राजस्थान के झुंझुनूं जिले में लोहार्गल धाम की पहाड़ियों पर स्थित बरखंडी बाबा मंदिर में हुए सनसनीखेज हत्याकांड की पहेली को सुलझाते हुए पुलिस ने मुख्य संदिग्ध को हिरासत में ले लिया है। गोठड़ा थाना क्षेत्र के इस धार्मिक स्थल पर संत सूरजदास जी महाराज की जान लेकर चढ़ावे की नकदी हड़पने के आरोप में झाझम की ढाणी, तन पहाड़ीला के रहने वाले 44 वर्षीय सुरेश कुमार पुत्र ग्यारसीलाल को दबोचा गया है। मंदिर परिसर की भौगोलिक स्थिति और वहां की गतिविधियों की टोह लेकर वारदात को अंजाम देने वाले इस शातिर शख्स ने बचने के लिए बेहद चालाकी भरा पैंतरा आजमाया था, जिसे पुलिस की विशेष टीम ने बेनकाब कर दिया।
साजिश रचकर मंदिर में दाखिल हुआ था आरोपी
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेंद्र सिंह राजावत ने तफ्तीश की परतें खोलते हुए स्पष्ट किया कि पकड़ा गया शख्स धन ऐंठने की नीयत से ही इस दुर्गम पहाड़ी पर पहुंचा था। जांच से यह तथ्य सामने आया कि वारदात को अंतिम रूप देने से पूर्व वह 23 सितंबर को दो अन्य साथियों संग बरखंडी धाम पहुंचा था। अगली सुबह यानी 24 सितंबर को यह तिकड़ी पहाड़ी से उतरकर किरोड़ी धाम की ओर निकल गई। इसके बाद 25 सितंबर को सुरेश कुमार अकेले ही फिर से मंदिर पहुंचा। उस वक्त आश्रम में संत सूरजदास जी महाराज अकेले मौजूद थे। आरोपी ने वहीं पर भोजन ग्रहण किया और रात बिताने के बहाने संत के समीप ही शरण ले ली।
स्नान के दौरान घेराबंदी और खाई में धक्का
अगले दिन 26 सितंबर की सुबह जब संत सूरजदास नित्यकर्म और स्नान के वास्ते गुस्लखाने में गए, तब आरोपी ने बाहर से दरवाजा बंद करके सांकल चढ़ा दी। संत किसी तरह कुंडी तोड़कर बाहर निकल आए और उन्होंने इस हरकत का कड़ा विरोध करते हुए आरोपी को ललकारा। दोनों के बीच कहासुनी और तकरार के बीच सुरेश कुमार ने अचानक पीछे से जोरदार धक्का दे दिया। संत असंतुलित होकर पहाड़ी की गहरी खाई में लुढ़क गए, जिससे उनकी मौके पर ही सांसें थम गईं। इसके तुरंत बाद आरोपी ने मंदिर की दानपेटी और वहां सहेज कर रखी गई चढ़ावे की सारी नकदी समेट ली।
वारदात के बाद संतों की सभा और ग्रामीणों के बीच रहा मौजूद
इस पूरे मामले की सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी वारदात करने के बावजूद आरोपी भागा नहीं। उसने खुद को बेकसूर दिखाने के लिए बेहद शातिराना चाल चली। जब संत के गायब होने की चर्चा फैली और आश्रम में साधु-संतों की पंचायत बैठी, तो सुरेश कुमार भी उस सभा में जाकर बैठ गया। वह कई घंटों तक स्थानीय ग्रामीणों के बीच घूमता-फिरता रहा और उनकी बातचीत में शरीक होता रहा। उसके इस सामान्य व्यवहार की वजह से शुरुआती पलों में किसी को भी उस पर तनिक भी संदेह नहीं हुआ।
दुर्गम पहाड़ियों में बचाव अभियान और शव की बरामदगी
घटना के अगले दिन 27 सितंबर को स्थानीय नागरिक शंकरलाल ने गोठड़ा थाने पहुंचकर संत सूरजदास के लापता होने की आधिकारिक सूचना दर्ज कराई। दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी बताया था कि महाराज अपनी कुटिया में नहीं हैं। शिकायत मिलते ही पुलिस महकमे ने व्यापक खोजबीन शुरू कर दी। फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल), श्वान दस्ता (डॉग स्क्वॉड), मोबाइल फॉरेंसिक वैन (एमओबी) और साइबर विशेषज्ञों को मौके पर बुलाकर भौतिक साक्ष्य जुटाए गए। सघन तलाशी के दौरान संत का पार्थिव शरीर बरखंडी की पथरीली पहाड़ियों के नीचे गहरी खाई में पड़ा मिला। इलाका बेहद विकट होने की वजह से शव को सुरक्षित ऊपर लाने के लिए जयपुर से राज्य आपदा राहत बल (एसडीआरएफ) और जिला रेस्क्यू टीम की सहायता ली गई। इसके बाद मेडिकल बोर्ड की निगरानी में शव का परीक्षण संपन्न हुआ।
तीस पुलिसकर्मियों के संयुक्त प्रयास से सुलझी गुत्थी
घटना की गंभीरता को देखते हुए नवलगढ़ के पुलिस उपाधीक्षक सुगन सिंह की अगुवाई में लगभग 30 पुलिसकर्मियों की एक मजबूत टीम गठित की गई थी। इस जांच दल में गोठड़ा के थानाधिकारी प्रेमप्रकाश, उदयपुरवाटी के थानाधिकारी रामपाल मीणा, नवलगढ़ के थानाधिकारी अजय सिंह तथा जिला विशेष दल (डीएसटी) के उपनिरीक्षक हेमराज सहित कई कर्मी शामिल रहे। तकनीकी डेटा के विश्लेषण और मुखबिर तंत्र से मिली सूचनाओं को जोड़कर संदिग्ध की पहचान की गई और कड़ी पूछताछ के उपरांत सुरेश कुमार को सलाखों के पीछे भेज दिया गया।
नकदी की बरामदगी और आक्रोश के बीच पांच दिन में कार्रवाई
एएसपी देवेंद्र सिंह राजावत के अनुसार आरोपी लूटी गई रकम के बारे में लगातार बयान बदलकर जांच भटकाने का प्रयास कर रहा है, जिससे सख्ती से पूछताछ कर रुपयों की बरामदगी के प्रयास जारी हैं। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि आरोपी को मंदिर में भारी चढ़ावा रखे होने की भनक कैसे लगी थी और क्या उसका कोई पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। गौरतलब है कि संत की नृशंस हत्या की खबर से समूचे संत समाज और क्षेत्रीय ग्रामीणों में भारी रोष फैल गया था। आक्रोशित लोगों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम और धरना-प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तारी की मांग की थी। उस समय पुलिस प्रशासन ने सात दिनों के भीतर पर्दाफाश करने का वादा किया था, लेकिन मुस्तैद टीम ने पांचवें दिन ही पूरे प्रकरण का खुलासा कर दिया।


















