बारिश का मौसम गर्मी और उमस से राहत तो लेकर आता है, लेकिन इसके साथ ही बालों की देखभाल से जुड़ी कई नई चुनौतियां भी खड़ी कर देता है। हवा में नमी का स्तर बढ़ने के कारण सिर की त्वचा यानी स्कैल्प में पसीना और प्राकृतिक तेल तेज़ी से जमा होने लगता है। इसके कारण सुबह शैंपू करने के बावजूद शाम होते-होते बाल बेहद चिपचिपे, भारी और बेजान नज़र आने लगते हैं। जिन लोगों की स्कैल्प स्वाभाविक रूप से ऑयली होती है, उनके लिए यह समस्या मानसून में और भी विकराल रूप ले लेती है। बार-बार बाल धोने के बाद भी जब बालों में ताज़गी नहीं टिकती, तो कई लोग महंगे केमिकल प्रोडक्ट्स की तरफ भागते हैं। हालांकि, मशहूर हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब ने इस समस्या से निपटने के लिए एक पारंपरिक और प्राकृतिक घरेलू उपाय सुझाया है। मुल्तानी मिट्टी पर आधारित यह आसान हेयर केयर हैक केवल 5 मिनट में स्कैल्प की अतिरिक्त चिकनाई और गंदगी को साफ कर बालों को हल्का और फ्रेश बना सकता है।
मानसून के मौसम में क्यों तेज़ी से ऑयली होते हैं बाल?
मानसून के दौरान वातावरण में आद्रता या ह्यूमिडिटी का स्तर काफी अधिक हो जाता है। जब यह पर्यावरणीय नमी स्कैल्प से निकलने वाले पसीने और सीबम (प्राकृतिक तेल) के साथ मिलती है, तो बाल बहुत कम समय में ग्रीसी और चिपचिपे हो जाते हैं। इतना ही नहीं, जब आप घर से बाहर निकलते हैं, तो हवा में मौजूद धूल, धुआं और प्रदूषण के कण भी इस चिपचिपे स्कैल्प पर आसानी से चिपक जाते हैं। बालों की जड़ों में जमा होने वाली यह गंदगी स्कैल्प के रोमछिद्रों को बंद कर सकती है, जिससे सिर में भारीपन और असहजता महसूस होती है। यही वजह है कि मानसून में केवल शैंपू करने से बालों की ग्रीसी रंगत दूर नहीं होती। ऐसे समय में स्कैल्प पर ज्यादा केमिकल या स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने के बजाय एक संतुलित और प्राकृतिक हेयर केयर रूटीन अपनाना कहीं अधिक असरदार साबित होता है।
जावेद हबीब का मुल्तानी मिट्टी हेयर पैक: सामग्री और तैयार करने की विधि
हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब के अनुसार, मुल्तानी मिट्टी अतिरिक्त सीबम और गंदगी को सोखने का एक बेहद प्रभावी पारंपरिक जरिया है। इस घरेलू उपाय को तैयार करने के लिए बहुत अधिक सामग्रियों की आवश्यकता नहीं होती। अपने बालों की लंबाई और घनेपन के हिसाब से 3 से 4 बड़े चम्मच मुल्तानी मिट्टी लें। अब इसमें आवश्यकतानुसार थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए एक स्मूथ और एकसमान पेस्ट बना लें। ध्यान रखें कि पेस्ट अत्यधिक पतला या बहने वाला न हो, ताकि इसे सिर पर लगाना और संभालना आसान रहे। जिन लोगों के बाल बहुत रूखे या बेजान हैं, वे अपनी पसंद के अनुसार इस मिश्रण में 1 से 2 चम्मच ताजा दही भी मिला सकते हैं। हालांकि, जावेद हबीब द्वारा बताए गए मूल नुस्खे में केवल मुल्तानी मिट्टी और पानी का ही समावेश है, इसलिए दही मिलाना पूरी तरह से वैकल्पिक है।
बालों पर पेस्ट लगाने और धोने का सही तरीका
मुल्तानी मिट्टी का उपयोग करते समय लगाने की तकनीक और समय का सही ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। सबसे पहले चौड़े दांतों वाली कंघी से बालों को हल्के हाथों से सुलझा लें। इसके बाद बालों को छोटे-छोटे सेक्शन में बांटें और मुल्तानी मिट्टी के पेस्ट को स्कैल्प तथा बालों की लंबाई पर अच्छी तरह से लगाएं। लगाते समय ध्यान रखें कि पेस्ट आँखों या चेहरे पर न गिरे। जावेद हबीब ने इस पैक को सिर पर केवल 5 मिनट तक रखने की सलाह दी है। यदि आप इसे थोड़ी देर और रखना चाहते हैं, तब भी यह सुनिश्चित करें कि पैक पूरी तरह सूखकर कड़क न होने पाए। सूखी और सख्त हो चुकी मुल्तानी मिट्टी को बाल खींचकर निकालने से बाल टूटने और जड़ों को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है। पैक को साफ़ करने के लिए सबसे पहले बालों पर पर्याप्त पानी डालकर मिट्टी को अच्छी तरह गीला और नरम करें। इसके बाद उंगलियों के पोरों से स्कैल्प की हल्की मसाज करते हुए मिट्टी को छुड़ाएं और फिर पानी से धो लें। अंत में यदि जरूरत महसूस हो तो किसी माइल्ड शैंपू का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सावधानी और पैच टेस्ट: किसे नहीं करना चाहिए इसका इस्तेमाल?
हालांकि मुल्तानी मिट्टी ऑयली स्कैल्प के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक क्लींजर के रूप में काम करती है, लेकिन इसका उपयोग हर तरह के बालों और स्कैल्प पर आँख बंद करके नहीं किया जाना चाहिए। यदि आपकी सिर की त्वचा बहुत ज्यादा रूखी, संवेदनशील या पहले से इरिटेटेड है, तो मुल्तानी मिट्टी का अत्यधिक उपयोग स्कैल्प के प्राकृतिक मॉइश्चर को पूरी तरह छीन सकता है, जिससे सूखापन और बढ़ सकता है। इसलिए पहली बार इस उपाय को आजमाने से पहले कानों के पीछे या स्कैल्प के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहद जरूरी है। यदि इस्तेमाल के दौरान या बाद में जलन, खुजली अथवा लालिमा दिखाई दे, तो तुरंत इसका प्रयोग बंद कर दें। इसके अलावा यदि आपको लगातार बालों के अत्यधिक झड़ने या गंभीर डैंड्रफ की समस्या बनी हुई है, तो केवल घरेलू उपायों के भरोसे रहने के बजाय किसी योग्य त्वचा विशेषज्ञ या ट्राइकोलॉजिस्ट की सलाह लेना ही सबसे सही कदम होगा। इस घरेलू हैक का इस्तेमाल हफ्ते में केवल एक बार करना ही पर्याप्त रहता है।



















