हैमिल्टन के सेडन पार्क मैदान पर खेले गए पांच मैचों की टी20 सीरीज के अंतिम मुकाबले में मेजबान न्यूजीलैंड ने भारत को सात विकेट से मात दी। इस अंतिम मैच में पराजय झेलने के बाद भी भारतीय क्रिकेट टीम पांच मैचों की इस द्विपक्षीय सीरीज को 3-2 के अंतर से जीतने में सफल रही। सीरीज के शुरुआती तीन मुकाबलों में लगातार शिकस्त झेलने के बाद कीवी टीम ने जबर्दस्त वापसी करते हुए अंतिम दो मैच अपने नाम किए। सेडन पार्क में टॉस गंवाने के बाद भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी का न्योता मिलने पर निर्धारित 20 ओवरों में 191 रन बनाए थे। हालांकि भारतीय गेंदबाजों की साधारण गेंदबाजी और कमजोर फील्डिंग का फायदा उठाते हुए कीवी बल्लेबाजों ने 192 रनों के इस लक्ष्य को महज 18 ओवरों में तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया। इस मुकाबले के समाप्त होने पर भारतीय टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर ने टीम के प्रदर्शन, पिच के मिजाज और खेल की कमजोर कड़ियों पर खुलकर बात की।
बल्लेबाजी में मोमेंटम टूटने और 191 के स्कोर पर कप्तान की राय
मैच के बाद आधिकारिक ब्रॉडकास्टर से बातचीत करते हुए कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि 191 रनों का कुल योग एक सम्मानजनक और ठीक-ठाक स्कोर था। हालांकि उन्होंने माना कि जिस तरह से मिडिल ओवर्स में उन्होंने और ईशान ने पारी को गति दी थी, टीम उससे भी बड़ा स्कोर खड़ा कर सकती थी। उन्होंने कहा कि ईशान और उनके बीच बने मोमेंटम के बाद लगातार अंतराल पर विकेट गिरे, जिससे क्रीज पर आने वाले नए बल्लेबाजों पर अचानक भारी दबाव बन गया। सेडन पार्क की पिच की परिस्थितियों की चर्चा करते हुए श्रेयस अय्यर ने बताया कि इस सतह पर बल्लेबाजी करना बिल्कुल भी आसान नहीं था, क्योंकि गेंद लगातार सीम कर रही थी और थोड़ी रुक कर बल्ले पर आ रही थी। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि वह खुद और तिलक दोनों लगभग एक जैसे अंदाज में ही आउट हुए। तेज गेंदबाजों द्वारा डाली जा रही हार्ड लेंथ गेंदों ने बल्लेबाजों के लिए काफी कड़ी चुनौती पेश की, फिर भी टीम 191 के आंकड़े तक पहुंचने में सफल रही।
गेंदबाजी और फील्डिंग में ढीले प्रदर्शन की समीक्षा
मैच के दौरान भारतीय टीम की रक्षात्मक रणनीति और अनुशासनहीनता पर बात करते हुए श्रेयस अय्यर ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि गेंदबाजी और फील्डिंग दोनों ही मोर्चों पर टीम काफी बेहतर प्रदर्शन कर सकती थी। उन्होंने माना कि इन दोनों विभागों में टीम के प्रयास थोड़े ढीले रहे, जिसकी वजह से न्यूजीलैंड ने आसानी से मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली और दो ओवर शेष रहते ही लक्ष्य को हासिल कर लिया। भारतीय कप्तान ने कहा कि इस तरह के कड़े मुकाबले युवा खिलाड़ियों के लिए सीखने का एक बहुत बड़ा अवसर होते हैं। विदेशी परिस्थितियों में आकर, खासकर न्यूजीलैंड के अलग-अलग मैदानों पर खेलना और भिन्न परिस्थितियों का सामना करना टीम के लिए एक बहुत मूल्यवान अनुभव साबित हुआ है।
आगामी वनडे सीरीज और विदेशी परिस्थितियों की चुनौतियां
सीरीज में सामने आई कमियों और भविष्य की योजनाओं के सवाल पर श्रेयस अय्यर ने स्पष्ट किया कि वह टी20 की गलतियों को लेकर ज्यादा देर तक परेशान नहीं होना चाहते क्योंकि टीम के सामने अब एकदिवसीय सीरीज की नई चुनौती है। उन्होंने कहा कि जब कोई टीम विदेश दौरे पर खेलती है तो खेल के अलग-अलग पहलुओं में निरंतर नई चुनौतियां सामने आती हैं और उन परिस्थितियों का साहसपूर्वक सामना करना ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। पांचवें मैच में मिली गलतियों पर टीम के भीतर विस्तार से चर्चा की जाएगी और विशेष रूप से फील्डिंग के स्तर में सुधार करने पर कड़ा ध्यान दिया जाएगा। अय्यर ने यह भी रेखांकित किया कि न्यूजीलैंड में जब रोशनी कम होती है और आसमान पूरी तरह साफ रहता है, तो उन परिस्थितियों में गेंद को जज करना आसान नहीं होता, क्योंकि भारत में अक्सर ऐसी परिस्थितियां देखने को नहीं मिलती हैं।



















