राजस्थान के पाली जिले में अरावली पर्वतमाला की गोद में स्थित जवाई क्षेत्र में आस्था और वन्य जीवन का एक अनोखा संगम देखने को मिल रहा है. बिसलपुर और जीवदा गांव के मध्य स्थित सुप्रसिद्ध अंगाई माता मंदिर और निकटवर्ती ‘त्रिशूल वाली गुफा’ के आसपास इन दिनों एक पैंथर की निरंतर मौजूदगी चर्चा का केंद्र बनी हुई है. स्थानीय मान्यताओं और परंपरा के अनुसार यह कोई सामान्य वन्यजीव की भटकन नहीं है, बल्कि नवरात्रि के पावन पर्व के पूरे नौ दिनों तक यह तेंदुआ नियमित रूप से मंदिर परिसर तथा आस-पास की ऊंची चट्टानों पर डेरा डाले नजर आता है.
पवित्र धाम की पहरेदारी करता शांत वन्यजीव
आसपास के ग्रामीण और दर्शनार्थी मानते हैं कि जिस प्रकार देवी के भक्त आराधना करते हैं, उसी प्रकार यह पैंथर भी माता के शेर के रूप में इस पावन धाम की सुरक्षा और निगरानी कर रहा है. नवरात्रि महोत्सव के दौरान जब श्रद्धालु बड़ी संख्या में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, तब यह शिकारी जानवर अरावली की पथरीली चट्टानों पर अत्यंत शांत मुद्रा में बैठा दिखाई देता है. वह दूर से ही मंदिर की गतिविधियों और श्रद्धालुओं को निहारता रहता है, लेकिन किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता. तेंदुए का यह शांत और संयमित व्यवहार भक्तों में डर पैदा करने के बजाय अटूट श्रद्धा की भावना जगा रहा है.
अंगाई माता मंदिर का धार्मिक महत्व और नवविवाहितों की परंपरा
अरावली की सुरम्य वादियों में स्थित यह प्रसिद्ध धाम पूरे राजस्थान में अपनी प्राकृतिक छटा और आध्यात्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है. क्षेत्रीय जनमानस में इस मंदिर को ‘शक्तिद्वार की नींव’ का आदरणीय दर्जा प्राप्त है. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में स्थापित माता की भव्य और मनोहारी प्रतिमा के दर्शन करने से भक्तों के सभी संकट दूर होने का विश्वास है. इसके अलावा इस धार्मिक स्थल की एक अनूठी सामाजिक परंपरा भी है. इलाके के नवदंपति परिणय सूत्र में बंधने के पश्चात अपने वैवाहिक जीवन में खुशहाली, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सबसे पहले अंगाई माता की चौखट पर शीश नवाने आते हैं.
जयकारों और अरावली की वादियों में उमड़ती भक्तों की भीड़
नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान मंदिर परिसर में विशेष अनुष्ठान, दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन और महाआरती के भव्य कार्यक्रम आयोजित होते हैं. एक ओर जहां अरावली की विशाल पहाड़ियों में भक्तों द्वारा लगाए जा रहे जयकारों की गूंज सुनाई देती है, वहीं दूसरी ओर चट्टानों पर शांत बैठे तेंदुए की उपस्थिति इस पूरे वातावरण को अलौकिक बना देती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दृश्य दर्शाता है कि मां भगवती के दरबार में हिंसक प्रवृत्ति के जीव भी शांत भाव से रक्षक की भूमिका निभाते हैं. अंगाई माता के दर्शन के साथ-साथ पहाड़ियों पर बैठे इस पैंथर की एक झलक पाने के लिए इन दिनों दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी तादाद में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.



















