नाश्ते की मेज पर जब कोई अंडा फोड़ता है और पैन में एक के बजाय दो जर्दियां निकल आती हैं, तो पल भर के लिए हैरानी होना स्वाभाविक है। देखने में यह अनोखा अनुभव किसी चमत्कार जैसा लग सकता है, लेकिन इसके पीछे पूरी तरह से एक प्राकृतिक और जैविक प्रक्रिया काम करती है। पोल्ट्री की दुनिया में इसे डबल योक एग कहा जाता है। रसोई में अक्सर इसे देखकर लोग कई तरह के कयास लगाने लगते हैं, जबकि विज्ञान इसे मुर्गी के शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा मानता है।
मुर्गी के शरीर में कैसे तैयार होता है दो जर्दी वाला अंडा
इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए अंडे के बनने के तरीके को जानना जरूरी है। अंडे की जर्दी असल में मुर्गी के अंडाशय से निकलने वाला एक अंडाणु होती है। सामान्य परिस्थितियों में मुर्गी के शरीर से एक समय में एक ही जर्दी निकलती है। यह जर्दी प्रजनन नलिका में आगे बढ़ती है, जहां इसके चारों ओर धीरे-धीरे सफेदी यानी एल्ब्यूमिन, भीतरी झिल्ली और फिर कैल्शियम कार्बोनेट का मजबूत छिलका तैयार होता है।
कुछ विशेष परिस्थितियों में मुर्गी के अंडाशय से बहुत ही कम समय के अंतराल पर दो अंडाणु यानी दो जर्दियां एक साथ रिलीज हो जाती हैं। जब ये दोनों जर्दियां एक साथ अंडा बनने की शारीरिक प्रक्रिया से गुजरती हैं, तो मुर्गी की प्रणाली दोनों के चारों तरफ सफेदी और बाहरी छिलके की एक ही संयुक्त परत चढ़ा देती है। इस तरह जब पूरा अंडा बनकर बाहर आता है, तो एक ही छिलके के भीतर दो अलग-अलग जर्दियां सुरक्षित बंद मिलती हैं।
कम उम्र की मुर्गियों में क्यों ज्यादा दिखता है यह बदलाव
अंडे में दो जर्दी निकलने की संभावना सबसे अधिक उन मुर्गियों में पाई जाती है जो कम उम्र की होती हैं। जब एक युवा मुर्गी पहली बार अंडे देना शुरू करती है, तो उसका आंतरिक प्रजनन तंत्र पूरी तरह परिपक्व नहीं होता और हार्मोनल चक्र एक निश्चित लय में ढलने की कोशिश कर रहा होता है। संतुलन बनने की इस शुरुआती प्रक्रिया के दौरान अंडाशय से एक के बाद एक दो जर्दियां तेजी से निकल जाती हैं।
हालांकि सिर्फ उम्र ही इसका अकेला आधार नहीं है। पोल्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार मुर्गी की खास नस्ल, उसके शरीर की प्राकृतिक जैविक गतिशीलता और अंडे देने का तौर-तरीका भी इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं। समय बीतने के साथ जैसे-जैसे मुर्गी का हार्मोन चक्र स्थिर हो जाता है, वैसे-वैसे सामान्य एकल जर्दी वाले अंडे आने लगते हैं।
सेहत और खान-पान के लिहाज से कितना सही है ऐसा अंडा
डबल योक वाले अंडे को लेकर कई लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर संशय रहता है। वास्तविकता यह है कि यदि अंडा पूरी तरह ताजा है और उसे स्वच्छ व उचित तापमान पर रखा गया है, तो यह कतई खराब या जहरीला नहीं होता। सामान्य अंडों की तरह ही इसे उबालकर, ऑमलेट बनाकर या भुर्जी के रूप में अच्छी तरह पकाकर बेझिझक खाया जा सकता है। बस इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि किसी भी प्रकार के बैक्टीरियल संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए कच्चा या अधपका अंडा खाने से बचना चाहिए।
पोषण के नजरिए से देखें तो ऐसे अंडे में सामान्य अंडे की तुलना में कुल जर्दी का हिस्सा अधिक होता है। चूंकि अंडे के अधिकांश वसा, विटामिन और कैलोरी जर्दी वाले हिस्से में ही केंद्रित होते हैं, इसलिए इस अंडे से शरीर को मिलने वाली कैलोरी और पोषक तत्वों की मात्रा भी बढ़ जाती है। इसका सटीक पोषण स्तर अंडे के समग्र आकार और उसके अंदर मौजूद जर्दी के अनुपात पर निर्भर करता है।
क्या ऐसे अंडे से निकल सकते हैं दो जुड़वां चूजे
यदि इस प्रकार का कोई अंडा निषेचित हो जाता है, तो सैद्धांतिक रूप से उसमें दो अलग-अलग भ्रूण विकसित होने की गुंजाइश बन सकती है। इसके बावजूद व्यावहारिक तौर पर एक अंडे से दो जीवित और स्वस्थ चूजों का सफलतापूर्वक बाहर निकलना बेहद दुर्लभ माना जाता है।
इसकी मुख्य वजह यह है कि एक सामान्य अंडे के छिलके के भीतर सीमित जगह होती है। साथ ही भीतर मौजूद पोषक संसाधन और ऑक्सीजन की आपूर्ति दो अलग-अलग जीवों के पूर्ण शारीरिक विकास के लिए नाकाफी साबित होते हैं। इस कारण दोनों भ्रूणों का पूर्ण परिपक्वता तक पहुंच पाना प्राकृतिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।


















