हाईवे पर सफर कीजिए, टोल प्लाजा पर पूरा शुल्क चुकाइए और बदले में बुनियादी सुविधाएं तक न मिलें — उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से गुजरने वाले रीवा-वाराणसी राजमार्ग पर यात्रियों की यही शिकायत है। आपके टैक्स के पैसों से बने इस फोर-लेन हाईवे को विश्वस्तरीय बताया गया था, लेकिन जमीन पर तस्वीर बिल्कुल उलट है। कहीं सड़क पर टांके लगाकर मरम्मत की जा रही है तो कहीं रात में रोशनी की एक लाइट तक जलती नहीं दिखती।
क्यों अहम है यह राजमार्ग
रीवा-वाराणसी राजमार्ग 146 किलोमीटर लंबा है और वाराणसी के रामनगर को रीवा से जोड़ता है। यही नहीं, यह प्रयागराज-बिहार मार्ग को भी आपस में कनेक्ट करता है। माल ढुलाई के लिहाज से इस मार्ग की खास अहमियत है, और महाराष्ट्र तथा गुजरात तक पहुंच के लिए भी इसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। मिर्जापुर जिले से होकर गुजरने वाला यह दोनों शहरों को जोड़ने का इकलौता रास्ता है, जिसका इस्तेमाल अधिकांश लोग करते हैं। बढ़ते वाहनों की संख्या को देखते हुए सरकार ने इसे फोर-लेन बनाने का फैसला किया और इस पर करीब तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए।
सुरक्षा अब भी सबसे बड़ा सवाल
सुविधाओं की तरह सुरक्षा के इंतजाम भी यहां नाकाफी हैं। पुख्ता प्रबंध न होने की वजह से इस हाईवे पर कई बड़े हादसे हो चुके हैं, और सफर के दौरान यात्रियों की सुरक्षा आज भी एक बड़ा सवाल बनी हुई है।
'तीन हजार करोड़ खर्च, पर सहूलियत शून्य'
स्थानीय नीरज यादव कहते हैं कि तीन हजार करोड़ रुपये से बना यह हाईवे सुविधाओं के मामले में खाली है। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि कुछ जगहों पर सड़क की सही लेवलिंग न होने के कारण गाड़ियां एक से दो फीट तक ऊपर उछल जाती हैं। ओवरब्रिज पर लगाए गए लगभग सभी बल्ब फ्यूज हो चुके हैं — कई जगहों पर एक बल्ब जलता है तो उसके बगल वाला बुझा रहता है। उनके मुताबिक वाहन चालकों की सुविधा और सुरक्षा का जरा भी ख्याल नहीं रखा गया है। टोल प्लाजा पर पैसा तो वसूला जा रहा है, मगर सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं हो रहा।
रेस्ट एरिया भी बदहाल
गगन उपाध्याय की शिकायत भी कुछ अलग नहीं है। उनका कहना है कि वाहनों के लिए सुविधाएं न के बराबर हैं। रेस्ट एरिया टूटे-फूटे और जीर्ण-शीर्ण हालत में पड़े हैं, जिनका कोई फायदा नहीं। ओवरब्रिज के आसपास लगे कई बल्ब खराब पड़े हैं और जरा-सी असावधानी किसी अनहोनी की वजह बन सकती है। उन्होंने सरकार से अपील की कि हाईवे का पुनरीक्षण कराया जाए और उसके बाद मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए। उनका तर्क है कि जब यहां पैसा वसूला जा रहा है तो टोल के एवज में मिलने वाली सारी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। फिलहाल सड़क की हालत तय मानकों के अनुरूप कहीं से नजर नहीं आती।













