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राजा हरिश्चंद्र की वो कथा, जिसे सुनकर अजा एकादशी पर मिट जाते हैं सारे पापधर्म
6 सित॰ 2026, 11:23 pm (51 दिन पहले)· 2

राजा हरिश्चंद्र की वो कथा, जिसे सुनकर अजा एकादशी पर मिट जाते हैं सारे पाप

भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष एकादशी यानी अजा एकादशी इस साल 7 सितंबर 2026 को है, और इस दिन राजा हरिश्चंद्र की यह कथा पढ़े बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है और इस बार यह व्रत 7 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा और उपवास करने से व्यक्ति के पुराने पाप धुल जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि का रास्ता खुलता है। हिंदू परंपरा में किसी भी एकादशी की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक व्रती उस दिन की कथा न सुने या पढ़े, इसलिए अजा एकादशी के दिन राजा हरिश्चंद्र की यह प्रसिद्ध कथा जरूर पढ़नी चाहिए।

सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की परीक्षा

पौराणिक कथाओं में अयोध्या के राजा हरिश्चंद्र का जिक्र बड़ी श्रद्धा से किया जाता है क्योंकि वे अपनी सच्चाई और ईमानदारी के लिए दूर-दूर तक जाने जाते थे। कहा जाता है कि देवताओं के मन में एक दिन यह जानने की इच्छा जागी कि आखिर राजा अपने सत्य के व्रत पर कितना अडिग रह सकते हैं, तभी उनकी परीक्षा लेने की योजना बनी। इसी परीक्षा के तहत राजा हरिश्चंद्र ने एक रात सपने में देखा कि उन्होंने ऋषि विश्वामित्र को अपना पूरा राजपाट दान में दे दिया है। अगली सुबह जब वे उठे तो हैरान रह गए क्योंकि विश्वामित्र सचमुच उनके महल के द्वार पर खड़े थे और उन्हें याद दिला रहे थे कि रात में सपने में किया गया दान भी उतना ही सच्चा माना जाता है।

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राजा हरिश्चंद्र ने अपने सत्यनिष्ठा के व्रत को कभी न तोड़ने की कसम खाई हुई थी, इसलिए उन्होंने बिना किसी हिचक के अपना संपूर्ण राज्य विश्वामित्र के चरणों में सौंप दिया। लेकिन दान के साथ जो दक्षिणा चुकानी थी, उसके लिए राजा के पास कुछ भी शेष नहीं बचा था। पूर्वजन्म के कर्मों का फल भोगते हुए राजा हरिश्चंद्र को अपनी दक्षिणा चुकाने के लिए अपनी पत्नी, अपने बेटे और आखिर में खुद को भी बेचना पड़ा। इस बिक्री में उन्हें एक डोम ने खरीदा, जो शमशान घाट पर दाह संस्कार करवाने का काम करता था।

श्मशान में सेवा और सत्य की परीक्षा

राजा हरिश्चंद्र अब एक चांडाल के दास बन चुके थे और उनका काम था शव यात्रा में इस्तेमाल होने वाला कफन इकट्ठा करना। एक समय के राजा के लिए यह बेहद कठिन और अपमानजनक काम था, फिर भी उन्होंने विपत्ति की इस घड़ी में भी सच्चाई का दामन कभी नहीं छोड़ा। इसी तरह काम करते-करते कई वर्ष बीत गए, लेकिन इस नीच समझे जाने वाले कर्म को करते हुए राजा के मन में गहरा दुख भरा रहता था और वे लगातार इससे मुक्ति पाने का कोई रास्ता तलाशते रहे।

एक दिन जब राजा हरिश्चंद्र इसी उधेड़बुन में बैठे थे, तभी गौतम ऋषि उनके पास पहुंचे। राजा ने अपने जीवन की पूरी पीड़ा उन्हें सुनाई, तब महर्षि गौतम ने उन्हें भादों महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली अजा एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। ऋषि ने भरोसा दिलाया कि इस व्रत को करने मात्र से उनके सारे पाप जड़ से मिट जाएंगे।

व्रत का असर और कथा सुनने का फल

महर्षि गौतम के बताए अनुसार राजा हरिश्चंद्र ने पूरी विधि से उपवास रखा और पूरी रात जागरण किया। इस एक व्रत के प्रभाव ने उनके सारे संचित पाप नष्ट कर दिए और उनका जीवन एक बार फिर सुख से भर गया। व्रत के फलस्वरूप राजा को अपना खोया हुआ राज्य भी वापस मिल गया। अंतिम समय आने पर राजा हरिश्चंद्र अपने पूरे परिवार के साथ स्वर्ग लोक को प्राप्त हुए।

मान्यता है कि जो भी व्यक्ति अजा एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करता है, उसके सारे पाप धुल जाते हैं और अंत में उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं, यह भी कहा जाता है कि सिर्फ इस एकादशी की कथा सुनने भर से भी व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ करने के बराबर पुण्य फल मिल जाता है।

सवाल-जवाब

अजा एकादशी 2026 में कब है?
इस साल अजा एकादशी 7 सितंबर 2026 को रखी जाएगी।
अजा एकादशी किस माह में पड़ती है?
यह भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी है।
अजा एकादशी की कथा किस राजा से जुड़ी है?
यह कथा अयोध्या के राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है, जो अपनी सत्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे।
राजा हरिश्चंद्र को अपना राज्य किसे दान करना पड़ा?
उन्होंने अपना पूरा राजपाट ऋषि विश्वामित्र को दान कर दिया था।
दक्षिणा चुकाने के लिए राजा हरिश्चंद्र को क्या करना पड़ा?
उन्हें अपनी पत्नी, अपने बेटे और आखिर में खुद को भी बेचना पड़ा।
श्मशान में राजा हरिश्चंद्र क्या काम करते थे?
वे एक चांडाल के दास बनकर शव यात्रा के लिए कफन इकट्ठा करने का काम करते थे।
उन्हें अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह किसने दी?
गौतम ऋषि ने उन्हें यह व्रत रखने की सलाह दी थी।
इस व्रत और कथा सुनने का क्या फल बताया गया है?
मान्यता है कि इससे सारे पाप नष्ट होकर स्वर्ग की प्राप्ति होती है, और सिर्फ कथा सुनने से भी अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है।
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