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श्री महाकालेश्वर मंदिर: रविवार की भस्म आरती और बुकिंग के नए नियमधर्म
28 जून 2026, 7:03 am (123 दिन पहले)· 7

श्री महाकालेश्वर मंदिर: रविवार की भस्म आरती और बुकिंग के नए नियम

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार की सुबह भस्म आरती के साथ श्रृंगार दर्शन हुए, जहां हजारों भक्तों ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। इसके साथ ही मंदिर प्रशासन ने भस्म आरती की बुकिंग प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है।

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में 28 जून 2026, रविवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती और श्रृंगार दर्शन संपन्न हुए। इस पवित्र अवसर पर मंदिर परिसर भक्तों की भीड़ से भरा रहा, जो 'जय महाकाल' और 'हर हर महादेव' के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने महाकालेश्वर के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर भक्ति में लीन होकर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। इस दौरान पूरे मंदिर में एक अनोखी आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार रहा। भस्म आरती के बाद भक्तों ने प्रसाद भी ग्रहण किया।

महाकालेश्वर मंदिर में दैनिक आरती और परंपरा

श्री महाकालेश्वर मंदिर की परंपरा के अनुसार, भगवान महाकाल की प्रतिदिन 6 बार आरती की जाती है। इनमें से भस्म आरती का विशेष स्थान है, जिसके लिए न केवल भारत बल्कि दुनिया भर से श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित होने वाली इस आरती के दौरान भगवान को 'घटा टोप' का स्वरूप प्रदान किया जाता है। भस्म आरती की प्रक्रिया में एक सूती वस्त्र का उपयोग किया जाता है, जिसे बांधकर भस्म को श्री महाकालेश्वर पर अर्पित करते हुए आरती का अनुष्ठान पूरा किया जाता है। मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए बाबा महाकाल के दर्शन के बाद जूना महाकाल के दर्शन करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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भस्म आरती के लिए बुकिंग प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

मंदिर प्रशासन ने अब भस्म आरती के लिए पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से यह नई प्रणाली शुरू की गई है। अब कोई भी व्यक्ति अपने एक मोबाइल नंबर का उपयोग करके तीन महीने की अवधि में केवल एक ही बार भस्म आरती के लिए अपना पंजीकरण करा सकेगा।

नियमों पर प्रशासन का रुख

इस नई व्यवस्था के बारे में जानकारी देते हुए मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह नियम प्रत्येक भक्त पर समान रूप से प्रभावी होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रोटोकॉल कोटे के माध्यम से आने वाले श्रद्धालुओं को भी इसी नियम का पालन करना अनिवार्य है। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक नए भक्त बाबा महाकाल की इस विशेष आरती में शामिल होने का लाभ उठा सकें।

नियमों के पीछे का कारण

भस्म आरती में तीन महीने में केवल एक बार शामिल होने का यह प्रावधान सबसे पहले वर्ष 2024 में अस्तित्व में आया था। तत्कालीन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने उस समय आम भक्तों से मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यह निर्णय लिया था। कई श्रद्धालुओं ने शिकायत दर्ज कराई थी कि बुकिंग प्रक्रिया में कुछ लोग बार-बार अवसर प्राप्त कर रहे हैं, जिससे अन्य भक्तों को दर्शन से वंचित होना पड़ता है। इसी असंतुलन को दूर करने के लिए इस बुकिंग सीमा को लागू किया गया था।

सवाल-जवाब

श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती की बुकिंग के लिए नया नियम क्या है?
अब कोई भी श्रद्धालु एक मोबाइल नंबर का उपयोग करके तीन महीने की अवधि में केवल एक बार ही भस्म आरती के लिए पंजीकरण करवा सकता है।
क्या प्रोटोकॉल कोटे वाले श्रद्धालुओं पर भी यह नियम लागू होता है?
हाँ, मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सभी भक्तों पर समान रूप से लागू होता है, जिसमें प्रोटोकॉल कोटे से आने वाले लोग भी शामिल हैं।
भस्म आरती के नियमों में बदलाव की शुरुआत कब हुई थी?
तीन महीने में केवल एक बार आरती में शामिल होने का नियम पहली बार वर्ष 2024 में तत्कालीन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह द्वारा लागू किया गया था।
मंदिर में प्रतिदिन कितनी बार आरती होती है?
श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल की प्रतिदिन कुल 6 बार आरती की जाती है।
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