जापान के आईची-नागोया में आयोजित हो रहे 20वें एशियाई खेलों में भारतीय दल के लिए एक बेहद भावुक और यादगार मुकाबला देखने को मिला। महिला पारंपरिक 60 किग्रा मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) स्पर्धा के सेमीफाइनल में भारत की सुचिका तरियाल को एक बेहद करीबी और कड़े मुकाबले के बाद कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। मैट पर हुए इस जबरदस्त संघर्ष में अंत तक दोनों ही फाइटर्स ने पूरा दमखम दिखाया, लेकिन मैच के तकनीकी नियमों और शरीर के वजन के आधार पर निकाले गए अंतिम परिणाम ने स्वर्ण पदक मुकाबले का रास्ता रोक दिया। इस ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल को जीतने के बाद मैट पर सुचिका की आंखें छलक पड़ीं, जो वर्षों के कड़े अभ्यास और अंतिम दौर तक पहुंचने की उनकी असीम चाहत को बयां कर रही थीं।
क्वार्टर फाइनल में शानदार जीत के साथ बनाई थी सेमीफाइनल में जगह
हरियाणा की रहने वाली 36 वर्षीय अनुभवी एथलीट सुचिका तरियाल ने इस टूर्नामेंट में शुरुआत से ही अपने आक्रामक और सधे हुए खेल का परिचय दिया था। रविवार को खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उन्होंने बेहतरीन तकनीकी पकड़ दिखाते हुए मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलामा को 2-0 के स्पष्ट अंतर से मात दी थी। इस एकतरफा जीत ने भारतीय खेमे में पदक की उम्मीदों को काफी मजबूत कर दिया था और सुचिका आत्मविश्वास के साथ सोमवार को सेमीफाइनल मुकाबले में उतरीं।
सेमीफाइनल में जोरदार भिड़ंत और अतिरिक्त राउंड का रोमांच
सोमवार को हुए सेमीफाइनल मुकाबले में सुचिका का सामना सिंगापुर की हुई हून टियो से हुआ। मैच के पहले राउंड में सिंगापुर की फाइटर ने बढ़त बनाते हुए सुचिका पर दबाव बनाने का प्रयास किया। हालांकि, दूसरे राउंड में भारतीय खिलाड़ी ने जबर्दस्त रणनीति और मानसिक मजबूती दिखाते हुए शानदार वापसी की और मुकाबले को पूरी तरह बराबरी पर ला खड़ा किया। निर्धारित समय समाप्त होने तक दोनों फाइटर्स में से किसी के पास भी स्पष्ट बढ़त नहीं थी, जिसके चलते मुकाबला एक मिनट के अतिरिक्त राउंड में चला गया। इस अतिरिक्त समय में भी दोनों खिलाड़ियों ने अपनी पूरी शक्ति झोंक दी। राउंड खत्म होने पर दोनों ही खिलाड़ी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थीं और जश्न मनाने लगीं, लेकिन रेफरी द्वारा शुरुआत में हुई हून टियो के पक्ष में फैसला दिए जाने के बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई।
विवाद, भारतीय दल की चुनौती और वजन के आधार पर फैसला
रेफरी के फैसले से सुचिका तरियाल बेहद स्तब्ध थीं और उनके लिए इस परिणाम को स्वीकार करना कठिन था। इस स्थिति को देखते हुए भारतीय टीम प्रबंधन ने तुरंत इस निर्णय को चुनौती दी। समीक्षा के उपरांत मुकाबले का परिणाम ड्रॉ घोषित किया गया। इसके बाद प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार मुकाबले का अंतिम विजेता तय करने के लिए दोनों एथलीटों के सुबह दर्ज किए गए वजन का सहारा लिया गया। एमएमए खेल महासंघ के अध्यक्ष निखिल कुंडे के अनुसार, सिंगापुर की फाइटर का वजन सुचिका के मुकाबले लगभग 700 ग्राम कम पाया गया। इसी कम वजन के आधार पर हुई हून टियो को 2-0 के आधिकारिक फैसले के साथ विजेता घोषित कर फाइनल में प्रवेश दे दिया गया, जबकि सुचिका के हिस्से ब्रॉन्ज मेडल आया।
सड़क पर छेड़खानी से लेकर एशियाई खेलों के मंच तक का सफर
सुचिका तरियाल की यह उपलब्धि केवल एक पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विपरीत परिस्थितियों से लड़कर आगे बढ़ने की एक प्रेरणादायक दास्तान है। जब वह महज 12 साल की थीं, तब सड़क पर उत्पीड़न और छेड़खानी का सामना करने के बाद उन्होंने खुद को सशक्त बनाने के लिए मार्शल आर्ट्स सीखने का संकल्प लिया था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और कई विधाओं में निपुणता हासिल की। वह इससे पहले 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो और 2023 एशियाई खेलों में कुराश स्पर्धा में भी भारत का मान बढ़ा चुकी हैं। एशियन गेम्स 2026 में एमएमए का यह कांस्य पदक उनकी वर्षों की तपस्या और पारिवारिक सहयोग का प्रत्यक्ष प्रमाण है।



















