पूर्णिया में 4 अगस्त को सावन की अंतिम सोमवारी मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन का पूरा महीना सभी महीनों में सबसे अधिक पवित्र और विशेष माना जाता है। इस दौरान शिव भक्त भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कठोर उपासना, आराधना और विधि-विधान से पूजा-पाठ करते हैं। ऐसा विश्वास है कि सच्चे मन से की गई पूजा से महादेव अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं।
सावन का यह पूरा महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस अवधि में जो भी व्यक्ति पूरी निष्ठा और सच्चे दिल से शिव आराधना करता है, उस पर हमेशा महादेव की विशेष कृपा बनी रहती है। लेकिन बहुत से लोग यह नहीं जानते कि शिव जी की पूजा संपन्न करने के बाद यदि नंदी के कान में अपनी इच्छा या मनोकामना कह दी जाए, तो वह बहुत जल्द पूरी हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि कोई भक्त भोलेनाथ की पूजा के बाद नंदी से अपनी बात नहीं कहता है, तो उसकी पूजा कुछ अधूरी सी मानी जाती है।
पौराणिक मान्यता और संदेशवाहक
पूर्णिया के प्रसिद्ध पंडित मनोत्पल झा का कहना है कि शिव आराधना के बाद भक्तों को नंदी महाराज के कान में अपनी बात अवश्य रखनी चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह कही गई बातें निश्चित रूप से पूरी होती हैं। पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार नंदी केवल भगवान शिव के सवारी वाहन मात्र नहीं हैं, बल्कि वे उनके सबसे बड़े परम भक्त और बेहद विश्वासपात्र संदेशवाहक भी माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि जब कोई भक्त अपने मन की बात नंदी के कान में कहता है, तो नंदी उसे एक दूत की तरह सीधे महादेव तक पहुंचा देते हैं, जिससे वह मुराद जल्द ही स्वीकार हो जाती है।
नंदी के कान में प्रार्थना करने की सही विधि
पंडित मनोत्पल झा ने नंदी के कान में मनोकामना कहने का सही तरीका भी विस्तार से बताया है। सबसे पहले शिवभक्त को विधि-विधान से शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए और उन पर जल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद पवित्र मन से ओम नमः शिवाय मंत्र का जप करना चाहिए। इसके पश्चात नंदी महाराज की प्रतिमा के पास जाकर उनके दाहिने कान में बहुत ही धीमी आवाज में अपनी मनोकामना कहनी चाहिए।
प्रार्थना करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि जब आप दाहिने कान में अपनी बात कह रहे हों, तब अपने दूसरे हाथ से नंदी के बाएं कान को हल्के से बंद रखना चाहिए ताकि आवाज बाहर न जाए। इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर नंदी को प्रणाम करें और कुछ देर शांत होकर मौन बैठ जाएं। इसके बाद वहां से उठकर अपने दैनिक कार्यों में लग जाएं। ऐसा करने से कुछ ही दिनों में महादेव की असीम कृपा आपके जीवन पर बरसने लगेगी।



















