हैं। उनके साथ करीब 15 लोग सहयोगी के रूप में पूरे रास्ते उनकी व्यवस्था और देखरेख में जुटे हुए हैं।
नौ साल से अन्न का त्याग और सेवा को समर्पित जीवन
धार्मिक आस्था की राह पूरी तरह अपनाने से पहले रेणु हरिवंशी स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रही थीं। वह गुरुग्राम में एएनएम (ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइफ) के पद पर कार्यरत थीं, लेकिन वर्ष 2018 में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। उनके पति सिद्धार्थ मल्हान एक सहकारी बैंक में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी छोड़ने के साथ ही रेणु ने वर्ष 2018 से अन्न का पूरी तरह त्याग कर दिया था। तब से वह केवल नारियल पानी का सेवन करके जीवन यापन कर रही हैं। लगभग नौ साल से उन्होंने अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया है। सामान्य सांसारिक और पारिवारिक सुख-सुविधाओं को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने लोक सेवा, धार्मिक संकल्प और ईश्वर भक्ति को ही अपनी जीवनचर्या बना लिया है।
जनकल्याण, सनातन धर्म और गौ रक्षा का संकल्प
रेणु का कहना है कि उनकी इस यात्रा का मकसद केवल मंदिर जाकर दर्शन प्राप्त करना भर नहीं है, बल्कि वह इसके जरिए समाज में बड़ा संदेश देना चाहती हैं। वह जनसाधारण को जनकल्याण और गौ माता के संरक्षण के प्रति जागरूक करना चाहती हैं। उनका एक प्रमुख उद्देश्य गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के लिए व्यापक जनचेतना जगाना भी है। इसके साथ ही वह सनातन धर्म के मूल्यों और परंपराओं के प्रति लोगों को जागरूक करने की लगातार अपील कर रही हैं।
श्रीमाधोपुर पहुंचने पर स्थानीय नागरिकों ने किया अभिनंदन
अपनी दंडवत यात्रा के क्रम में देर शाम जब रेणु श्रीमाधोपुर बाईपास मार्ग पर पहुंचीं, तो वहां पहले से मौजूद स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संस्थाओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया। श्री श्याम नवयुवक मंडल और क्षेत्र के अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनका अभिनंदन और सत्कार किया। इस सम्मान के दौरान कुछ पलों के लिए रेणु के कदम ठहरे, उन्होंने लोगों से भेंट की और फिर बिना समय गंवाए जमीन पर दंडवत करते हुए अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर दिया।
नवरात्र तक खाटू धाम और उसके बाद सालासर की पदयात्रा का लक्ष्य
इस पूरी धार्मिक साधना में रेणु के पति सिद्धार्थ मल्हान भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और उनके साथ यात्रा की व्यवस्थाओं में लगे हैं। रेणु को विश्वास है कि वह नवरात्रों के पावन पर्व तक खाटूश्यामजी पहुंच जाएंगी। खाटूश्यामजी में बाबा श्याम के विग्रह के दर्शन करने और शीश नवाने के बाद उनका संकल्प यहीं समाप्त नहीं होगा। वहां से वह सालासर बालाजी धाम के लिए पदयात्रा शुरू करेंगी। रेणु के लिए यह सफर केवल 273 किलोमीटर का फासला तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके लंबे साधना पथ का विस्तार है। इससे पहले वह धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ब्रज चौरासी कोस की चार पैदल परिक्रमाएं भी पूरी कर चुकी हैं।



















