सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसने करूर भगदड़ मामले में जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के निर्णय को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत के इस कदम से पीड़ित परिवारों के लिए अनुकंपा के आधार पर रोजगार पाने का रास्ता फिर से साफ हो गया है।
पीठ ने जारी किया नोटिस
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने तमिलनाडु सरकार और अन्य पक्षों द्वारा दायर की गई विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने मामले के सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है और हाईकोर्ट के पिछले आदेश के प्रभाव को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद करूर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई दर्दनाक भगदड़ से जुड़ा है, जिसमें 41 लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे के बाद राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों की आर्थिक और सामाजिक सहायता के लिए मृतकों के आश्रितों को सरकारी नौकरियां देने की घोषणा की थी। हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने इस फैसले को अमान्य घोषित कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
आगे की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद राज्य प्रशासन अब पीड़ित परिवारों को नौकरियां आवंटित करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकता है। इस मामले की आगामी सुनवाइयों में हाईकोर्ट के आदेश की वैधानिकता और पीड़ित परिवारों को दी जाने वाली राहत पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।



















