पेरिस में एक आधिकारिक घोषणा के दौरान जिनेदीन जिदान को फ्रांस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम का नया मुख्य कोच नियुक्त किया गया। वह इस पद पर दिदियेर देसचैम्प्स का स्थान लेंगे। फ्रांस फुटबॉल महासंघ के मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में महासंघ के अध्यक्ष फिलिपे दियालो ने इस नियुक्ति का ऐलान किया। नए कोच के साथ चार साल का अनुबंध तय किया गया है, जिसके तहत वह टीम को आगामी मुकाबलों के लिए तैयार करेंगे।
नियुक्ति की घोषणा करते हुए फिलिपे दियालो ने कहा कि यह पल बेहद खास है क्योंकि जिनेदीन जिदान फ्रांसीसी फुटबॉल के सबसे बड़े लीजैंड्स में गिने जाते हैं। लंबे समय से उनकी इच्छा राष्ट्रीय टीम की कमान संभालने की थी। वह 2021 में रीयाल मैड्रिड क्लब छोड़ने के बाद से किसी भी टीम के साथ बतौर कोच जुड़े नहीं थे और अपने इस बड़े सपने को पूरा होने का इंतजार कर रहे थे।
अपनी नियुक्ति के बाद बात करते हुए जिनेदीन जिदान ने अपने संघर्ष और समर्पण को साझा किया। उन्होंने बताया कि पिछले पांच साल के कोचिंग अंतराल के दौरान उनके पास कई बड़े क्लबों से करोड़ों के प्रस्ताव आए थे, जिन्हें उन्होंने केवल इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि उनका एकमात्र लक्ष्य फ्रांस की राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी संभालना था। उनके मुताबिक इस पद से गहरी भावनाएं जुड़ी हैं और वह इस नई चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
यह बदलाव तब आया जब स्पेन के खिलाफ विश्व कप सेमीफाइनल में हार मिलने के बाद दिदियेर देसचैम्प्स ने 14 साल लंबा कार्यकाल पूरा करने के बाद मुख्य कोच का पद छोड़ दिया। अब यह जिम्मेदारी संभालते हुए जिदान ने स्पष्ट किया कि वह टीम को सफलता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे। उन्होंने याद दिलाया कि खिलाड़ी के रूप में वह दस नंबर की जर्सी पहनते थे और मैदान पर अपनी नेतृत्व क्षमता दिखाते थे, और अब वह उसी अनुभव का उपयोग डगआउट से टीम का मार्गदर्शन करने में करेंगे।
जिनेदीन जिदान का कोचिंग और खेल का करियर बेहद शानदार रहा है। साल 2016 में रीयाल मैड्रिड के मुख्य कोच के रूप में कार्यभार संभालने के बाद वह इतिहास के ऐसे पहले कोच बने जिन्होंने लगातार तीन बार यूएफा चैंपियंस लीग का खिताब अपने नाम किया। फ्रांस के सबसे बड़े खिलाड़ियों में 'जिजोउ' के नाम से मशहूर जिदान ने अपने देश के लिए 108 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जिनमें उन्होंने 31 गोल दागे। इसके अलावा वह 1998 के विश्व कप और 2000 की यूरो चैंपियनशिप में फ्रांस की ऐतिहासिक खिताबी जीत के मुख्य सूत्रधार रहे थे।



















