जयपुर ग्रामीण की जालसू तहसील स्थित सुदर्शनपुरा गांव के युवा इंजीनियर सक्षम घोसल्या ने देश की वैज्ञानिक प्रगति के मंच पर एक विशिष्ट पहचान बनाई है। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC 2026) के दौरान उन्होंने देश में ही तैयार स्वदेशी 5G नेटवर्क तकनीक का सफल प्रदर्शन किया। इस महत्वपूर्ण आयोजन में सक्षम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भारतीय तकनीकी नवाचार की पूरी कार्यप्रणाली प्रस्तुत की और देश के दूरसंचार क्षेत्र की आधुनिक क्षमताओं की जानकारी दी।
ESTIC 2026 में 27 से 29 अक्टूबर तक 13 मंत्रालयों की सहभागिता रही। सम्मेलन के उद्घाटन के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न वैज्ञानिक स्टॉलों और प्रदर्शनी का अवलोकन कर रहे थे, तब वे हैदराबाद स्थित डीप टेक कंपनी वाईसिग नेटवर्क्स के प्रदर्शनी स्थल पर पहुंचे। वहां कंपनी में प्रिंसिपल इंजीनियर पद पर कार्यरत सक्षम घोसल्या ने उनका स्वागत किया और स्वदेशी स्तर पर तैयार किए गए 5G बेस स्टेशन का लाइव प्रदर्शन किया। सक्षम ने प्रधानमंत्री को देश में निर्मित दूरसंचार उपकरणों के साथ सैटेलाइट से सीधे संपर्क साधने वाली अत्याधुनिक चिप और भविष्य की 6G तकनीक पर जारी अनुसंधान की विस्तृत रूपरेखा समझाई।
दूरदराज के इलाकों को जोड़ने वाला बेस स्टेशन और कोआला चिप
प्रदर्शनी के दौरान सक्षम घोसल्या ने प्रधानमंत्री को स्पष्ट किया कि भारत में तैयार यह स्वदेशी 5G बेस स्टेशन किस तरह देश के ग्रामीण और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में उच्च गति का इंटरनेट पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। पारंपरिक विदेशी नेटवर्किंग उपकरणों की तुलना में यह समाधान भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल तैयार किया गया है। इसके जरिए उन इलाकों तक भी डिजिटल सेवाएं पहुंचाई जा सकेंगी जहां अब तक बुनियादी ढांचा खड़ा करना बेहद खर्चीला और जटिल माना जाता था।
इसी क्रम में सक्षम ने कंपनी द्वारा विकसित विशेष 'कोआला NB-IoT' चिप की खूबियां भी साझा कीं। यह विशेष चिप उन दुर्गम स्थानों पर भी इंटरनेट और डेटा कनेक्टिविटी बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम है, जहां सामान्य मोबाइल टावर या पारंपरिक नेटवर्क सिग्नल नहीं पहुंच पाते हैं। सैटेलाइट और गैर-पारंपरिक नेटवर्क से सीधे जुड़ने की क्षमता के कारण यह चिप आपातकालीन संचार, ट्रैकिंग और सुदूरवर्ती निगरानी तंत्र के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
सरकारी स्कूल से IIT मंडी और उच्च शोध तक का सफर
सक्षम घोसल्या की यह उपलब्धि उनके वर्षों के अनुशासन और अकादमिक लगन का परिणाम है। सुदर्शनपुरा निवासी बालकिशन चौधरी और राजू देवी के परिवार में जन्मे सक्षम की शुरुआती पढ़ाई गांव के ही स्थानीय सरकारी स्कूल में पूरी हुई थी। ग्रामीण परिवेश में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की और IIT मंडी में दाखिला लिया। वर्ष 2016 में उन्होंने वहां से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विषय में बीटेक की डिग्री पूरी की। कॉलेज के दिनों में भी वे तकनीकी नवाचारों में सक्रिय रहे और संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स क्लब के सह-संस्थापक बने।
स्नातक की पढ़ाई समाप्त करने के तुरंत बाद सक्षम रिसर्च असिस्टेंट के तौर पर IIT हैदराबाद से जुड़ गए। वर्ष 2017 में जब संस्थान में डीप टेक स्टार्टअप वाईसिग नेटवर्क्स की नींव रखी गई, तब वे इसके शुरुआती तकनीकी कर्मचारियों में शामिल हुए। शोध और तकनीकी विकास के साथ-साथ उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा जारी रखी और वर्ष 2021 में IIT हैदराबाद से ही कम्युनिकेशन एंड सिग्नल प्रोसेसिंग विषय में एमटेक की डिग्री भी हासिल की।
राष्ट्रीय और वैश्विक फलक पर तकनीकी नेतृत्व
सक्षम घोसल्या इससे पहले भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई बड़े तकनीकी मंचों पर भारतीय नवाचार की अगुवाई कर चुके हैं। सितंबर 2026 के दौरान नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की विशेष प्रदर्शनी में उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को कंपनी के स्वदेशी दूरसंचार उत्पादों की कार्यप्रणाली समझाई थी। इसके अतिरिक्त फ्रांस के नीस शहर में आयोजित 'भारत इनोवेट्स' अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भी उन्होंने भारतीय संचार तकनीकों का प्रतिनिधित्व किया था। देश की राजधानी में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में उनके इस प्रदर्शन के बाद सुदर्शनपुरा सहित पूरे जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।



















