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भरतपुर में किसान कमल मीणा ने जंग लगे टायरों और लोहे से संवारा फार्म हाउस, देखने वाले रह गए दंगसक्सेस स्टोरी
12 अग॰ 2026, 8:21 pm (78 दिन पहले)· 1

भरतपुर में किसान कमल मीणा ने जंग लगे टायरों और लोहे से संवारा फार्म हाउस, देखने वाले रह गए दंग

भरतपुर के किसान कमल मीणा ने पुराने ट्रैक्टर टायरों, लोहे, ड्रम और लकड़ी के कबाड़ से अपने फार्म हाउस को नया रूप दिया है, जिसे देखने अब आसपास के लोग पहुंच रहे हैं।

राजस्थान के भरतपुर जिले में रहने वाले किसान कमल मीणा ने अपनी सूझबूझ से यह दिखा दिया है कि कबाड़ में पड़ी चीजें भी सही सोच के साथ किसी बेहतरीन चीज में बदली जा सकती हैं। उन्होंने अपने फार्म हाउस को नया रूप देने के लिए एक ऐसा तरीका अपनाया जिसकी चर्चा अब आसपास के इलाकों में हो रही है। बरसों से इस्तेमाल के बाद फेंक दिए जाने वाले सामान को उन्होंने घर की रौनक बढ़ाने के काम में लगा दिया।

पुराने ट्रैक्टर टायरों से तैयार हुई बाउंड्री

आमतौर पर पुराने ट्रैक्टर टायरों को बेकार मानकर या तो बेच दिया जाता है या यूं ही खेत के किसी कोने में पड़ा रहने दिया जाता है। कमल मीणा के फार्म पर सालों से बेकार पड़े ऐसे टायर अब उनकी पहचान बन गए हैं। इन टायरों पर रंग चढ़ाकर उन्हें करीने से जमाया गया और इस तरह फार्म के चारों ओर एक मजबूत और आकर्षक चारदीवारी खड़ी हो गई। दूर से देखने पर यह दीवार किसी सामान्य निर्माण सामग्री से बनी नहीं, बल्कि एक कलाकृति जैसी नजर आती है, और साथ ही यह उतनी ही मजबूती से फार्म की घेराबंदी भी करती है।

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लोहे, ड्रम और लकड़ी को भी मिला नया जीवन

सिर्फ टायर ही नहीं, कमल मीणा ने फार्म में बिखरे लोहे के पुराने टुकड़ों, खाली ड्रमों और लकड़ी के टूटे-फूटे हिस्सों को भी नहीं फेंका। इन सभी चीजों से उन्होंने कई तरह की सजावटी और काम की वस्तुएं बना डालीं, जिन्हें फार्म हाउस के अलग-अलग कोनों में लगाया गया है। कहीं ड्रम को नया रूप दिया गया तो कहीं लोहे और लकड़ी के टुकड़ों को जोड़कर फार्म हाउस के भीतरी हिस्सों को सजाया गया। इस वजह से पूरा परिसर अब एक अलग ही अंदाज में नजर आता है।

कम खर्च में बड़ा असर

बाजार में मिलने वाले महंगे सजावटी सामान की जगह कमल मीणा ने अपने आसपास मौजूद संसाधनों का ही इस्तेमाल किया, जिससे उनका खर्च बेहद कम रहा। इस तरह की सजावट सिर्फ जेब पर हल्की नहीं है, बल्कि कबाड़ को दोबारा इस्तेमाल में लाकर पर्यावरण को होने वाले नुकसान को भी कम करती है। जो सामान कभी कूड़े के ढेर में जाने वाला था या यूं ही जगह घेरता रहता, वह अब फार्म हाउस की शान बन चुका है। इस पहल से यह भी समझ आता है कि हर पुरानी और बेकार चीज को कबाड़ में डालने से पहले एक बार उसके दोबारा इस्तेमाल के बारे में जरूर सोचा जाना चाहिए।

आसपास के किसानों के लिए बनी मिसाल

आज कमल मीणा का यह फार्म हाउस इलाके में घूमने और देखने की जगह बन गया है। कई लोग खासतौर पर इस अनोखी टायर वाली दीवार और बाकी सजावट देखने पहुंच रहे हैं। इनमें से कुछ लोग अब अपने घर या खेत में भी ऐसे ही प्रयोग करने की योजना बना रहे हैं। कमल मीणा की यह कोशिश बताती है कि नई सोच, थोड़ी मेहनत और रचनात्मकता के दम पर खेती से जुड़े साधारण काम को भी एक अलग और खास पहचान दी जा सकती है, वो भी बिना ज्यादा पैसा खर्च किए।

सवाल-जवाब

कमल मीणा कहां के किसान हैं?
वे राजस्थान के भरतपुर जिले के रहने वाले किसान हैं।
उन्होंने फार्म हाउस की बाउंड्री वॉल किससे बनाई?
उन्होंने पुराने ट्रैक्टर टायरों को रंग-रोगन कर बाउंड्री वॉल के रूप में इस्तेमाल किया।
टायरों के अलावा और किन चीजों का इस्तेमाल किया गया?
लोहे के पुराने टुकड़ों, खाली ड्रमों और लकड़ी के बेकार हिस्सों का भी इस्तेमाल किया गया।
इस तरह की सजावट का क्या फायदा है?
यह कम खर्च में होती है और कबाड़ का दोबारा इस्तेमाल कर पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करती है।
लोग इस फार्म हाउस को क्यों देखने जा रहे हैं?
अनोखी टायर वाली बाउंड्री वॉल और कबाड़ से बनी सजावट देखने के लिए आसपास के लोग वहां पहुंच रहे हैं।
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