राम की नगरी अयोध्या में एक बार फिर त्रेता युग का जीवंत स्वरूप दिखाई देने जा रहा है, जहां हर कण में भगवान श्रीराम की उपस्थिति महसूस की जाती है। दीपावली के इस पावन पर्व पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के कार्यकाल में पिछले एक दशक से लगातार भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान राम लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद अपनी राजधानी लौटे थे, तब अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाकर उनका स्वागत किया था। उसी ऐतिहासिक परंपरा को आधुनिकता के साथ जोड़ते हुए इस बार दसवीं बार दीपोत्सव का यह विराट उत्सव आयोजित किया जा रहा है, जिससे पूरी नगरी सतरंगी रोशनी और सुंदर सजावट से दुल्हन की तरह चमक उठी है।
ड्रोन शो और अंतरराष्ट्रीय रामलीला का आकर्षण
इस वर्ष के दीपोत्सव को बेहद खास बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और पारंपरिक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। आकाश में इक्कीस सौ अत्याधुनिक ड्रोन के जरिए भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को सजीव रूप में उकेरा जाएगा, जो रात के वक्त आसमान को रोशन करेंगे। इसके साथ ही इस बार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देश के सात अलग-अलग राज्यों के कलाकारों के साथ-साथ तीन विदेशी देशों की चार टीमें भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी। इनमें दक्षिण अफ्रीका से दो दल आए हैं, जबकि श्रीलंका और लाओस से एक-एक दल शामिल किया गया है। श्रीलंका के दल द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली रावणेश्वरा प्रस्तुति इस बार के मंचन का सबसे बड़ा आकर्षण साबित होने वाली है, जिसे रामकथा पार्क में आयोजित किया जाएगा।
विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी और कड़े सुरक्षा इंतजाम
इस भव्य और ऐतिहासिक आयोजन की गरिमा बढ़ाने के लिए देश के उपराष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में अयोध्या पहुंच रहे हैं। उनके स्वागत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे शहर को एक सुरक्षित छावनी के रूप में बदल दिया गया है, जहां च चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात हैं। अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने मीडिया को दी गई जानकारी में स्पष्ट किया है कि दीपोत्सव से जुड़ी सभी प्रशासनिक और सांस्कृतिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उपराष्ट्रपति महोदय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ रामकथा पार्क में उपस्थित रहकर इन सभी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और रामलीला के मंचनों का आनंद लेंगे। स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच यह पर्व धूमधाम से संपन्न हो सके।



















