शंघाई मास्टर्स के पुरुष एकल सेमीफाइनल मुकाबले में शीर्ष वरीयता प्राप्त अलेक्जेंडर ज्वेरेव का सफर शनिवार को समाप्त हो गया। कोर्ट पर लगातार मुकाबलों के चलते उपजी शारीरिक थकान और मामूली चोट से जूझ रहे जर्मन खिलाड़ी को स्पेन के अलेजांद्रो डेविडोविच फोकिना के हाथों तीन सेटों तक चले कड़े संघर्ष में शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस अप्रत्याशित हार के बाद प्रतिक्रिया देते हुए दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी ने स्वीकार किया कि इस टूर्नामेंट में आने से पहले वे ऊर्जा की भारी कमी महसूस कर रहे थे, और इन विपरीत परिस्थितियों में सेमीफाइनल तक का सफर तय कर पाना उनके वास्तविक आकलन से कहीं बेहतर रहा।
थकान और संघर्ष के बीच सेमीफाइनल तक का सफर
अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने मैच के उपरांत अपनी शारीरिक स्थिति पर खुलकर बात की और बताया कि हाल के महीनों में उन्होंने बिना किसी बड़े विश्राम के लगातार टेनिस खेला है। उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसा लगता है कि जितना टेनिस मैंने खेला है, उसकी वजह से शायद इस हफ्ते मैंने अपनी क्षमता से बढ़कर प्रदर्शन किया।' इसके साथ ही उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, 'मैं अपने साथ थोड़ी चोट और इस टूर्नामेंट में भारी थकान लेकर आया था, इसलिए आज इस तरह के खिलाड़ी से हारने से मुझे कोई शिकायत नहीं है।'
शंघाई के हार्ड कोर्ट पर खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में 25वीं वरीयता प्राप्त अलेजांद्रो डेविडोविच फोकिना ने पूरे धैर्य के साथ ज्वेरेव की कमजोरियों का फायदा उठाया। ज्वेरेव के फोरहैंड विंग पर लगातार दबाव बनाते हुए स्पैनिश खिलाड़ी ने मैच की दिशा बदली। दूसरे सेट में डेविडोविच फोकिना ने दौड़ते हुए शानदार बैकहैंड पासिंग शॉट लगाकर ज्वेरेव की सर्विस तोड़ी, जो पूरे मैच में पहली बार हुआ था। इस सर्विस ब्रेक के सहारे फोकिना ने दूसरा सेट अपने नाम किया और सेमीफाइनल मुकाबले को निर्णायक तीसरे सेट में धकेल दिया।
निर्णायक सेट में बिखरा शीर्ष वरीय खिलाड़ी का खेल
तीसरे और अंतिम सेट की शुरुआत में ही अलेक्जेंडर ज्वेरेव अपनी सर्विस गंवा बैठे और 2-0 से पीछे हो गए। इसके बाद वे मैच पर अपनी पकड़ दोबारा हासिल करने में नाकाम रहे। अलेजांद्रो डेविडोविच फोकिना ने 5-7, 6-4, 6-3 से मुकाबला जीतकर साल 2022 के बाद पहली बार किसी एटीपी मास्टर्स 1000 टूर्नामेंट के फाइनल में प्रवेश किया। दोनों खिलाड़ियों के बीच अब तक हुए आठ आमने-सामने के मुकाबलों में स्पैनिश खिलाड़ी की ज्वेरेव के खिलाफ यह केवल दूसरी जीत है।
क्वार्टर फाइनल मैच में एलेक्स डी मिनौर के खिलाफ सीधे सेटों में शानदार जीत दर्ज करने वाले ज्वेरेव सेमीफाइनल में उस लय को दोहरा नहीं पाए। 29 वर्षीय जर्मन खिलाड़ी ने माना कि चौथे दौर में अलेक्जेंडर बुब्लिक के विरुद्ध तीसरे सेट के टाई-ब्रेक तक खिंचे मुकाबले के बाद से ही वे शारीरिक रूप से संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'सबसे पहली बात, मैं कोई रोबोट नहीं हूं, मैं एक इंसान हूं और मुझे भी थकान होती है।'
व्यस्त शेड्यूल और शानदार सत्र का लेखा-जोखा
अमेरिकी ओपन के बाद मिले बेहद सीमित आराम का उल्लेख करते हुए ज्वेरेव ने बताया कि उस बड़े टूर्नामेंट के समापन के बाद उन्हें कुल मिलाकर सिर्फ एक दिन की छुट्टी मिली थी। उन्होंने कहा कि इतना अधिक टेनिस खेलना इस बात का प्रमाण है कि उनका खेल बेहतरीन रहा है, लेकिन इसका असर उनकी ऊर्जा पर पड़ा। उन्होंने कहा, 'मुझे व्यक्तिगत रूप से ऐसा लगता है कि बुब्लिक वाले मैच के बाद से ही मेरे अंदर ऊर्जा बिल्कुल खत्म हो रही थी।'
मैच के तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण करते हुए ज्वेरेव ने स्पष्ट किया कि पहला सेट जीतने के बावजूद वे काफी सुस्त थे और उनकी प्रतिक्रिया देने की गति धीमी पड़ चुकी थी। गेंद को रिटर्न करने में भी वे सामान्य स्तर से काफी नीचे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी आखिर इंसान ही होते हैं और शरीर पर अत्यधिक दबाव का असर पड़ता है।
शंघाई में मिली यह हार ज्वेरेव के लिए इस शानदार सत्र में एक दुर्लभ अपवाद की तरह है। इस साल जून में उन्होंने फ्रेंच ओपन जीतकर अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब हासिल किया था, जिसके बाद सितंबर में अमेरिकी ओपन जीतकर अपने ग्रैंड स्लैम खिताबों की संख्या दो कर ली थी। इसके अलावा ज्वेरेव वर्ष का अंत विश्व नंबर एक के रूप में करने वाले पहले जर्मन पुरुष खिलाड़ी बनने जा रहे हैं। टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले में रविवार को डेविडोविच फोकिना का सामना स्पेन के ही राफेल जोदार से होगा।



















