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2012 से लापता त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के जवान सुभाष चंद्र बोस मामले की जांच अब सीबीआई के हाथत्रिपुरा
1 नव॰ 2026, 9:38 pm (2 घंटे पहले)· 0

2012 से लापता त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के जवान सुभाष चंद्र बोस मामले की जांच अब सीबीआई के हाथ

अप्रैल 2012 में ट्रेन यात्रा के दौरान रहस्यमय तरीके से गायब हुए जवान सुभाष चंद्र बोस की गुमशुदगी की जांच केरल उच्च न्यायालय के आदेश पर अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने संभाल ली है।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के 27 वर्षीय जवान सुभाष चंद्र बोस के गायब होने के बहुचर्चित मामले की जांच अपने हाथों में ले ली है। केरल के एर्नाकुलम जिले के वेंबूर निवासी सुभाष अप्रैल 2012 में ट्रेन से यात्रा करते समय रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे। वह त्रिपुरा स्टेट राइफल्स की तीसरी बटालियन में बतौर राइफलमैन तैनात थे और लापता होने से पहले बल में अपनी सात साल की सेवा पूरी कर चुके थे।

केरल उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद नई प्राथमिकी दर्ज

इस पूरे मामले की कमान केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपे जाने का निर्णय केरल उच्च न्यायालय के एक हालिया आदेश के तहत आया है। लापता जवान के पिता पी के बालन ने अपने बेटे के गायब होने के मामले में नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाते हुए अदालत का रुख किया था। अदालत के निर्देश का पालन करते हुए सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने 28 अक्टूबर को एर्नाकुलम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में नए सिरे से प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई।

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सफर के दौरान हुआ था जवान का आखिरी संपर्क

जांच एजेंसी की प्राथमिकी के विवरण के मुताबिक, सुभाष चंद्र बोस 3 अप्रैल 2012 को रात करीब 9:20 बजे एर्नाकुलम जंक्शन से एर्नाकुलम-गुवाहाटी एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12507) में सवार हुए थे। उनके पास आरक्षित टिकट नहीं था, इसलिए वह सामान्य टिकट पर यात्रा कर रहे थे। उनके पिता स्टेशन पर उन्हें छोड़ने आए थे और बाद में अलुवा स्टेशन पर उतर गए थे। अलग होने से पहले सुभाष ने अपने पिता से कहा था कि वह ट्रेन के ट्रैवलिंग टिकट परीक्षक (टीटीई) से संपर्क कर किसी आरक्षित सीट की व्यवस्था करने का प्रयास करेंगे।

सफर के शुरुआती दो दिनों तक परिवार का सुभाष से संपर्क बना रहा। 4 अप्रैल को उन्होंने अपनी मां को फोन करके बताया था कि वह आंध्र प्रदेश पहुंच चुके हैं। इसके अगले दिन यानी 5 अप्रैल को हुई एक अन्य बातचीत में उन्होंने परिजनों से कहा कि उनके मोबाइल का बैलेंस कम हो रहा है और वह अपनी यूनिट में कार्यस्थल पर पहुंचने के बाद दोबारा संपर्क करेंगे।

यूनिट न पहुंचने पर दर्ज कराई गई थी शिकायत

सुभाष के परिवार को 10 अप्रैल 2012 को यह पता चला कि वह धलाई जिले में स्थित अपनी यूनिट में ड्यूटी पर नहीं पहुंचे हैं। इसके तुरंत बाद उनके पिता ने 13 अप्रैल 2012 को एर्नाकुलम रेलवे पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। बाद में इस मामले की जांच विशाखापट्टनम की सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) को सौंप दी गई थी, जिसने 15 अक्टूबर 2012 को नए सिरे से गुमशुदगी का मामला दर्ज किया था। केरल उच्च न्यायालय ने अब सीबीआई को एर्नाकुलम रेलवे पुलिस और विशाखापट्टनम जीआरपी दोनों द्वारा दर्ज मामलों की एकीकृत जांच अपने हाथ में लेने का स्पष्ट आदेश दिया है।

सवाल-जवाब

लापता जवान का नाम क्या है और वह किस बल में तैनात थे?
लापता जवान का नाम सुभाष चंद्र बोस है, और वह त्रिपुरा स्टेट राइफल्स की तीसरी बटालियन में राइफलमैन के पद पर सेवारत थे।
सुभाष चंद्र बोस कब और कहां से लापता हुए थे?
वह 3 अप्रैल 2012 को एर्नाकुलम जंक्शन से गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन में सवार हुए थे और यात्रा के दौरान रास्ते में लापता हो गए।
सीबीआई ने इस मामले में क्या कदम उठाया है?
सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने केरल उच्च न्यायालय के आदेश के बाद 28 अक्टूबर को एर्नाकुलम मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में नए सिरे से प्राथमिकी दर्ज की है।
सुभाष से उनके परिवार की आखिरी बातचीत कब हुई थी?
परिवार से उनका अंतिम संपर्क 5 अप्रैल 2012 को हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि मोबाइल बैलेंस खत्म हो रहा है और वह यूनिट पहुंचकर फोन करेंगे।
पहले किन एजेंसियों ने इस मामले की जांच दर्ज की थी?
शुरुआत में एर्नाकुलम रेलवे पुलिस ने अप्रैल 2012 में और बाद में विशाखापट्टनम जीआरपी ने अक्टूबर 2012 में गुमशुदगी का मामला दर्ज किया था।
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टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·1 घंटे पहले

12 साल बाद भी किसी का यूं गायब रहना और अब सीबीआई के पास मामला जाना उम्मीद जगाता है, पर इतने साल बीत जाने के बाद क्या सचमुच कोई ठोस सुराग मिल पाएगा?

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

बारह साल बाद सीबीआई जांच से बूढ़े पिता को शायद कुछ इंसाफ या सच मिल सके। उम्मीद है इस बार बात बनेगी।

Li Wei@li-wei·1 घंटे पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने। बारह साल बहुत लंबा वक्त होता है, पिता की उम्मीद ही उनका सबसे बड़ा सहारा है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

12 साल बाद किसी मामले की सीबीआई जांच शुरू होना बहुत लंबी लड़ाई है, लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद क्या अब इस बात के कोई पुख्ता सबूत मिल पाएंगे कि वह जवान ट्रेन से कहां गायब हुआ था?

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

रोहन, बिल्कुल सही सवाल है! 2012 से मोबाइल डेटा और सीसीटीवी फुटेज जैसे सुराग मिलना अब बहुत मुश्किल होगा।

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