अंतरराष्ट्रीय टेनिस कोर्ट पर जब कोई खिलाड़ी लंबे समय बाद वापसी करता है, तो उसके सामने फिटनेस और लय दोनों की बहुत बड़ी चुनौती होती है। ब्रिटिश महिला टेनिस खिलाड़ी सोने कार्तल ने ऐसी ही प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़ते हुए अपने करियर की सबसे बड़ी कामयाबी हासिल की है। केवल छह महीने पहले तक वह बिस्तर से उठने और रोजमर्रा के काम करने के लिए भी संघर्ष कर रही थीं, लेकिन अब वह शानदार प्रदर्शन की बदौलत अपने करियर में पहली बार ब्रिटेन की नंबर एक महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
चोट के दर्द से जूझते हुए शुरू हुआ था वापसी का सफर
सोने कार्तल के लिए इस साल का सफर शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन रहा है। करीब छह महीने पहले उनकी पीठ में स्ट्रेस फ्रैक्चर हो गया था। इस चोट की वजह से उनका दर्द इस हद तक बढ़ गया था कि वह खड़े होकर ब्रश करने जैसे बुनियादी काम भी ठीक से नहीं कर पा रही थीं। शुरुआत में उन्हें कई हफ्तों तक पूरी तरह बिस्तर पर आराम करना पड़ा, जहां कुछ दिन राहत भरे होते थे तो कई दिन ऐसे भी आए जब बिना तेज दर्द के चलना भी नामुमकिन लगता था। इस धीमी और दर्दनाक प्रक्रिया ने उन्हें यह अहसास कराया कि इंसान सामान्य दिनों की अच्छी सेहत को कितनी सहजता से हल्के में ले लेता है।
मार्च महीने में इंडियन वेल्स टूर्नामेंट के दौरान कार्तल विश्व रैंकिंग में 54वें पायदान पर थीं, तभी उनकी पीठ की इस गंभीर समस्या ने उन्हें खेल से दूर कर दिया। लगातार छह महीने या उससे अधिक समय तक कोर्ट से बाहर रहने वाले खिलाड़ियों को डब्ल्यूटीए की तरफ से प्रोटेक्टेड रैंकिंग की सुविधा मिलती है। 24 वर्षीय कार्तल ने इसी विशेष रैंकिंग का सहारा लिया और करीब एक महीने पहले प्रतिस्पर्धी टेनिस में दोबारा कदम रखा।
वुहान ओपन में दिग्गजों को हराकर फाइनल तक का सफर
एशियाई दौरे पर डब्ल्यूटीए 1000 टूर्नामेंट वुहान ओपन में उतरना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता, क्योंकि यह प्रतियोगिता ग्रैंड स्लैम के ठीक नीचे की श्रेणी में आती है और इसमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भाग लेती हैं। कार्तल ने कोर्ट पर लौटते ही अपनी जबर्दस्त खेल शैली का परिचय दिया। उन्होंने टूर्नामेंट में विश्व की शीर्ष 10 में शुमार खिलाड़ियों और पूर्व ग्रैंड स्लैम विजेताओं को लगातार मात देकर फाइनल का टिकट कटाया।
खिताबी मुकाबले में उनका सामना इस साल की फ्रेंच ओपन उपविजेता माया च्वालिनस्का से हुआ। फाइनल में कार्तल ने एक सेट और सर्विस ब्रेक की बढ़त बना रखी थी, लेकिन लगातार मैचों की थकान के चलते वह अंत में अपनी लय बरकरार नहीं रख सकीं। विश्व में 22वीं रैंक वाली च्वालिनस्का के खिलाफ मिली इस कड़वी हार के बावजूद कार्तल ने यह साफ कर दिया कि यह नतीजा उनकी उम्मीदों से कहीं अधिक बड़ा और सकारात्मक है।
प्रोटेक्टेड रैंकिंग का सही उपयोग और भविष्य की राह
वुहान ओपन में उपविजेता रहने पर कार्तल को 650 रैंकिंग अंक मिले। इन महत्वपूर्ण अंकों की बदौलत वह न सिर्फ अपनी पुरानी 54वीं रैंकिंग से आगे निकल गई हैं, बल्कि जुलाई 2025 में विंबलडन के अंतिम 16 में पहुंचकर हासिल की गई 44वीं करियर-बेस्ट रैंकिंग के भी बेहद करीब पहुंच गई हैं। यह सफलता इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि डब्ल्यूटीए का स्पेशल रैंकिंग नियम चोटिल खिलाड़ियों को निष्पक्ष मंच देने के अपने मकसद में कितना कारगर साबित होता है।
वापसी के महज 10 मुकाबलों के भीतर ही अपनी रैंकिंग को वापस हासिल कर लेना उनके आने वाले 2027 सीजन के लिए अत्यंत लाभकारी होगा। अब उन्हें ऑस्ट्रेलियन ओपन समेत बड़े टूर्नामेंटों में प्रवेश पाने के लिए किसी प्रोटेक्टेड रैंकिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे वह अपने शरीर और काम के बोझ को बेहतर ढंग से संभाल सकेंगी और टूर्नामेंट के चयन में उन्हें पूरी स्वतंत्रता मिलेगी। एशियाई दौरे पर उन्होंने बीजिंग में हुए चाइना ओपन में भी दो मैच जीते थे, जिससे उनका कुल प्रदर्शन तय लक्ष्य से बहुत आगे निकल गया।
ब्रिटिश टेनिस को मिली नई उम्मीद और मजबूती
कार्तल की यह शानदार वापसी ब्रिटिश टेनिस परिदृश्य के लिए भी संजीवनी की तरह साबित हुई है। साल 2026 में हुए चार में से तीन बड़े ग्रैंड स्लैम में जब कार्तल अनुपस्थित थीं, तब कोई भी ब्रिटिश महिला खिलाड़ी किसी भी ग्रैंड स्लैम के दूसरे दौर से आगे नहीं बढ़ पाई थी। ब्रिटेन की तरफ से 2019 में जोहाना कोंटा के बाद डब्ल्यूटीए 1000 टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाली कार्तल पहली खिलाड़ी बनी हैं। इसके अलावा, साल 2021 में एम्मा राडुकानू के यूएस ओपन खिताब जीतने के बाद ब्रिटिश महिला टेनिस में यह किसी भी खिलाड़ी का सर्वश्रेष्ठ एकल परिणाम है।
ब्रिटेन के लिए इस साल गर्मियों में आर्थर फेरी ने विंबलडन के सेमीफाइनल तक का सनसनीखेज सफर तय किया था। फेरी की तरह ही कार्तल के पास भी कई अन्य शीर्ष खिलाड़ियों जैसी असाधारण शारीरिक लंबाई या प्राकृतिक ताकत नहीं है, लेकिन उनके पास बेसलाइन से लगातार मजबूत शॉट खेलने की कला, बेहतरीन एथलेटिसिज्म और दबाव में शांत रहने का दिमाग है। यही खूबियां उन्हें दुनिया की शीर्ष 50 खिलाड़ियों की सूची में मजबूती से स्थापित करने का दम रखती हैं।
सख्त रिहैबिलिटेशन और सपोर्ट टीम की भूमिका
पीठ के गंभीर फ्रैक्चर को पूरी तरह ठीक करने के लिए कार्तल ने कड़ा पसीना बहाया। उनके कोचिंग स्टाफ के अनुसार, रिहैब के दौरान वह सुबह 9 से शाम 5 बजे तक एक सामान्य नौकरी की तरह लगातार मेहनत करती रहीं ताकि कोर्ट पर वापसी करते ही पुरानी लय हासिल की जा सके। उपविजेता ट्रॉफी प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच बेन रीव्स, फिटनेस कोच इयान आइलवर्ड और फिजियो दानी गिलैंडर्स को दिया। उनका कहना था कि अगर यह तिकड़ी उनकी पीठ के इलाज और फिटनेस में दिन-रात साथ न देती, तो उनका इस मुकाम तक पहुंचना संभव नहीं होता।



















