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छपरा के दो भाइयों का अनोखा जुगाड़: मोटरसाइकिल से खेतों तक पहुंच रहा भारी पंप सेटसक्सेस स्टोरी
23 जुल॰ 2026, 9:24 am (7 दिन पहले)· 2

छपरा के दो भाइयों का अनोखा जुगाड़: मोटरसाइकिल से खेतों तक पहुंच रहा भारी पंप सेट

बिहार के छपरा में दो भाइयों ने अपनी मोटरसाइकिल को एक ऐसे जुगाड़ में बदल दिया है जो 5 से 10 मजदूरों का काम अकेले कर देता है। इस तकनीक के जरिए भारी सिंचाई मशीनें आसानी से खेतों तक पहुंचाई जा रही हैं।

भारत के ग्रामीण इलाकों में आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है, और बिहार के छपरा जिले से आई एक नई तस्वीर इस बात को पूरी तरह साबित करती है। कृषि कार्यों में अक्सर भारी उपकरणों को खेतों तक ले जाना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। पारंपरिक रूप से इस काम में बहुत अधिक शारीरिक श्रम और कई मजदूरों की जरूरत पड़ती है। लेकिन छपरा के दो भाइयों ने अपनी सूझबूझ और देसी जुगाड़ के जरिए इस मुश्किल काम को बेहद आसान बना दिया है। जहां पहले खेतों में सिंचाई के उपकरण ले जाने के लिए पांच से दस लोगों की आवश्यकता होती थी, वहीं अब यह काम केवल दो लोग आसानी से कर रहे हैं। इस अनोखे तरीके ने न केवल उनके काम की गति को बढ़ाया है, बल्कि इलाके के अन्य किसानों के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल कायम की है।

ऐसे काम करता है यह खास मोटरसाइकिल जुगाड़

इस शानदार तरकीब के पीछे मांझी प्रखंड के जैतपुर गांव में रहने वाले दो भाई, जय बाबू और मनोज कुमार का दिमाग है। खेतों की सिंचाई के लिए भारी-भरकम पंप सेट और लंबी डिलीवरी पाइप को घर से खेत तक पहुंचाना एक थका देने वाली प्रक्रिया थी। इस परेशानी से निजात पाने के लिए इन दोनों भाइयों ने अपनी आम मोटरसाइकिल को एक मालवाहक वाहन की तरह इस्तेमाल करने का फैसला किया। मोटरसाइकिल चलाते समय दोनों भाई आगे-पीछे बैठ जाते हैं और उनके बीच की खाली जगह में 100 से 150 किलो (डेढ़ क्विंटल) वजन की डिलीवरी पाइप को सुरक्षित रूप से रख लिया जाता है। इसके साथ ही, भारी पंप सेट इंजन को मोटरसाइकिल के पिछले हिस्से से एक मजबूत हुक या रस्सी के सहारे टोचन (खींचने की व्यवस्था) कर दिया जाता है। इस तरह, एक ही यात्रा में सारा भारी सामान बिना किसी अतिरिक्त मजदूर के खेत तक पहुंच जाता है।

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शुरुआती मजाक से लेकर पूरे जिले की प्रेरणा बनने तक का सफर

किसी भी नए काम की तरह, इस देसी तकनीक को भी शुरुआत में लोगों की अजीब नजरों का सामना करना पड़ा। मनोज कुमार ने बताया कि जब उन्होंने तीन साल पहले पहली बार इस जुगाड़ की शुरुआत की थी, तो गांव के लोग उन्हें देखकर हंसते थे। लोगों को लगता था कि मोटरसाइकिल से इतना भारी वजन खींचना बेवकूफी है और इससे कोई हादसा हो सकता है। लेकिन दोनों भाइयों ने लोगों की बातों पर ध्यान देने के बजाय अपने काम पर फोकस किया। जैसे-जैसे समय बीतता गया, उनका यह तरीका पूरी तरह सफल साबित हुआ। हर दिन कोसों दूर स्थित खेतों तक आसानी से मशीन और पाइप ले जाते देख लोगों की हंसी हैरानी में बदल गई। आज स्थिति यह है कि पूरे जिले के किसान उनके इस तरीके को अपना रहे हैं और अपने खेती के काम को सुगम बना रहे हैं।

समय, श्रम और पैसे की भारी बचत

खेती-किसानी में समय और पैसे की बहुत कीमत होती है। इस देसी जुगाड़ ने इन दोनों मोर्चों पर किसानों को बड़ी राहत दी है। जिस पंप सेट और पाइप को खेतों तक पहुंचाने के लिए पहले 5 से 10 मजदूरों को बुलाना पड़ता था और उन्हें दिहाड़ी देनी पड़ती थी, अब वह काम बिना किसी अतिरिक्त खर्च के हो जाता है। मनोज कुमार का कहना है कि भारी से भारी काम भी इस जुगाड़ की मदद से हल्का हो जाता है। इसके जरिए किसानों का बहुत सारा पैसा और मेहनत बच रही है। जब काम जल्दी खत्म होता है, तो फसल की देखभाल के लिए अधिक समय मिल पाता है। दो लोगों द्वारा इतनी आसानी से सारा काम होते देख अब हर कोई इस तरकीब का कायल हो गया है।

सफलता का अनोखा अनुभव और आगे की राह

अपने द्वारा शुरू किए गए इस तरीके को पूरे जिले में लोकप्रिय होते देखना दोनों भाइयों के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अपने इस सफल प्रयोग से यह साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा में दिमाग लगाया जाए, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाला जा सकता है। मनोज कुमार ने यह भी बताया कि उन्हें इस बात की बहुत खुशी होती है कि जिस काम का पहले मजाक उड़ाया जाता था, आज वही काम दूसरों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। वे लगातार यह प्रयास करते रहते हैं कि कैसे खेती के अन्य मुश्किल कामों को भी ऐसी ही किसी आसान तरकीब से सुलझाया जाए। उनका यह कदम दिखा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार की कोई कमी नहीं है और छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

सवाल-जवाब

यह देसी जुगाड़ किस जिले का है?
यह अनोखा जुगाड़ बिहार के छपरा जिले के मांझी प्रखंड स्थित जैतपुर गांव का है।
इस जुगाड़ को किसने बनाया है?
इसे जैतपुर गांव के रहने वाले दो भाइयों, जय बाबू और मनोज कुमार ने तैयार किया है।
इस मोटरसाइकिल जुगाड़ से क्या काम किया जाता है?
इस जुगाड़ के जरिए भारी पंप सेट इंजन और लगभग 150 किलो वजन की डिलीवरी पाइप को खेतों तक ले जाया जाता है।
इस काम में पहले कितने लोगों की जरूरत पड़ती थी?
इस भारी सामान को खेतों तक पहुंचाने के लिए पहले 5 से 10 मजदूरों की आवश्यकता होती थी, जो अब केवल 2 लोगों से हो जाता है।
इस तकनीक से किसानों को क्या फायदा हो रहा है?
इस तकनीक से श्रम, समय और मजदूरों को दिए जाने वाले पैसे की भारी बचत हो रही है, और अब पूरा जिला इसे अपना रहा है।
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