बिहार के सीतामढ़ी जिले की उभरती हुई शतरंज खिलाड़ी वैष्णवी कुमारी ने राष्ट्रीय फलक पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है. डुमरा प्रखंड के छोटे से गांव मिश्रौलिया की रहने वाली और कक्षा 7 में पढ़ने वाली इस युवा खिलाड़ी ने झारखंड के हजारीबाग में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल कर पूरे इलाके का मान बढ़ाया है. यह मुकाबला ऑल इंडिया ओपन रैपिड फिडे रेटिंग चेस टूर्नामेंट के तहत आयोजित अटल टैलेंट हंट स्पर्धा का हिस्सा था, जिसमें उन्होंने अंडर-11 आयु वर्ग में यह प्रतिष्ठित मुकाम अपने नाम किया.
स्कूल के खेल शिक्षक से मिली शतरंज की पहली प्रेरणा
वैष्णवी की शतरंज यात्रा की शुरुआत उनके अपने स्कूल परिसर से हुई थी. खेल के प्रति उनकी दिलचस्पी को सबसे पहले स्कूल के खेल शिक्षक ने पहचाना और उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. वैष्णवी के अनुसार, शिक्षक के उचित मार्गदर्शन और खेल की गहरी बारीकियों को समझाने के तरीके ने उनकी बुनियादी समझ को बेहद मजबूत बनाया. शुरुआती दौर में मिली पराजयों से निराश होने के बजाय उन्होंने अपनी गलतियों से लगातार सीख ली. खेल शैली में लगातार सुधार और बिसात पर सही चालों के अभ्यास ने उन्हें एक साधारण स्कूली खिलाड़ी से राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी के रूप में तैयार किया.
हजारीबाग में कड़े मुकाबलों के बीच दिखाई रणनीतिक सूझबूझ
हजारीबाग में आयोजित इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश भर के कई राज्यों से आए शीर्ष स्तर के युवा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. इन प्रतिभागियों में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों के प्रतिभाशाली खिलाड़ी शामिल थे, जिससे प्रत्येक राउंड में चुनौती काफी कठिन हो गई थी. प्रतियोगिता का तकनीकी स्तर कितना ऊंचा था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां मार्गदर्शन के लिए ग्रैंडमास्टर और इंटरनेशनल मास्टर स्तर के दिग्गज खिलाड़ी भी मौजूद रहे.
शुरुआती दौर में पहले दिन के चार मुकाबलों के दौरान वैष्णवी को कड़े उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा. हालांकि, उन्होंने मानसिक दबाव को अपने खेल पर हावी नहीं होने दिया. दूसरे दिन अपनी रणनीतिक सूझबूझ, धैर्य और आक्रामक खेल का परिचय देते हुए उन्होंने जबर्दस्त वापसी की. वैष्णवी ने दूसरे दिन के अपने सभी मुकाबलों में जीत दर्ज की और देश भर से आए मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को मात देकर एडल्ट टैलेंटेड श्रेणी में उपविजेता का स्थान सुनिश्चित किया.
स्कूल चैंपियनशिप से लेकर राष्ट्रीय मंच तक का सफर
वैष्णवी की इस यात्रा की नींव उनके घरेलू मैदान पर पड़ी थी, जहां वह पिछले दो वर्षों से लगातार अपने विद्यालय की चैंपियन रही हैं. इस मजबूत आधार के बाद उन्होंने राज्य स्तरीय स्पर्धाओं का रुख किया. राजधानी पटना में आयोजित पहली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उन्हें कड़े संघर्ष और शुरुआती चुनौतियों से जूझना पड़ा, लेकिन इस अनुभव ने उनके इरादों को कमजोर नहीं होने दिया.
इसके बाद भागलपुर और छत्तीसगढ़ के जशपुर में आयोजित चेस प्रतियोगिताओं में वैष्णवी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. वहां किए गए उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए दो-दिन लंबे और बेहद थकाऊ सफर की कठिनाइयों के बावजूद उनके संकल्प में कोई कमी नहीं आई. परिवार के निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन ने भी हर मुश्किल मोड़ पर उनके हौसले को बनाए रखा.
सीतामढ़ी में खुशी की लहर और आगामी नेशनल गेम्स की तैयारी
इस राष्ट्रीय उपलब्धि के बाद मिश्रौलिया गांव, वैष्णवी के स्कूल और पूरे सीतामढ़ी जिले में उत्साह और गर्व का माहौल है. उनके पिता और परिवार के सदस्यों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एक सुदूर ग्रामीण अंचल से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पहचान बनाना पूरे क्षेत्र के लिए सम्मान की बात है. इस सफलता के बाद वैष्णवी का ध्यान अब आगामी नेशनल गेम्स पर केंद्रित हो गया है. वह आगामी प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए कड़ा अभ्यास कर रही हैं, जबकि स्थानीय खेल प्रशंसकों को भरोसा है कि वह आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी देश और राज्य का नाम रोशन करेंगी.



















