राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस वॉर रूम के भीतर भारी सियासी गहमागहमी और तनाव देखने को मिला। पाली नगर निगम के मेयर चुनाव में बड़े पैमाने पर हुई क्रॉस वोटिंग की जांच के लिए गठित समिति की बैठक चल रही थी, तभी पाली से जयपुर पहुंचे पार्टी पार्षदों ने परिसर में जमकर विरोध जताया। बैठक समाप्त होने के उपरांत जैसे ही जांच समिति के संयोजक सीपी जोशी कक्ष से बाहर निकले, वहां मौजूद पार्षदों ने उन्हें घेर लिया और अपनी बात सुनने की मांग रखी। हालांकि, सीपी जोशी ने पार्षदों से सीधे संवाद करने के बजाय उन्हें प्रदेश अध्यक्ष एवं अन्य संगठन पदाधिकारियों से मिलने की बात कही। इस प्रतिक्रिया से नाराज पार्षदों ने वॉर रूम के अंदर ही तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
पाली मेयर चुनाव का गणित और भीतरघात का विवाद
पाली नगर निगम के महापौर चुनाव में कांग्रेस के अंदरूनी कलह ने संगठन को असहज स्थिति में डाल दिया था। नगर निगम सदन में कांग्रेस पार्टी के कुल 29 निर्वाचित पार्षद मौजूद थे, लेकिन जब मतदान के नतीजे सामने आए तो पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी को केवल 3 वोट ही हासिल हो सके। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी नमिता बुबकिया ने 33 मत हासिल करके जीत दर्ज की और मेयर की कुर्सी पर काबिज हो गईं। अपने ही 29 पार्षदों के बावजूद अधिकृत उम्मीदवार को सिर्फ 3 वोट मिलना सीधे तौर पर बगावत और सुनियोजित क्रॉस वोटिंग की ओर इशारा कर रहा था। इस अप्रत्याशित नतीजे के फौरन बाद पार्टी नेतृत्व ने आंतरिक अनुशासनहीनता और भितरघात की पड़ताल करने के लिए जांच समिति गठित कर दी थी।
तीन जिलों के नेताओं से लिया गया संगठनात्मक फीडबैक
जांच समिति केवल पाली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी नगर निकाय चुनावों के दौरान सामने आई अनियमितताओं की समीक्षा कर रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को आयोजित बैठक में तीन प्रमुख जिलों पाली, भीलवाड़ा और भरतपुर के पार्टी पदाधिकारियों को जयपुर तलब किया गया था। समिति के सदस्यों ने इन तीनों जिलों के प्रतिनिधियों से बंद कमरे में बात की और स्थानीय चुनावों के दौरान उभरी गुटबाजी, शिकायतों और मतदान के जमीनी घटनाक्रम का विस्तृत ब्योरा दर्ज किया। समिति अब इस बात का आकलन कर रही है कि चुनाव के दौरान अधिकृत रणनीति की अनदेखी किन नेताओं और जनप्रतिनिधियों के स्तर पर की गई।
कार्रवाई की सुगबुगाहट के बीच बढ़ता तनाव
जयपुर में पार्षदों के इस हंगामे के पीछे अनुशासनात्मक कार्रवाई का गहरा खौफ भी माना जा रहा है। पाली के पार्षदों को आशंका है कि जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर संगठन उन पर निलंबन या निष्कासन की सख्त कार्रवाई कर सकता है। यही वजह थी कि पार्षद जांच समिति के प्रमुख सीपी जोशी के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहते थे। जब उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला और उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पास जाने को कहा गया, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। वॉर रूम में हुए इस घटनाक्रम ने दर्शा दिया है कि पाली मेयर चुनाव के बाद पैदा हुई खींचतान अब खुलकर सड़कों और पार्टी दफ्तरों में नजर आने लगी है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि समिति की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर पार्टी नेतृत्व बगावत करने वालों के खिलाफ क्या कड़ा कदम उठाता है।






















