झीलों की नगरी उदयपुर अपनी मनमोहक झीलों, भव्य ऐतिहासिक धरोहरों और समृद्ध सांस्कृतिक पहचान के कारण दुनिया भर के मुसाफिरों को आकर्षित करती है। शहर में सैर सपाटे के लिए आने वाले आगंतुक दर्शनीय स्थलों के भ्रमण के साथ ही लजीज और प्रामाणिक भोजन का जायका भी लेना चाहते हैं। खानपान की इसी तलाश के बीच शहर का नटराज डाइनिंग हॉल सैलानियों के बीच भोजन का एक प्रमुख पड़ाव बन चुका है। यहां परोसी जाने वाली सात्विक और तृप्त कर देने वाली थाली को खाने के शौकीन बेहद चाव से पसंद कर रहे हैं। यह भोजन प्रतिष्ठान लगभग 60 साल से अपने प्रामाणिक स्वाद और परंपरा को लगातार संजोए हुए है।
380 रुपये में 20 से अधिक व्यंजनों का अनोखा संगम
नटराज डाइनिंग हॉल की सबसे प्रमुख विशेषता यहां परोसी जाने वाली भव्य थाली है। केवल 380 रुपये की तय दर पर ग्राहकों को 20 से ज्यादा तरह के व्यंजन परोसे जाते हैं। इस थाली के जरिए लोगों को एक ही बार में दाल, कढ़ी, अलग-अलग मौसमी और विशेष सब्जियां तथा कई तरह के पारंपरिक पकवान चखने का अवसर मिलता है। एक ही थाली में इतनी प्रचुर विविधता मिलने के कारण शहर आने वाले पर्यटक खास तौर पर इस भोजनालय में पहुंचते हैं ताकि वे कम समय और किफायती दाम में विभिन्न जायकों का भरपूर आनंद ले सकें।
राजस्थानी और गुजराती खानपान का पारंपरिक तालमेल
इस प्रतिष्ठान में देश के विभिन्न प्रांतों से आने वाले मुसाफिरों की पसंद और स्वाद का विशेष ख्याल रखा जाता है। गुजरात से आने वाले पर्यटकों के लिए गुजराती परंपरा के अनुरूप हल्की मिठास वाली दाल और कढ़ी तैयार की जाती है, जबकि राजस्थानी जायके के दीवानों को तीखा और चटपटा पारंपरिक स्वाद परोसा जाता है। प्रत्येक व्यंजन को पारंपरिक तरीकों और सख्त गुणवत्ता मानकों के साथ पकाया जाता है। डाइनिंग हॉल के संचालक मयंक बताते हैं कि थाली के हर पकवान का अपना अनूठा स्वाद है और ग्राहकों को बेहतरीन भोजन देने के लिए लगातार ध्यान दिया जाता है। इसी लोकप्रियता के चलते दोपहर के भोजन और रात्रि भोज के समय यहां भारी भीड़ उमड़ती है, जहां कई बार ग्राहकों को कतार में इंतजार भी करना पड़ता है।
छह दशकों की आत्मीय मेजबानी और अतिथि परंपरा
नटराज डाइनिंग हॉल का आकर्षण केवल अच्छे स्वाद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां का आत्मीय सत्कार भी लोगों को खींचता है। प्रतिष्ठान के संचालक और सहयोगी कर्मचारी हर आगंतुक को परिवार के सदस्य की भांति स्नेहपूर्वक भोजन कराते हैं, जिससे राजस्थान की अतिथि देवो भव की समृद्ध परंपरा स्पष्ट झलकती है। इसके अलावा खाने की गुणवत्ता को लगातार बेहतर बनाने के लिए नियमित तौर पर ग्राहकों से उनकी राय और सुझाव लिए जाते हैं। कई पर्यटक ऐसे हैं जो सालों से जब भी उदयपुर आते हैं, इस डाइनिंग हॉल में भोजन करना अपनी यात्रा का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। करीब छह दशक पुराना यह प्रतिष्ठान आज भी अपने स्वाद, अपनत्व और विश्वास की बदौलत अपनी पहचान कायम रखे हुए है।




















