उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में उच्च शिक्षण संस्थान के भीतर उस वक्त भारी अफरातफरी मच गई, जब देर रात एक हॉस्टल के शौचालय में अचानक मगरमच्छ रेंगता नजर आया। यह खौफनाक वाकया चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के वरुणा ब्वॉयज हॉस्टल में शुक्रवार की देर रात पेश आया। नित्यकर्म के इरादे से वॉशरूम पहुंचे एक छात्र की नजर जैसे ही फर्श पर बैठे इस जलीय शिकारी पर पड़ी, उसके होश उड़ गए। उसने फौरन शोर मचाते हुए अपने साथियों को सचेत किया, जिससे कुछ ही पलों में छात्रावास के गलियारे में विद्यार्थियों का बड़ा जमावड़ा लग गया।
देर रात शौचालय में रेंगते दिखा जलीय जीव, छात्रावास में दहशत
शौचालय के भीतर मगरमच्छ की मौजूदगी का पता चलते ही पूरे हॉस्टल में दहशत फैल गई। अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित छात्रों ने तुरंत मामले से विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया। इसके साथ ही वन विभाग और स्थानीय चिड़ियाघर के रेस्क्यू अमले को फोन कर तत्काल रेस्क्यू टीम भेजने की गुहार लगाई गई। हालांकि, लंबा इंतजार बीत जाने के बाद भी जब किसी सरकारी दस्ते का अता-पता नहीं चला, तो छात्रों ने खुद ही मोर्चा संभालने की ठानी। मगरमच्छ कहीं हॉस्टल के कमरों या गलियारों में न भाग जाए, इसलिए कुछ साहसी छात्रों ने हिम्मत जुटाकर उसे प्लास्टिक के एक बड़े डस्टबिन के नीचे सुरक्षित तरीके से ढककर बंद कर दिया। इस त्वरित कदम की बदौलत जीव की हलचल सीमित हो गई और बड़ा खतरा टल गया।
ऑनलाइन तलाशा हेल्पलाइन नंबर, वन्यजीव विशेषज्ञ ने संभाला मोर्चा
काफी देर तक जब वन अमले अथवा प्राणि उद्यान से कोई सहायता नहीं पहुंची, तब परेशान छात्रों ने इंटरनेट पर सर्च इंजन गूगल की मदद से वन्यजीव बचाव संगठनों के संपर्क सूत्र तलाशने शुरू किए। इसी खोजबीन के दौरान उन्हें ऑल इंडिया स्नेक अवेयरनेस एसोसिएशन का नंबर मिला, जिस पर उन्होंने फौरन संपर्क साधा। सूचना की गंभीरता को देखते हुए संस्था से जुड़े सक्षम दीक्षित तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने पेशेवर दक्षता के साथ डिब्बे में बंद मगरमच्छ को नियंत्रित कर बाहर निकाला। सफल रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद पकड़े गए मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से चिड़ियाघर प्रबंधन को सौंप दिया गया, तब जाकर भयभीत छात्रों ने चैन की सांस ली।
परिसर की चारदीवारी और जल निकासी नालों पर उठे सुरक्षा के सवाल
छात्रों के रिहायशी क्षेत्र में इस तरह खतरनाक जीव के मिलने से पूरे विश्वविद्यालय की चारदीवारी और सुरक्षा बंदोबस्त पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अधिकारी और कर्मचारी इस बात की पड़ताल में जुटे हैं कि आखिर इतनी सघन आबादी वाले हॉस्टल के अंदर यह मगरमच्छ किस रास्ते से दाखिल हुआ। प्रारंभिक तौर पर यह कयास लगाया जा रहा है कि कैंपस से होकर गुजरने वाला चिड़ियाघर का बड़ा नाला इसके प्रवेश का जरिया बना होगा। आशंका है कि बरसाती पानी या जलभराव के दौरान नाले से होकर यह जीव रेंगते हुए इमारत के भूतल तक पहुंच गया। हालांकि, इस मार्ग की पुष्टि विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही संभव होगी। फिलहाल घटना के मद्देनजर विश्वविद्यालय परिसर के आसपास जल स्रोतों की निगरानी और सुरक्षात्मक जालियां लगाने की मांग तेज हो गई है।
























