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शिवहर में एक बीघे की खेती ने सुमित्रा देवी को दिलाई मजदूर से तिगुनी कमाई, रोज निकलता है 5 क्विंटल बैंगनसक्सेस स्टोरी
3 जुल॰ 2026, 11:09 am (27 दिन पहले)· 3

शिवहर में एक बीघे की खेती ने सुमित्रा देवी को दिलाई मजदूर से तिगुनी कमाई, रोज निकलता है 5 क्विंटल बैंगन

शिवहर की महिला किसान सुमित्रा देवी एक बीघे में बैंगन की खेती से रोज पांच से छह क्विंटल उपज निकाल रही हैं और सीतामढ़ी की बाजीतपुर मंडी में 30 रुपये किलो के भाव पर बेच रही हैं.

शिवहर जिले में परंपरागत खेती छोड़कर बड़े पैमाने पर सब्जी उगाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है, और इसी बदलाव की एक बड़ी मिसाल बन गई हैं यहां की महिला किसान सुमित्रा देवी. बैंगन की वैज्ञानिक और सुनियोजित खेती के दम पर उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल दी है. फिलहाल वे एक बीघे जमीन में बैंगन उगा रही हैं, जबकि दूसरे बीघे को भी इसी खेती के लिए तैयार किया जा रहा है.

चैत में रोपाई, तीन महीने में पहला फल

सुमित्रा देवी बताती हैं कि बैंगन के पौधे मुख्य रूप से चैत यानी मार्च-अप्रैल के महीने में खेत में रोपे जाते हैं. शुरुआती दिनों में मौसम में उतार-चढ़ाव और कई तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं, इसलिए पौधों की खास देखभाल जरूरी होती है. समय पर अच्छी खाद देना, नियमित सिंचाई करना और पौधों की जड़ों पर मिट्टी चढ़ाना, ये तीनों काम बेहद अहम माने जाते हैं. सही देखभाल और पोषण मिलते ही पौधा पूरी तरह तैयार हो जाता है और आने वाले कई महीनों तक लगातार फल देने लायक बन जाता है. रोपाई के करीब तीन महीने बाद ही पौधों में फल आना शुरू हो जाते हैं.

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रोज पांच से छह क्विंटल की तुड़ाई, कातिक तक चलता है सिलसिला

इस खेती की सबसे बड़ी खूबी इसका लंबा उत्पादन चक्र है. एक बार पौधा लगने के बाद फसल लगातार आठ से नौ महीने तक फल देती रहती है, यानी सुमित्रा देवी का खेत करीब पूरे साल इसी फसल से भरा रहता है और कमाई का जरिया बना रहता है. जब उत्पादन अपनी पूरी रफ्तार पकड़ लेता है, तो हर दिन औसतन पांच से छह क्विंटल बैंगन की तुड़ाई होती है. यह सिलसिला कातिक यानी अक्टूबर-नवंबर तक चलता रहता है, जिससे रोज बड़ी मात्रा में ताजी सब्जी बाजार में पहुंचती है और उनकी पकड़ मजबूत बनी रहती है.

कीट-रोग से बचाव के लिए चरणबद्ध छिड़काव

इतनी बड़ी उपज के पीछे सुमित्रा देवी की मेहनत के साथ-साथ फसल की सुरक्षा पर दिया गया खास ध्यान भी है. बैंगन की फसल को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए अलग-अलग चरणों में दवाइयों का छिड़काव किया जाता है. बीज बोने से लेकर फूल आने और फिर फल बनने तक, हर चरण में अलग तरह की दवा डालना जरूरी होता है, तभी फसल सुरक्षित रहती है और उत्पादन पर असर नहीं पड़ता.

सीतामढ़ी की बाजीतपुर मंडी तक पहुंचता है माल

तैयार बैंगन को सुमित्रा देवी सिर्फ आसपास के छोटे बाजारों तक सीमित नहीं रखतीं. वे अपनी उपज सीतामढ़ी की मशहूर बाजीतपुर मंडी तक पहुंचाती हैं. यहां इस बैंगन की भारी मांग रहती है और सीजन के दौरान दर्जनों मोटरसाइकिलें और पिकअप गाड़ियां सीधे खेत से माल लोड करके मंडी तक ले जाती हैं. इससे उपज को सही समय पर सही दाम मिल जाता है.

30 रुपये किलो का भाव, कद्दू से कहीं बेहतर मुनाफा

बाजार में फिलहाल यह बैंगन करीब 30 रुपये प्रति किलो, यानी थोक में 3000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर आसानी से बिक रहा है. सुमित्रा देवी गर्व से बताती हैं कि कद्दू जैसी आम और परंपरागत सब्जियों के मुकाबले बैंगन की खेती में मुनाफा कहीं ज्यादा और सुरक्षित मिलता है. साल भर लगातार होने वाली इस कमाई ने उनके परिवार को बेहतर जीवनस्तर और आर्थिक मजबूती दी है.

पूरा परिवार खेत में, कमाई मजदूर से तीन गुना

सबसे खास बात यह है कि इस पूरी खेती में सुमित्रा देवी के पति और दोनों बेटे भी बराबर से जुटे रहते हैं. घर के किसी भी सदस्य को कमाने के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती. तीनों मिलकर हर दिन एक मजदूर की कमाई से तीन गुना ज्यादा कमा लेते हैं. यही वजह है कि सुमित्रा देवी की यह खेती शिवहर के दूसरे किसानों के लिए भी एक मिसाल बन चुकी है, जो दिखाती है कि सही प्रबंधन और मेहनत के साथ की गई खेती परिवार को आत्मनिर्भर बना सकती है.

सवाल-जवाब

सुमित्रा देवी कहां की महिला किसान हैं?
वे शिवहर जिले की महिला किसान हैं.
वे कौन सी फसल उगा रही हैं?
वे बैंगन की खेती कर रही हैं.
बैंगन की रोपाई कब की जाती है?
रोपाई मुख्य रूप से चैत यानी मार्च-अप्रैल के महीने में की जाती है.
फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?
रोपाई के करीब तीन महीने बाद पौधों में फल आना शुरू हो जाता है.
तुड़ाई कब तक चलती है?
तुड़ाई कातिक यानी अक्टूबर-नवंबर तक, कुल आठ से नौ महीने चलती है.
रोजाना कितना उत्पादन होता है?
पूरी रफ्तार पर हर दिन औसतन पांच से छह क्विंटल बैंगन की तुड़ाई होती है.
बैंगन कहां बेचा जाता है?
इसे सीतामढ़ी की मशहूर बाजीतपुर मंडी में बेचा जाता है.
बैंगन की मौजूदा कीमत क्या है?
बाजार में यह करीब 30 रुपये प्रति किलो यानी 3000 रुपये प्रति क्विंटल थोक भाव पर बिक रहा है.
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