राजस्थान में अजमेर जिले के तीर्थ स्थल पुष्कर से तकरीबन 5 किलोमीटर की दूरी पर कानस और होकरा गांव की सुरम्य पहाड़ियों के मध्य बादर माता का प्राचीन मंदिर अवस्थित है। चारों तरफ से प्राकृतिक छटा और अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा यह धार्मिक स्थल भक्तों के गहरे विश्वास का केंद्र बना हुआ है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु इस पावन धाम में न केवल शीश नवाने आते हैं, बल्कि अपनी गंभीर व्याधियों और जीवन के संकटों से मुक्ति पाने की प्रार्थना भी करते हैं।
गंभीर रोगों से छुटकारा और संतान प्राप्ति का अटूट विश्वास
क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार, बादर माता के दरबार में हाजिरी लगाने वाले जातकों को गंभीर और पुरानी बीमारियों से राहत मिलती है। विशेष रूप से चर्म रोग, लंबे समय से चली आ रही शारीरिक तकलीफों और मानसिक अवसाद से पीड़ित लोगों के कष्ट दूर होने की अनेक कथाएं यहां प्रचलित हैं। निसंतान दंपतियों के लिए भी यह धाम गहरी श्रद्धा का स्थल है। ऐसी लोक मान्यता है कि सच्चे मन से माता के सम्मुख मन्नत मांगने और विधिवत पूजा अर्चना करने पर महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है और उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है।
1300 वर्षों से अधिक का गौरवशाली इतिहास और चमत्कारी कुंड
मंदिर के वर्तमान पुजारी राजू रावत के अनुसार, इस देवस्थान का इतिहास 1300 वर्ष से भी अधिक पुराना है। वे स्वयं पिछले 30 वर्षों से माता की सेवा और पूजा पाठ का दायित्व संभाल रहे हैं। उनसे पहले उनके पूर्वज भी पीढ़ियों से इसी स्थान पर माता की आराधना करते चले आ रहे हैं। पुजारी का कहना है कि उनकी कई पीढ़ियां माता के अलौकिक चमत्कारों और कृपा की गवाह रही हैं।
मंदिर परिसर में एक अत्यंत पावन जल कुंड भी विद्यमान है, जो पूरे बारह महीने स्वच्छ जल से लबालब रहता है। इस कुंड के पानी को भक्तगण बेहद चमत्कारी मानते हैं। श्रद्धालुओं में यह दृढ़ विश्वास है कि इस कुंड के पावन जल के प्रयोग से चर्म रोगों और अन्य शारीरिक व्याधियों से तत्काल लाभ मिलता है। इसके साथ ही संतान प्राप्ति की कामना रखने वाली महिलाएं भी इस कुंड और माता के चरणों में अपना शीश झुकाती हैं।
अनहोनी से पूर्व चेतावनी और ग्रामीणों की अटूट श्रद्धा
गांव के बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्राचीन समय में जब इलाके में डकैती, चोरी अथवा असुरक्षा का वातावरण बन जाता था, तब माता की कृपा से ग्रामीणों को किसी भी संकट की पूर्व सूचना या संकेत मिल जाया करते थे। इन अलौकिक चेतावनियों के चलते पूरा गांव सतर्क हो जाता था और किसी भी बड़ी अनहोनी से पूर्व सुरक्षात्मक कदम उठा लिए जाते थे। माता के इन्हीं चमत्कारों और सुरक्षा भाव की वजह से आज भी यह तीर्थ स्थल आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

















