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राजस्थान हाईकोर्ट को मिलेगा नया नेतृत्व, कॉलेजियम ने संजय अग्रवाल के नाम की सिफारिशराजस्थान
1 सित॰ 2026, 7:50 am (57 मिनट पहले)· 3

राजस्थान हाईकोर्ट को मिलेगा नया नेतृत्व, कॉलेजियम ने संजय अग्रवाल के नाम की सिफारिश

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का नया चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब बार और बेंच के बीच विवाद चल रहा था।

जयपुर में न्यायिक हलकों में चल रही सुगबुगाहट के बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने राजस्थान हाईकोर्ट को नया प्रशासनिक मुखिया देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कॉलेजियम ने जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का अगला चीफ जस्टिस नियुक्त करने की संस्तुति कर दी है। देश की सर्वोच्च अदालत की ओर से जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, राजस्थान के अलावा दो अन्य बड़े उच्च न्यायालयों के लिए भी नए चीफ जस्टिस के नामों पर मुहर लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया के तहत जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की कमान सौंपने का प्रस्ताव है, जबकि जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का नया चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की गई है।

विवादों के बीच प्रशासनिक बदलाव की आहट

राजस्थान हाईकोर्ट के लिए यह महत्वपूर्ण सिफारिश ऐसे संवेदनशील समय पर सामने आई है, जब तत्कालीन चीफ जस्टिस एसपी शर्मा के कामकाज और रवैये को लेकर बार और बेंच के बीच तनाव तथा असंतोष का माहौल बना हुआ था। जोधपुर वकील संघ ने इस मामले में मुखर रुख अपनाते हुए पहले ही जस्टिस एसपी शर्मा के अन्यत्र तबादले की मांग उठाई थी और साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट में एक स्थायी चीफ जस्टिस की नियुक्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया था। न्यायिक गलियारों में इस नई सिफारिश को हाईकोर्ट के शीर्ष नेतृत्व में एक बड़े परिवर्तन और सुधार के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि इन जजों की अंतिम नियुक्ति की प्रक्रिया केंद्र सरकार की संस्तुति और राष्ट्रपति के औपचारिक अनुमोदन के बाद ही पूरी होगी।

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क्या था बार और बेंच का विवाद?

राजस्थान हाईकोर्ट में वकीलों और न्यायपालिका के बीच उपजे असंतोष के इस पूरे प्रकरण की शुरुआत प्रशासनिक संवाद की कमी से जुड़ी थी। जोधपुर वकील संघ की ओर से 25 अप्रैल को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया गया था, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट में बिना किसी देरी के स्थायी चीफ जस्टिस नियुक्त किए जाने की पुरजोर मांग की गई थी। इसी पत्र में तत्कालीन चीफ जस्टिस एसपी शर्मा का तबादला राजस्थान से बाहर करने का स्पष्ट अनुरोध भी शामिल था। वकीलों का यह भी कहना था कि बार और बेंच के आपसी संवाद और व्यवहार में सुधार की आवश्यकता है। इसके अलावा, अदालत परिसर में अधिवक्ताओं को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया था, जिसमें वकीलों के बैठने के लिए केवल 10 गुणा 10 फीट के टिन शेड जैसी लचर व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए गए थे।

प्रशासनिक सुधार और संस्थागत प्रक्रिया

जोधपुर वकील संघ द्वारा उठाई गई इन तमाम मांगों में मुख्य रूप से जस्टिस एसपी शर्मा के स्थानांतरण और एक मुस्तैद स्थायी चीफ जस्टिस की तैनाती पर जोर दिया गया था। इस घटनाक्रम के बाद से ही राजस्थान हाईकोर्ट की आंतरिक कार्यप्रणाली और बार-बेंच के बीच के रिश्तों को लेकर न्यायिक जगत में चर्चाओं का दौर तेज हो गया था। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि जस्टिस संजय के. अग्रवाल के नाम की यह कॉलेजियम सिफारिश सीधे तौर पर केवल इसी विवाद का परिणाम है, क्योंकि कॉलेजियम की सिफारिशें न्यायपालिका में नियुक्तियों की एक सतत और संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं। फिर भी, चल रहे गतिरोध के बीच सामने आया यह प्रशासनिक बदलाव राजस्थान हाईकोर्ट के भविष्य के कामकाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अन्य उच्च न्यायालयों में भी नए प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अपने इस ताजा फैसले में केवल राजस्थान तक ही सीमित न रहते हुए देश के अन्य महत्वपूर्ण उच्च न्यायालयों में भी फेरबदल के प्रस्ताव दिए हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के लिए जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी का नाम आगे बढ़ाया गया है, जबकि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के लिए जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे को शीर्ष पद पर बैठाने का प्रस्ताव पारित हुआ है। इन सभी संस्तुतियों को अब केंद्र सरकार के पास अग्रिम कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा, जहां से औपचारिकताएं पूरी होने के बाद राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा नियुक्ति की अधिसूचना जारी की जाएगी। अधिसूचना जारी होने के बाद ही संबंधित न्यायाधीश अपने-अपने नए कार्यक्षेत्र का कार्यभार संभालेंगे। राजस्थान के संदर्भ में जस्टिस संजय के. अग्रवाल के नाम पर सबकी निगाहें इसलिए टिकी हैं क्योंकि हालिया दौर में बार-बेंच के समीकरण काफी चर्चा का विषय रहे हैं।

सवाल-जवाब

राजस्थान हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस के रूप में किसके नाम की सिफारिश की गई है?
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का नया चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है।
जोधपुर वकील संघ ने क्या मुख्य मांगें उठाई थीं?
वकील संघ ने तत्कालीन चीफ जस्टिस एसपी शर्मा के तबादले, स्थायी चीफ जस्टिस की नियुक्ति और अदालत परिसर में वकीलों के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग की थी।
किन अन्य उच्च न्यायालयों के लिए भी चीफ जस्टिस के नाम प्रस्तावित किए गए हैं?
कॉलेजियम ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के लिए जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी तथा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के लिए जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे के नाम सुझाए हैं।
अंतिम नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?
केंद्र सरकार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी और अधिसूचना जारी होने पर नए जजों की नियुक्ति फाइनल होती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 मिनट पहले

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा जस्टिस संजय के. अग्रवाल की सिफारिश और अन्य उच्च न्यायालयों में प्रस्तावित फेरबदल से बार और बेंच के बीच का तनाव कम होने की उम्मीद है। जोधपुर वकील संघ द्वारा उठाए गए प्रशासनिक सुधारों और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों को अब नए नेतृत्व के सामने प्राथमिकता से रखना होगा। राष्ट्रपति के औपचारिक अनुमोदन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया नेतृत्व वकीलों की चिंताओं को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से दूर करता है।

Rohan Verma@rohan-verma·9 मिनट पहले

यह प्रशासनिक कदम केवल एक उच्च न्यायालय के नेतृत्व परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश भर के न्यायिक परिसरों में बुनियादी ढांचे और संवादहीनता के पुराने संकट को भी रेखांकित करता है। जोधपुर बार एसोसिएशन द्वारा उठाए गए मुद्दे, जैसे वकीलों के बैठने के लिए लचर व्यवस्था और प्रशासनिक संवाद की कमी, यह साबित करते हैं कि न्यायिक दक्षता के लिए जजों की नियुक्ति के साथ-साथ कार्यस्थल की जमीनी हकीकत बदलना भी उतना ही अनिवार्य है। राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद नए नेतृत्व के सामने वकीलों के इन व्यावहारिक असंतोष को दूर करने की बड़ी चुनौती होगी।

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