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मिल्की वे के केंद्र की अब तक की सबसे विस्तृत तस्वीर सामने आईविज्ञान
3 घंटे पहले· 2

मिल्की वे के केंद्र की अब तक की सबसे विस्तृत तस्वीर सामने आई

यूक्लिड स्पेस टेलीस्कोप ने हमारी आकाशगंगा के केंद्र की एक अत्यंत स्पष्ट और विशाल मोज़ेक तस्वीर खींची है। यह डेटा वैज्ञानिकों को एक्सोप्लैनेट्स की खोज और उनके द्रव्यमान को सटीकता से मापने में बड़ी मदद करेगा।

Ravikash GuptaRavikash GuptaSenior Correspondent 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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यूक्लिड स्पेस टेलीस्कोप द्वारा खींची गई एक नई तस्वीर मिल्की वे के केंद्र का अब तक का सबसे विस्तृत दृश्य प्रस्तुत करती है। इस मोज़ेक में 6 करोड़ से अधिक तारों के अलावा नेबुला और तारों के समूह भी दिखाई दे रहे हैं। यह उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा वैज्ञानिकों को माइक्रोलेंसिंग तकनीक का उपयोग करके एक्सोप्लैनेट्स के अस्तित्व की पुष्टि करने और उनके द्रव्यमान को पहले से कहीं अधिक सटीकता से मापने में सक्षम बनाएगा।

क्षमता और तकनीक

यूक्लिड को मुख्य रूप से दूर स्थित अरबों आकाशगंगाओं के अवलोकन के लिए तैयार किया गया था। हालांकि, इसका विजिबल-लाइट कैमरा मिल्की वे के केंद्र जैसे अत्यंत चमकदार और घने क्षेत्रों में भी व्यक्तिगत तारों को पहचानने में सक्षम है, बिना तीव्र रोशनी से प्रभावित हुए। 23 मार्च 2025 को यूक्लिड ने आकाशगंगा के उभार की ओर रुख किया और केवल 26 घंटे के अवलोकन में यह विशाल तस्वीर तैयार की। यह परिणाम नौ अलग-अलग 'पॉइंटिंग्स' यानी एक्सपोजर का एक मोज़ेक है, जिसमें से प्रत्येक ने पूर्ण चंद्रमा से बड़े आकाश के हिस्से को कवर किया है।

तुलनात्मक क्षमता

यूक्लिड की विजिबल-लाइट छवियों की गुणवत्ता हबल स्पेस टेलीस्कोप के समान है, लेकिन एक बड़ा अंतर इसकी गति और कवरेज क्षेत्र में है। यूक्लिड द्वारा कुछ ही घंटों में लिया गया एक एक्सपोजर हबल के फील्ड ऑफ व्यू से 270 गुना बड़ा क्षेत्र कवर करता है। इसकी दक्षता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केक ऑब्जर्वेटरी को इसी तरह का मोज़ेक तैयार करने में लगभग 2,000 घंटे का समय लग जाएगा।

एक्सोप्लैनेट और माइक्रोलेंसिंग

यह नई छवि आकाशगंगा के सबसे भीड़भाड़ वाले हिस्सों में से एक को दर्शाती है, जो ग्रेविटेशनल माइक्रोलेंसिंग के माध्यम से एक्सोप्लैनेट्स खोजने के लिए आदर्श स्थान है। इस अवलोकन अभियान का नेतृत्व करने वाले ज्यां-फिलिप ब्यूलियू ने बताया कि माइक्रोलेंसिंग के लिए तारों से घने आकाश के हिस्सों को देखना आवश्यक है, जैसा कि हमारी आकाशगंगा का केंद्र है। पिछले 20 वर्षों में, लगभग 300 एक्सोप्लैनेट्स इस तकनीक के जरिए खोजे गए हैं, जो सभी ग्राउंड-बेस्ड टेलीस्कोप से और आकाशगंगा के केंद्र की ओर देखे गए थे। यूक्लिड की इस छवि में 51 ज्ञात ग्रह प्रणालियां शामिल हैं और यह भविष्य में और भी ग्रहों का अध्ययन करने में सहायता करेगी।

भविष्य के मिशनों के लिए संदर्भ

यद्यपि माइक्रोलेंसिंग घटना का पता लगाने के लिए कई सप्ताह के अवलोकन की आवश्यकता होती है, इसलिए यूक्लिड अपने संक्षिप्त अभियान में कोई नई घटना तो नहीं खोज पाया, लेकिन इसका मूल्य डेटा में निहित है। यह डेटा ज्ञात ग्रहों और भविष्य में खोजे जाने वाले ग्रहों के द्रव्यमान को मापने में मदद करेगा। डेटा प्रकाशन का नेतृत्व करने वाली नतालिया रेक्टसिनी के अनुसार, यूक्लिड ने उन सभी तारों का डेटा रिकॉर्ड कर लिया है जो भविष्य में रोमन स्पेस टेलीस्कोप द्वारा देखी जाने वाली माइक्रोलेंसिंग घटनाओं में शामिल होंगे। यह डेटा एक टाइम रेफरेंस के रूप में कार्य करेगा, जिससे यह देखा जा सकेगा कि सितारे आपस में ओवरलैप होने से पहले कैसे दिखते थे।

अन्य वैज्ञानिक उपयोग

यूक्लिड का यह अवलोकन भविष्य के मिशनों के लिए एक संदर्भ संग्रह बन जाएगा। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) की यूक्लिड प्रोजेक्ट वैज्ञानिक वेलेरिया पेटोरिनो ने बताया कि मात्र 24 घंटों में यूक्लिड ने मिल्की वे के केंद्र का एक बड़ा और शार्प दृश्य प्रदान किया है। इस जानकारी का उपयोग ब्राउन ड्वार्फ, बाइनरी स्टार्स, तारों की गति और आकाशगंगा में मौजूद धूल के अध्ययन जैसे अन्य वैज्ञानिक कार्यों के लिए भी किया जा सकता है।

इसका आप पर असर

भारत में: अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति से शोधकर्ताओं को वैश्विक डेटा सेट तक पहुँच प्राप्त होती है।

अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए: यह डेटा आकाशगंगा की संरचना और ग्रह प्रणालियों के निर्माण को समझने में मदद करेगा, जो भविष्य में खगोलीय खोजों को नई दिशा देगा।

सवाल-जवाब

यूक्लिड स्पेस टेलीस्कोप ने मिल्की वे की तस्वीर कब ली?
यूक्लिड ने 23 मार्च 2025 को मिल्की वे के केंद्र का अवलोकन किया और 26 घंटे में यह तस्वीर कैप्चर की।
इस तस्वीर की मुख्य विशेषता क्या है?
इस तस्वीर में 6 करोड़ से अधिक तारे हैं और यह हबल टेलीस्कोप की तुलना में 270 गुना बड़े क्षेत्र को एक बार में कवर करती है।
माइक्रोलेंसिंग तकनीक क्या है?
यह एक खगोलीय तकनीक है जिसमें तारों की घनी भीड़ का उपयोग करके दूर स्थित ग्रहों का पता लगाया जाता है।
यह डेटा भविष्य में कैसे मदद करेगा?
यह डेटा एक्सोप्लैनेट्स के द्रव्यमान को मापने और भविष्य के रोमन स्पेस टेलीस्कोप मिशन के लिए एक संदर्भ के रूप में कार्य करेगा।
#विज्ञान#अंतरिक्ष#खगोलविज्ञान#यूक्लिडटेलीस्कोप#मिल्कीवे#एक्सोप्लैनेट#नासा

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