कहते हैं कि तंगहाली अक्सर इंसान का असली दम आजमाने आती है, और जो इस कसौटी पर खरा उतरता है वही अपनी किस्मत की नई इबारत लिखता है। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के एक छोटे से गांव कुगवां की राजेश्वरी पटेल इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। एक वक्त था जब उनके घर पर दो वक्त की रोटी का संकट मंडरा रहा था और चारों तरफ निराशा थी, लेकिन उन्होंने हाथ पर हाथ रखकर बैठने के बजाय मेहनत का ऐसा रास्ता चुना जो आज पूरे इलाके के लिए प्रेरणा बन गया है।
पहले राजेश्वरी का परिवार सुख-चैन से गुजर-बसर कर रहा था। उनके पति ठेला लगाकर सामान बेचते थे और इसी से घर का खर्च चलता था। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि अचानक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की चपेट में उनका ठेला आ गया और हट गया। इस अचानक आए झटके ने परिवार की कमाई का इकलौता जरिया छीन लिया। कमाने वाला सहारा टूटते ही घर चलाना पहाड़ जैसा लगने लगा और हालात भुखमरी की कगार तक पहुंच गए।
निराशा को पीछे छोड़ बुनी नई उम्मीद
ऐसे मुश्किल वक्त में जब ज्यादातर लोग टूट जाते हैं, राजेश्वरी ने धीरज और समझदारी से काम लिया। इस संकट में उनके लिए मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना बड़ा सहारा बनी। योजना से हर महीने मिलने वाली रकम की एक-एक पाई को उन्होंने सहेजना शुरू किया। साथ ही घर पर थोड़ी-बहुत सिलाई-बुनाई का काम भी किया और पति के साथ मिलकर पाई-पाई जोड़ते हुए पूंजी इकट्ठा करने लगीं।
एक गाय से शुरू हुआ सफर
जुगाड़ और बचत से जुटाई गई इसी पूंजी और लाडली बहना योजना के पैसों के बल पर राजेश्वरी ने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा दांव खेला। सबसे पहले उन्होंने एक गाय खरीदी और दूध बेचने का काम शुरू किया। उनकी मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा भी बनने लगा। इसके साथ ही उन्होंने गाय के गोबर से कंडे यानी उपले बनाकर बेचने का काम भी शुरू कर दिया, जिससे उनकी आमदनी में और इजाफा हो गया।
दूध और उपलों से हर महीने हजारों की कमाई
आज राजेश्वरी दूध और उपले बेचकर हर महीने बड़ी आसानी से 10 से 15 हजार रुपये तक कमा रही हैं। उनकी लगन और कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि अब उनके पास एक नहीं, बल्कि चार गायें हो चुकी हैं। राजेश्वरी बताती हैं कि अब उनके पति को धूप और छांव में ठेला नहीं लगाना पड़ता। पूरा परिवार अब आर्थिक रूप से सुरक्षित है और पहले से कहीं ज्यादा खुशहाल जिंदगी जी रहा है। एक छोटे से गांव की इस महिला ने दिखा दिया कि इरादे मजबूत हों तो मुसीबत भी तरक्की की सीढ़ी बन जाती है।




















