सूरज इन दिनों बेहद बेचैन नजर आ रहा है और उसकी सतह पर लगातार बड़े धमाके हो रहे हैं। 1 जुलाई की रात सूरज पर अब तक का सबसे ताकतवर सौर तूफान दर्ज किया गया, जिसे वैज्ञानिकों ने X-Class श्रेणी में रखा है। स्पेस साइंस की रेटिंग में यह सबसे ऊंचा और सबसे विनाशकारी दर्जा माना जाता है, यानी इससे बड़ा विस्फोट फिलहाल संभव ही नहीं समझा जाता। इस घटना ने दुनिया भर के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को सतर्क कर दिया है और धरती पर पड़ने वाले असर को लेकर चेतावनी जारी कर दी गई है।
X-Class सौर तूफान की ताकत कितनी खतरनाक
रूस की एकेडमी ऑफ साइंसेज की सोलर लैबोरेट्री ने पुष्टि की है कि यह विस्फोट आधी रात के आसपास रिकॉर्ड हुआ। सौर तूफानों को उनकी ताकत के आधार पर पांच श्रेणियों, A, B, C, M और X में बांटा जाता है। इस क्रम में हर अगली श्रेणी पिछली से 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली मानी जाती है, और X-Class इस पूरी सूची में सबसे ऊपर आता है। यही वजह है कि इस ताजा विस्फोट को लेकर धरती के लिए बड़ा खतरा बताया जा रहा है।
मोबाइल, इंटरनेट और बिजली पर मंडराया संकट
वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि जब भी सूरज पर इतना बड़ा X-Class विस्फोट होता है, उसके साथ ही दहकते हुए प्लाज्मा के विशाल बादल अंतरिक्ष में फैलने लगते हैं। जब चार्ज्ड पार्टिकल्स की यह खतरनाक लहर सीधे धरती के वायुमंडल से टकराती है, तो यहां भयंकर चुंबकीय तूफान पैदा हो सकता है। इसका सीधा असर यह होगा कि दुनिया भर के सैटेलाइट और जीपीएस सिस्टम काम करना बंद कर सकते हैं, जिससे मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं पल भर में ठप पड़ सकती हैं। इतना ही नहीं, कई देशों के पावर ग्रिड फेल होने से दुनिया के बड़े हिस्से में अचानक अंधेरा छा सकता है, जिससे अरबों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी थम सकती है।
एक दिन पहले भी दिखा सूरज का रौद्र रूप
दिलचस्प बात यह है कि इस बड़े धमाके से ठीक एक दिन पहले, यानी 30 जून को भी सूरज ने अपनी ताकत दिखाई थी। उस दिन सूरज की सतह पर लगातार तीन बार M-Class स्तर के सौर तूफान दर्ज किए गए थे, जो ताकत के लिहाज से दूसरे नंबर पर आता है। चौबीस घंटे के भीतर सूरज का इस तरह बार-बार भड़कना बता रहा है कि वह इस समय अपने सबसे आक्रामक और अस्थिर दौर से गुजर रहा है।
सूरज के भीतर धड़क रही रहस्यमयी दिल की धड़कन
इसी बीच बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के स्पेस वैज्ञानिकों ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने पाया है कि सूरज के भीतर एक अजीब सी गूंज और कंपन महसूस हो रहा है, जिसे वैज्ञानिक सूरज की दिल की धड़कन नाम दे रहे हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह कंपन दरअसल सूरज के भीतर मैग्नेटिक फील्ड के तेजी से बदलने, टूटने और फिर से जुड़ने की वजह से पैदा हो रहा है। सूरज के इस बार-बार बदलते व्यवहार को ही अंतरिक्ष के मौसम के इतना अस्थिर और खतरनाक होने की वजह माना जा रहा है, जिसका सीधा असर धरती पर पड़ रहा है।
आगे और बढ़ सकता है खतरा, सौर चक्र अपने चरम पर
दुनिया भर के स्पेस वैज्ञानिक फिलहाल सूरज की हर हरकत पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। उनका कहना है कि सबसे चिंता की बात यह है कि आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। दरअसल सूरज इस समय अपने 11 साल के सौर चक्र के सबसे चरम वाले दौर में है। इसका मतलब है कि सूरज का यह उग्र रवैया आसानी से थमने वाला नहीं है और आने वाले कई हफ्तों तक धरती को अंतरिक्ष से आने वाले इस अदृश्य खतरे के साये में ही रहना पड़ सकता है।













