जमशेदपुर के एक युवा फिल्ममेकर ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में एक बड़ा सम्मान हासिल कर पूरे राज्य का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया है। पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा इलाके के रहने वाले रवि राज मुर्मू को उनकी बेहतरीन संताली शॉर्ट फिल्म 'आगेन' के लिए सर्वश्रेष्ठ डेब्यू निर्देशक की फिल्म का प्रतिष्ठित अवार्ड दिया गया है। यह शानदार जीत सिर्फ इस युवा निर्देशक की निजी कामयाबी नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड और संताली समुदाय के लिए एक बेहद गर्व का पल है।
'आगेन' की कहानी और उसका संदेश
महज 12 मिनट की अवधि वाली इस शॉर्ट फिल्म में एक बहुत ही गहरा और विचारणीय संदेश छिपा है। 'आगेन' मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि कैसे तेजी से बदलते आधुनिक दौर में आज की युवा पीढ़ी अपनी जड़ों, अपनी भाषा और अपनी समृद्ध संस्कृति से लगातार दूर होती जा रही है। फिल्म में संताली समाज की पुरानी लोककथाओं, उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों और आज की तेज-तर्रार जिंदगी के बीच के टकराव को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा गया है। इस प्रोजेक्ट के जरिए दर्शकों को यह समझाने की कोशिश की गई है कि विकास की अंधी दौड़ में अपनी पहचान और विरासत को सहेज कर रखना कितना जरूरी है।
जादूगोड़ा से राष्ट्रीय पुरस्कार तक का सफर
कहानी की इसी गहराई और दमदार प्रस्तुति की वजह से फिल्म को आम जनता के साथ-साथ दिग्गज समीक्षकों से भी जमकर तारीफें मिल रही हैं। इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर क्षेत्रीय भाषाओं और लोक कलाओं की कहानियों को सही ढंग से पेश किया जाए, तो वे भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक मजबूत पहचान कायम कर सकती हैं। रवि राज मुर्मू के लिए यह मुकाम हासिल करना कोई रातों-रात हुआ चमत्कार नहीं था। बचपन से ही उनका झुकाव कला और संस्कृति की तरफ रहा है। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने इसी जुनून को करियर में बदलने का फैसला किया और फिल्म निर्माण के मुश्किल क्षेत्र में कदम रखा।
अपनी अथक मेहनत, शानदार रचनात्मक सोच और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी कला को निखारा। भारतीय सिनेमा जगत में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार को सबसे बड़ा और अहम सम्मान माना जाता है। ऐसे इतने बड़े और प्रतिष्ठित मंच पर किसी संताली फिल्म का डंका बजना पूरे झारखंड क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक घटना है। इस अवार्ड ने क्षेत्रीय सिनेमा की ताकत को पूरे देश के सामने मजबूती से रखा है।
झारखंड के युवाओं के लिए बनी मिसाल
इस बड़ी कामयाबी का असर सिर्फ सिनेमा जगत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने झारखंड के उन तमाम युवाओं में एक नया जोश भर दिया है जो कला के क्षेत्र में कुछ बड़ा करना चाहते हैं। मुर्मू का सफर इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अगर इंसान के अंदर कुछ कर गुजरने का सच्चा जुनून और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो संसाधनों की कमी कभी भी आड़े नहीं आती। उनकी इस जीत ने राज्य के नए और उभरते हुए फिल्मकारों के लिए उम्मीद के नए दरवाजे खोल दिए हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर इस ऐतिहासिक सम्मान की घोषणा होने के बाद से ही रवि राज मुर्मू को बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है। कई सामाजिक संगठनों, स्थानीय कलाकारों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें इस शानदार उपलब्धि पर ढेरों शुभकामनाएं दी हैं। जमशेदपुर के लोगों का साफ तौर पर कहना है कि इस युवा ने अपनी कलाकारी से पूरे देश में शहर, राज्य और संताली संस्कृति का नाम रोशन कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यह जीत आने वाले समय में झारखंड की फिल्म इंडस्ट्री और यहां की सांस्कृतिक विरासत को एक नई ऊंचाई तक ले जाने का काम करेगी।



















