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पाली नगर निगम क्रॉस वोटिंग जांच के दौरान जयपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय में पार्षदों का जोरदार विरोध प्रदर्शनराजस्थान
9 अक्तू॰ 2026, 4:49 pm (2 घंटे पहले)· 0

पाली नगर निगम क्रॉस वोटिंग जांच के दौरान जयपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय में पार्षदों का जोरदार विरोध प्रदर्शन

पाली मेयर चुनाव में पार्टी प्रत्याशी को महज 3 वोट मिलने के मामले में जांच के दौरान जयपुर वॉर रूम में पार्षदों ने सीपी जोशी के सामने जमकर नारेबाजी की।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस वॉर रूम के भीतर भारी सियासी गहमागहमी और तनाव देखने को मिला। पाली नगर निगम के मेयर चुनाव में बड़े पैमाने पर हुई क्रॉस वोटिंग की जांच के लिए गठित समिति की बैठक चल रही थी, तभी पाली से जयपुर पहुंचे पार्टी पार्षदों ने परिसर में जमकर विरोध जताया। बैठक समाप्त होने के उपरांत जैसे ही जांच समिति के संयोजक सीपी जोशी कक्ष से बाहर निकले, वहां मौजूद पार्षदों ने उन्हें घेर लिया और अपनी बात सुनने की मांग रखी। हालांकि, सीपी जोशी ने पार्षदों से सीधे संवाद करने के बजाय उन्हें प्रदेश अध्यक्ष एवं अन्य संगठन पदाधिकारियों से मिलने की बात कही। इस प्रतिक्रिया से नाराज पार्षदों ने वॉर रूम के अंदर ही तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।

पाली मेयर चुनाव का गणित और भीतरघात का विवाद

पाली नगर निगम के महापौर चुनाव में कांग्रेस के अंदरूनी कलह ने संगठन को असहज स्थिति में डाल दिया था। नगर निगम सदन में कांग्रेस पार्टी के कुल 29 निर्वाचित पार्षद मौजूद थे, लेकिन जब मतदान के नतीजे सामने आए तो पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी को केवल 3 वोट ही हासिल हो सके। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी नमिता बुबकिया ने 33 मत हासिल करके जीत दर्ज की और मेयर की कुर्सी पर काबिज हो गईं। अपने ही 29 पार्षदों के बावजूद अधिकृत उम्मीदवार को सिर्फ 3 वोट मिलना सीधे तौर पर बगावत और सुनियोजित क्रॉस वोटिंग की ओर इशारा कर रहा था। इस अप्रत्याशित नतीजे के फौरन बाद पार्टी नेतृत्व ने आंतरिक अनुशासनहीनता और भितरघात की पड़ताल करने के लिए जांच समिति गठित कर दी थी।

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तीन जिलों के नेताओं से लिया गया संगठनात्मक फीडबैक

जांच समिति केवल पाली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी नगर निकाय चुनावों के दौरान सामने आई अनियमितताओं की समीक्षा कर रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को आयोजित बैठक में तीन प्रमुख जिलों पाली, भीलवाड़ा और भरतपुर के पार्टी पदाधिकारियों को जयपुर तलब किया गया था। समिति के सदस्यों ने इन तीनों जिलों के प्रतिनिधियों से बंद कमरे में बात की और स्थानीय चुनावों के दौरान उभरी गुटबाजी, शिकायतों और मतदान के जमीनी घटनाक्रम का विस्तृत ब्योरा दर्ज किया। समिति अब इस बात का आकलन कर रही है कि चुनाव के दौरान अधिकृत रणनीति की अनदेखी किन नेताओं और जनप्रतिनिधियों के स्तर पर की गई।

कार्रवाई की सुगबुगाहट के बीच बढ़ता तनाव

जयपुर में पार्षदों के इस हंगामे के पीछे अनुशासनात्मक कार्रवाई का गहरा खौफ भी माना जा रहा है। पाली के पार्षदों को आशंका है कि जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर संगठन उन पर निलंबन या निष्कासन की सख्त कार्रवाई कर सकता है। यही वजह थी कि पार्षद जांच समिति के प्रमुख सीपी जोशी के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहते थे। जब उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला और उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पास जाने को कहा गया, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। वॉर रूम में हुए इस घटनाक्रम ने दर्शा दिया है कि पाली मेयर चुनाव के बाद पैदा हुई खींचतान अब खुलकर सड़कों और पार्टी दफ्तरों में नजर आने लगी है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि समिति की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर पार्टी नेतृत्व बगावत करने वालों के खिलाफ क्या कड़ा कदम उठाता है।

सवाल-जवाब

जयपुर स्थित कांग्रेस वॉर रूम में हंगामा क्यों हुआ?
पाली नगर निगम मेयर चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग की जांच के दौरान पार्षदों ने जांच समिति के संयोजक सीपी जोशी से मिलने की कोशिश की, लेकिन मुलाकात न होने पर उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी।
पाली मेयर चुनाव में मतदान के क्या नतीजे रहे थे?
कांग्रेस के 29 पार्षद होने के बावजूद पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी को केवल 3 वोट मिले, जबकि भाजपा की नमिता बुबकिया 33 वोट पाकर मेयर चुनी गईं।
जांच समिति के संयोजक सीपी जोशी ने पार्षदों से क्या कहा?
सीपी जोशी ने प्रदर्शन कर रहे पार्षदों से सीधे बातचीत करने से इनकार करते हुए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष और संगठन पदाधिकारियों से बात करने की सलाह दी।
जांच समिति ने शुक्रवार को किन जिलों के पदाधिकारियों से फीडबैक लिया?
जांच समिति ने शुक्रवार को पाली, भीलवाड़ा और भरतपुर जिलों के पार्टी पदाधिकारियों को बुलाकर चुनाव घटनाक्रम पर फीडबैक लिया।
पाली से आए पार्षदों को मुख्य रूप से किस बात की चिंता थी?
पार्षदों को डर था कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर क्रॉस वोटिंग के मामले में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·36 मिनट पहले

अरे गजब! उनतीस में से सिर्फ तीन वोट मिले, इसे कहते हैं अपनों ने ही पूरी तरह से डूबो दिया।

Arjun Mehta@arjun-mehta·53 मिनट पहले

जयपुर वॉर रूम के बाहर का वह नज़ारा मुझे अपने पुराने दिनों की याद दिला गया जब चुनाव हारने के बाद पार्टी दफ्तरों में ऐसे ही हंगामे हुआ करते थे। 29 में से सिर्फ 3 वोट मिलना सचमुच हैरान करने वाला है, अब सीपी जोशी से मिलने न मिलने पर इतना गुस्सा तो फूटना ही था।

Ravikash Gupta@ravikash·53 मिनट पहले

अर्जुन जी, आपकी बात ठीक है, पर 29 में से 3 वोट मिलने का सच सामने आने के बाद क्या सच में कार्रवाई होगी या मामला दब जाएगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

अरे भाई, जब उनतीस पार्षद अपने पास थे तो मेयर का चुनाव ऐसे कैसे हार गए कि सिर्फ तीन ही वोट मिले? ये कौन सी अंदरूनी मिलीभगत थी जो कांग्रेस पार्टी को जयपुर वॉर रूम तक हंगामा देखने को मजबूर होना पड़ा?

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, बात सिर्फ भीतरघात की नहीं है, इतने बड़े पैमाने पर क्रास वोटिंग होना यह भी बताता है कि स्थानीय नेताओं का संगठन पर बिल्कुल नियंत्रण नहीं था।

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