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खंडवा की एक दुकान जो 45 साल में घर की रसोई से बन गई स्वाद की पहचानसक्सेस स्टोरी
4 जुल॰ 2026, 6:28 am (26 दिन पहले)· 4

खंडवा की एक दुकान जो 45 साल में घर की रसोई से बन गई स्वाद की पहचान

खंडवा के देवनारायण चौक पर मांगीलाल सावले ने घर से नमकीन बनाकर जो काम शुरू किया था, वह आज ‘ओम नमकीन भंडार’ के नाम से एक बड़ा पारिवारिक कारोबार बन चुका है, जिसे अब उनकी दूसरी पीढ़ी संभाल रही है।

खंडवा के देवनारायण चौक, जिसे लोग जलेबी चौक के नाम से भी जानते हैं, पर बसा ‘ओम नमकीन भंडार’ आज सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि स्वाद और भरोसे का बड़ा नाम बन चुका है। कभी घर की रसोई से जो छोटा सा काम शुरू हुआ था, वह आज एक कामयाब पारिवारिक कारोबार में बदल गया है और अब इसकी कमान दूसरी पीढ़ी के हाथों में है।

इस कहानी की नींव करीब 45 साल पहले मांगीलाल सावले ने रखी थी। शुरुआती दौर में वे एक होटल में काम करते थे और नमकीन बनाने में उनका कोई सानी नहीं था। उनके हाथ का स्वाद लोगों की जुबान पर कुछ ऐसा चढ़ा कि उन्होंने अपना अलग काम खड़ा करने की ठान ली। पहले घर पर ही सेव, मिक्सचर और तरह-तरह के नमकीन बनाना शुरू किया और फिर देवनारायण चौक पर अपनी दुकान खोल दी। मेहनत, गुणवत्ता और बेहतरीन स्वाद के दम पर काम बढ़ता चला गया और दुकान ने पूरे शहर में अपनी अलग जगह बना ली।

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अब कारोबार की कमान बेटों के हाथ

आज इस कारोबार को मांगीलाल सावले के दोनों बेटे रविंद्र सावले और जीतेंद्र सावले आगे बढ़ा रहे हैं। दोनों भाई कई सालों से इसी काम से जुड़े हैं और पिता से सीखे हुनर को नए अंदाज में नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।

जीतेंद्र सावले बताते हैं कि यहां नमकीन एक दिन छोड़कर घर पर ही तैयार होता है, ताकि ग्राहकों को हर बार ताजा और स्वादिष्ट सामान मिले। शुद्धता और क्वालिटी पर खास ध्यान दिया जाता है और यही वजह है कि ग्राहक बार-बार यहां लौटकर आते हैं।

क्या-क्या मिलता है यहां

‘ओम नमकीन भंडार’ पर पोहा लहसुन सेव, लौंग सेव, कश्मीरी सेव, कश्मीरी पापड़ी, दाल दाने, मसूर दाल और गठिया जैसी कई किस्में मिलती हैं। इनमें भी सेव और मिक्सचर ग्राहकों की सबसे पसंदीदा हैं।

दुकान की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां अब दूसरी और तीसरी पीढ़ी के ग्राहक भी पहुंचने लगे हैं। जिनके दादा-परदादा कभी मांगीलाल सावले के हाथ का नमकीन खाते थे, आज उनके बच्चे और पोते भी उसी स्वाद के दीवाने हैं।

नौकरी छोड़ चुना अपना काम

जीतेंद्र सावले कहते हैं कि उन्होंने नौकरी करने के बजाय पिता के कारोबार को संभालने और आगे बढ़ाने का रास्ता चुना। उनका मानना है कि खुद का काम करने में जो संतुष्टि मिलती है, वह और कहीं नहीं मिलती।

यहां नमकीन करीब 280 रुपये किलो के भाव पर मिलता है, जो क्वालिटी को देखते हुए किफायती माना जाता है। शायद यही कारण है कि दुकान पर ग्राहकों की भीड़ हमेशा लगी रहती है।

आज ‘ओम नमकीन भंडार’ मेहनत, परंपरा और विश्वास की एक जीती-जागती मिसाल है। पिता से शुरू हुआ यह सफर अब बेटों के हाथों हर दिन नई बुलंदियों को छू रहा है। यह कहानी साफ बताती है कि अगर काम में ईमानदारी और मेहनत हो, तो छोटी सी शुरुआत भी एक बड़े कारोबार का रूप ले सकती है।

सवाल-जवाब

‘ओम नमकीन भंडार’ कहां स्थित है?
यह दुकान खंडवा के देवनारायण चौक पर है, जिसे लोग जलेबी चौक के नाम से भी जानते हैं।
इस कारोबार की शुरुआत किसने और कब की?
इसकी शुरुआत मांगीलाल सावले ने करीब 45 साल पहले की थी।
अब यह कारोबार कौन संभाल रहा है?
इसे अब मांगीलाल सावले के दोनों बेटे रविंद्र सावले और जीतेंद्र सावले आगे बढ़ा रहे हैं।
यहां कौन-कौन से नमकीन मिलते हैं?
यहां पोहा लहसुन सेव, लौंग सेव, कश्मीरी सेव, कश्मीरी पापड़ी, दाल दाने, मसूर दाल और गठिया जैसी कई किस्में मिलती हैं, जिनमें सेव और मिक्सचर सबसे पसंदीदा हैं।
यहां नमकीन का भाव क्या है?
यहां नमकीन करीब 280 रुपये किलो के भाव पर मिलता है, जो क्वालिटी के हिसाब से किफायती माना जाता है।
नमकीन कितनी बार बनाया जाता है?
जीतेंद्र सावले के मुताबिक नमकीन एक दिन छोड़कर घर पर ही तैयार किया जाता है, ताकि ग्राहकों को हमेशा ताजा सामान मिले।
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