पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बाजार नियमों की अनदेखी करने वालों के मामलों को सुलझाने के लिए अपनी सेटलमेंट व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू किए हैं। नियामक द्वारा 6 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के अनुसार, निपटारे की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और पहले से तय सिद्धांतों पर आधारित बनाया गया है। इस नए तंत्र का केंद्रीय फोकस प्रक्रियागत देरी को समाप्त करना है, ताकि छोटे और कम जटिल मामलों को महीनों या वर्षों तक लटकाए रखने के बजाय बहुत तेजी से बंद किया जा सके। साथ ही, नियामक ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस सरलीकरण से अनुपालन में लापरवाही बरतने वाली संस्थाओं को बिना जवाबदेही के कोई अनुचित छूट न मिले।
आधार राशि और जुर्माना तय करने का नया फॉर्मूला
नए ढांचे के तहत सेटलमेंट की गणना एक स्पष्ट आधार राशि से शुरू होगी। यह मूल आधार राशि संबंधित उल्लंघन के लिए विभिन्न प्रतिभूति कानूनों के तहत निर्धारित न्यूनतम दंड के प्रावधानों से जोड़ी जाएगी। इसके बाद मामले के विशिष्ट तथ्यों के आधार पर इस राशि में विधिवत समायोजन किया जाएगा। नियामक इसमें कई बिंदुओं का आकलन करेगा, जैसे कि जांच या कार्यवाही की मौजूदा स्थिति, संबंधित पक्ष के खिलाफ पूर्व में की गई नियामकीय कार्रवाइयां और उल्लंघन की समग्र गंभीरता। इसके अलावा, मामले की परिस्थितियों को गंभीर बनाने वाले या राहत देने वाले सभी पहलुओं तथा नियामकीय प्रक्रिया में हुए कानूनी खर्चों को भी जोड़ा या घटाया जाएगा। इस विस्तृत व्यवस्था से सेटलमेंट की अंतिम देयता का पहले से सही आकलन करना संभव हो सकेगा।
अनुचित लाभ और निवेशकों की क्षति की अलग वसूली
संशोधित नियमों में एक अहम बुनियादी बदलाव यह किया गया है कि अवैध साधनों से अर्जित गैरकानूनी मुनाफे, नुकसान से बचाई गई धनराशि अथवा निवेशकों को पहुंचाई गई कुल वित्तीय हानि को मूल आधार राशि में नहीं जोड़ा जाएगा। यदि इन वित्तीय नुकसानों या अनुचित लाभ की सटीक गणना संभव है, तो नियामक उनकी वसूली पूरी तरह स्वतंत्र रूप से करेगा। पूर्व व्यवस्था में इन राशियों को सेटलमेंट की मुख्य गणना में ही शामिल कर लिया जाता था, जिससे अक्सर दोहरी गणना की तकनीकी विसंगतियां उत्पन्न होती थीं। अब नए नियमों में सेटलमेंट की राशि, गलत कमाई की जब्ती और सुधारात्मक शर्तों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांट दिया गया है। पहले प्रचलित गैर-मौद्रिक शर्तों को अब नया नाम देते हुए उपचारात्मक और नियामकीय शर्तें यानी रेमेडियल एंड रेगुलेटरी टर्म्स (RRT) कहा गया है।
10 लाख रुपये तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक तंत्र
प्रक्रिया को तेज गति देने के लिए सेबी ने फास्ट-ट्रैक निपटारे के दो स्वतंत्र रास्ते तैयार किए हैं। पहला विकल्प निपटान राशि की मौद्रिक सीमा पर आधारित है, जबकि दूसरा विकल्प उल्लंघन की प्रकृति और श्रेणी पर तय होता है। मौद्रिक सीमा आधारित प्रणाली में, जिन मामलों में सेटलमेंट की राशि 10 लाख रुपये तक निर्धारित होती है, उन्हें आंतरिक समिति की समीक्षा के तुरंत बाद सीधे पूर्णकालिक सदस्यों के उच्चस्तरीय पैनल को अग्रसारित कर दिया जाएगा। दूसरी ओर, उल्लंघन की श्रेणी पर आधारित मार्ग में सेबी स्वयं संबंधित पक्ष को आधिकारिक नोटिस जारी करेगा और एक तय राशि जमा करके मामले को शीघ्र सुलझाने का विकल्प देगा। इस निर्धारित राशि का भुगतान होते ही सदस्यों का अधिकृत पैनल सेटलमेंट आदेश पारित कर देगा।
वित्तीय विसंगतियों और फंड के दुरुपयोग पर लागू होने की शर्तें
नियामक के नए दिशा-निर्देशों में वित्तीय विवरणों में भ्रामक जानकारी देने या कॉर्पोरेट फंड के दुरुपयोग से जुड़े जटिल मामलों के सेटलमेंट की भी अनुमति दी गई है। हालांकि, ऐसे संवेदनशील मामलों में निपटारा केवल तभी स्वीकृत होगा जब उल्लंघनकर्ता अनिवार्य सुधारात्मक कार्रवाई पूरी करे। इन आवश्यक कदमों में संबंधित गलतियों का सार्वजनिक और उचित खुलासा करना तथा जिस फंड को अनधिकृत रूप से हटाया या डायवर्ट किया गया था, उसे पूरी तरह मूल खाते में वापस लाना अनिवार्य रूप से शामिल होगा।



















