झारखंड के पलामू जिले में बतौर असिस्टेंट कलेक्टर और प्रशिक्षु आईएएस के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे ऋत्विक मेहता की सफलता की कहानी संघर्ष, धैर्य और अटूट इच्छाशक्ति का एक अनूठा उदाहरण है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 115 प्राप्त कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का पद हासिल करने का उनका यह सफर आसान नहीं रहा। लगातार छह प्रयासों, अनेक असफलताओं, प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा की रुकावटों तथा इंटरव्यू में मिली निराशा के बावजूद उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। उनका यह सफर साबित करता है कि यदि इरादे मजबूत हों और लक्ष्य के प्रति पूर्ण समर्पण हो, तो सबसे कठिन मंजिल भी हासिल की जा सकती है।
शुरुआती शिक्षा, प्रतिभा और सिविल सेवा का लक्ष्य
ऋत्विक मेहता मूल रूप से जमशेदपुर के कदमा स्थित विजया हेरिटेज के निवासी हैं। बचपन से ही उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाकर देश और समाज की सेवा करने की तीव्र इच्छा थी। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा लोयोला स्कूल, जमशेदपुर से प्राप्त की। 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए वे अपने स्कूल के टॉपर रहे। इसके बाद उसी स्कूल से विज्ञान संकाय में 12वीं की पढ़ाई पूरी की और 93 प्रतिशत अंक हासिल किए। 12वीं में विज्ञान वर्ग से शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद उनकी रुचि मानविकी विषयों में थी। इसी वजह से उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध किरोड़ीमल कॉलेज में दाखिला लिया और भूगोल विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2018 से उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की गंभीर तैयारी शुरू की और वर्ष 2019 में पहली बार इस परीक्षा में शामिल हुए।
असफलताओं की श्रृंखला और IPS में चयन का सफर
प्रशासनिक अधिकारी बनने की राह में ऋत्विक को कदम-कदम पर कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वर्ष 2019 में अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली, लेकिन मेंस परीक्षा की बाधा को पार नहीं कर सके। इसके बाद के प्रयासों में भी चुनौतियां बनी रहीं। एक बार उन्होंने प्रीलिम्स पास किया पर मेंस कटऑफ पार करने में असफल रहे, जबकि एक प्रयास में वे प्रीलिम्स चरण में ही रुक गए। वर्ष 2022 में उन्होंने शानदार वापसी की और कठिन परिश्रम के बल पर इंटरव्यू चरण तक का सफर तय किया, हालांकि अंतिम चयन सूची में उनका नाम शामिल नहीं हो सका। लगातार असफलताओं के बाद भी उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। वर्ष 2023 के सिविल सेवा परीक्षा चक्र में उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए हो गया।
IPS ट्रेनिंग के साथ अंतिम प्रयास में हासिल की AIR 115
भारतीय पुलिस सेवा में चयन होना कई अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ा सपना होता है, लेकिन ऋत्विक का अंतिम लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना था। IPS की कठिन और व्यस्त ट्रेनिंग के दौरान भी उन्होंने अपनी पढ़ाई का सिलसिला नहीं टूटने दिया। ट्रेनिंग के कठिन शेड्यूल के साथ सामंजस्य बिठाते हुए उन्होंने अपने अंतिम और छठे प्रयास के लिए पूरी लगन के साथ तैयारी जारी रखी। पूरे आत्मविश्वास के साथ उन्होंने वर्ष 2024 की सिविल सेवा परीक्षा दी। इस बार उनकी वर्षों की कड़ी तपस्या और निरंतर प्रयास सफल रहे और उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 115 हासिल करके आखिरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में अपना स्थान पक्का कर लिया।
परिवार का बड़ा त्याग और संबल
अपनी इस शानदार सफलता पर बात करते हुए ऋत्विक मेहता ने अपनी कामयाबी का सबसे बड़ा श्रेय अपने परिवार को दिया है। उनका मानना है कि किसी भी लंबी और कठिन परीक्षा में सफलता पाने के लिए पारिवारिक सहयोग सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके पिता अजय कुमार वन विभाग में रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। बेटे की यूपीएससी की तैयारी में किसी भी प्रकार की बाधा न आए और उसे पूरा समय तथा अनुकूल माहौल मिल सके, इसके लिए उनके पिता ने वर्ष 2018 में ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली। उनकी माँ प्रियंका वर्मा शिक्षा और प्रकाशन क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं और लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए अध्ययन सामग्री तैयार करने का कार्य कर रही हैं। इसके अलावा उनके छोटे भाई वेदांत मेहता भारतीय सेना में कैप्टन के पद पर तैनात होकर देश की सेवा कर रहे हैं। ऋत्विक के अनुसार, हर असफलता के बाद परिवार का उन पर बना रहा अटूट विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
झारखंड में बेहतर सुशासन और विकास का दृष्टिकोण
आईएएस अधिकारी बनने के बाद ऋत्विक मेहता का उद्देश्य केवल एक प्रशासनिक पद पर बने रहना नहीं है, बल्कि वे झारखंड राज्य में पारदर्शी और प्रभावी सुशासन स्थापित करना चाहते हैं। उनका आकलन है कि झारखंड के कुछ प्रमुख शहर तेजी से विकसित हुए हैं, लेकिन राज्य के कई दूरदराज के क्षेत्र आज भी मूलभूत नागरिक सुविधाओं से वंचित हैं। वे चाहते हैं कि शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक तंत्र की पहुँच सीधे गाँवों और सुदूर इलाकों तक सुनिश्चित की जाए। खनिज संसाधनों से समृद्ध झारखंड राज्य में औद्योगिक प्रगति, बेहतर शिक्षा व्यवस्था और मजबूत स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के माध्यम से आम जनता के जीवन स्तर को ऊपर उठाया जा सकता है। ऋत्विक मेहता की यह जीवन यात्रा हर उस युवा के लिए एक बड़ी सीख है जो हर असफलता को अपनी अगली सफलता की सीढ़ी बना लेता है।



















