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प्राइमरी स्कूल में अध्यापन और खाकी की ट्रेनिंग के बाद डॉ. विपिन कुमार कैसे बने कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसरसक्सेस स्टोरी
1 अक्तू॰ 2026, 11:38 am (6 मिनट पहले)· 0

प्राइमरी स्कूल में अध्यापन और खाकी की ट्रेनिंग के बाद डॉ. विपिन कुमार कैसे बने कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर

बरेली के एक सामान्य ग्रामीण परिवार से निकले डॉ. विपिन कुमार ने कई असफलताओं से उबरकर प्राथमिक शिक्षक और पुलिस दारोगा के बाद बलिया के डिग्री कॉलेज में रक्षा अध्ययन के असिस्टेंट प्रोफेसर का पद हासिल किया।

कठिन परिश्रम और लगातार सीखते रहने की इच्छा इंसान को किस मुकाम तक पहुंचा सकती है, उत्तर प्रदेश के डॉ. विपिन कुमार की यात्रा इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। गांव की सामान्य पाठशाला से अक्षर ज्ञान पाकर शुरू हुआ उनका शैक्षणिक सफर कई अहम पड़ावों से गुजरा। जीवन में लगातार कई प्रतियोगी परीक्षाओं में नाकामी मिलने के बाद भी उनका मनोबल नहीं टूटा। पहले उन्होंने प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक की जिम्मेदारी संभाली, उसके बाद पुलिस सेवा में दारोगा के पद पर चुने गए। मगर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का लक्ष्य मन में संजोए रखने वाले डॉ. विपिन ने पुलिस ट्रेनिंग पूरी होने के बावजूद खाकी को अलविदा कह दिया और बलिया के प्रतिष्ठित कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर का पदभार संभाल लिया।

गांव की प्राथमिक शाला से लेकर पीएचडी तक का शैक्षणिक सफर

डॉ. विपिन कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले हैं। उनकी बुनियादी पढ़ाई उनके पैतृक गांव के ही सरकारी प्राथमिक विद्यालय में संपन्न हुई। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने मीरगंज में स्थित राजेंद्र प्रसाद इंटर कॉलेज में दाखिला लिया, जहां से उन्होंने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं।

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उच्च शिक्षा के शुरुआती चरण में उन्होंने मीरगंज के राजेंद्र प्रसाद डिग्री कॉलेज से बीए और इसके बाद बीएड की उपाधि प्राप्त की। शिक्षण विधा में गहरी रुचि होने के कारण उन्होंने हिंदू कॉलेज मुरादाबाद से एमएड की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने बरेली कॉलेज से रक्षा अध्ययन (डिफेंस स्टडीज) विषय में एमए की डिग्री हासिल की। अपनी उच्च शैक्षणिक योग्यताओं को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बलिया स्थित जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय से पीएचडी की शोध उपाधि भी प्राप्त की।

पुलिस सब इंस्पेक्टर की ट्रेनिंग के बाद शिक्षण क्षेत्र में वापसी

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान डॉ. विपिन कुमार ने पुलिस विभाग की भर्ती परीक्षा में भी हिस्सा लिया था। उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन पुलिस उप निरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) के पद पर हो गया। उन्होंने तय समय के भीतर अपनी पुलिस ट्रेनिंग भी सफलता के साथ पूरी कर ली थी।

इसी बीच उच्चतर शिक्षा सेवा चयन के तहत श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलिया में रक्षा अध्ययन विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर उनका चयन हो गया। चूंकि उनकी पहली प्राथमिकता अध्यापन का क्षेत्र ही थी, इसलिए उन्होंने पुलिस उप निरीक्षक के पद से विधिवत इस्तीफा सौंप दिया और बलिया के महाविद्यालय में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर अपनी नई पारी की शुरुआत की।

डॉ. विपिन कुमार का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में अनगिनत प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरे थे और उन्हें इतनी बार असफलताएं मिलीं जिनकी कोई गिनती तक नहीं है। उनका मानना है कि हर परीक्षा में पहली बार में कामयाबी मिलना मुमकिन नहीं होता, लेकिन अगर अभ्यर्थी पूरी निष्ठा और लगन से किसी एक दिशा में तैयारी करता है तो अंततः सफलता जरूर कदम चूमती है।

पिता के शिक्षक होने का असर और प्रतियोगी परीक्षाओं की सटीक रणनीति

डॉ. विपिन कुमार एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता भी एक शिक्षक थे, जिससे उन्हें बचपन से ही घर के भीतर पढ़ने-लिखने का सकारात्मक वातावरण मिला। वर्ष 2022 में उनके पिता का दिल का दौरा पड़ने (हार्ट अटैक) से अचानक देहांत हो गया था, जो उनके लिए एक निजी सदमा था।

शैक्षणिक करियर को लेकर डॉ. विपिन बताते हैं कि उनकी पहली पसंद शिक्षा शास्त्र विषय था, क्योंकि उन्होंने बीएड और एमएड दोनों किए थे और शिक्षा विषय में उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) भी पास कर रखी थी। हालांकि असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में उनका चयन रक्षा अध्ययन विषय में हुआ, इसलिए उन्होंने इसी विषय को अपना मुख्य करियर क्षेत्र बना लिया।

उच्च परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सुझाव देते हुए वे कहते हैं कि एमए के स्तर पर ही विषयों के बुनियादी सिद्धांतों (कॉन्सेप्ट्स) को गहराई से समझ लेना चाहिए। यदि नेट परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र पुराने प्रश्नों और मुख्य सिद्धांतों का नियमित अभ्यास करें, तो विषय पर मजबूत पकड़ बन जाती है। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा का प्रारूप सामान्य परीक्षाओं से अलग होता है, लेकिन व्यवस्थित तैयारी से सफलता सुनिश्चित की जा सकती है। आज के दौर में इंटरनेट जैसे अनेक संसाधन सुलभ हैं, जिनका सदुपयोग करके छात्र कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच भी अपनी मंजिल हासिल कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

डॉ. विपिन कुमार वर्तमान में किस पद पर कार्यरत हैं?
वे बलिया स्थित श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रक्षा अध्ययन के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
डॉ. विपिन कुमार मूल रूप से कहां के निवासी हैं?
वे उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले हैं।
असिस्टेंट प्रोफेसर बनने से पहले वे किन पदों पर चयनित हो चुके थे?
वे प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक रह चुके थे और उन्होंने पुलिस उप निरीक्षक पद पर चयनित होकर अपनी ट्रेनिंग भी पूरी कर ली थी।
उन्होंने पुलिस उप निरीक्षक का पद क्यों छोड़ दिया?
ट्रेनिंग पूरी होने के दौरान ही उनका चयन कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हो गया था, जिसके बाद उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया।
डॉ. विपिन कुमार ने अपनी पीएचडी कहां से की है?
उन्होंने बलिया स्थित जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।
नेट परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए उनका क्या सुझाव है?
उनका सुझाव है कि एमए के दौरान ही सभी बुनियादी कॉन्सेप्ट्स स्पष्ट कर लेने चाहिए और पुराने प्रश्नों का नियमित अभ्यास करना चाहिए।
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