आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल द्वारा प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित लहुरिया दह गांव एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अपने इस्तीफे के उपरांत सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट में उन्होंने इस दूरस्थ गांव का विशेष रूप से उल्लेख किया था। आजादी के बाद से कई दशकों तक पीने के साफ पानी की भारी किल्लत झेल रहे इस गांव के निवासियों तक नल के जरिए जल पहुंचाने का श्रेय दिव्या मित्तल के प्रशासनिक प्रयासों को दिया जाता है। इस फैसले के सामने आने के बाद गांव की महिलाएं और बुजुर्ग उनके काम को याद कर भावुक हो रहे हैं।
वर्षों पुरानी पेयजल किल्लत और नल से जल आपूर्ति का सफर
लहुरिया दह गांव में आजादी के बाद से ही स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई थी। स्थानीय निवासियों को प्रतिदिन पीने का पानी जुटाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती थी। गांव की सुखराजी देवी ने इस विकट परिस्थिति को याद करते हुए बताया कि पानी लाने के लिए ग्रामीणों को अपने घरों से कई किलोमीटर दूर तक पैदल जाना पड़ता था। रोजाना की इस समस्या से ग्रामीण बेहद परेशान थे। जब दिव्या मित्तल मिर्जापुर की जिलाधिकारी के रूप में पदस्थ हुईं, तो उन्होंने इस क्षेत्र में पीने के पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में ठोस पहल की। उनके प्रयासों के फलस्वरूप गांव में पहली बार पाइपलाइन और नल के माध्यम से घर-घर जल पहुंचना संभव हो सका। सुखराजी देवी के अनुसार, जिले में पूर्व में किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने इस स्तर पर पहुंचकर इतना प्रभावी कार्य नहीं किया था।
5 किलोमीटर दूर से मटका लेकर पानी लाते थे ग्रामीण
गांव के निवासी रमेश यादव ने अपनी पुरानी समस्याओं का जिक्र करते हुए बताया कि नल की सुविधा उपलब्ध होने से पहले ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन था। लोगों को पीने का पानी लाने के लिए हाथ में मटका लेकर लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित जल स्रोतों तक जाना पड़ता था। इस दैनिक प्रक्रिया में ग्रामीणों का काफी समय और ऊर्जा नष्ट होती थी। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के रूप में दिव्या मित्तल ने ग्रामीणों के इस कष्ट को समझा और व्यक्तिगत रुचि लेकर गांव तक नल का पानी पहुंचाया। अब गांव के प्रत्येक घर में नल से शुद्ध जल उपलब्ध हो रहा है, जिससे लोग बेहद संतुष्ट और प्रसन्न हैं। रमेश यादव ने यह इच्छा भी जताई कि दिव्या मित्तल को दोबारा प्रशासनिक सेवा में लौटकर जनसेवा के कार्य आगे बढ़ाने चाहिए।
नेताओं के वादों के बीच प्रशासनिक तत्परता की मिसाल
गांव की बुजुर्ग महिला दूईजी देवी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि समय-समय पर कई राजनीतिक नेता गांव में आए और बड़ी-बड़ी बातें करके चले गए, लेकिन धरातल पर किसी ने कोई ठोस काम नहीं किया। उन्होंने बताया कि जब दिव्या मित्तल पहली बार गांव के दौरे पर आई थीं, तो उन्होंने तुरंत समस्या को समझा और पहली ही बार में पानी पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। जब पूर्व में जिलाधिकारी गांव आई थीं, तब दूईजी देवी ने उन्हें और उनके परिवार को ढेरों आशीर्वाद दिए थे। आज भी गांव की महिलाएं उन्हें याद करती हैं और मानती हैं कि जो सेवा उन्होंने गांव के लिए की है, उसके बदले ग्रामीण भी उनके प्रति आदर और सम्मान व्यक्त करना चाहते हैं।
इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पोस्ट से फिर जागा जुड़ाव
दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से अपने त्यागपत्र के बाद जब लहुरिया दह गांव की स्थिति और वहां के लोगों के संघर्ष का जिक्र सोशल मीडिया पर किया, तो गांव में पुरानी यादें ताजा हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक पदों पर रहते हुए कई अधिकारी आते-जाते हैं, लेकिन जनता के दिल में वही जगह बना पाते हैं जो उनके बुनियादी दुखों का निवारण करते हैं। लहुरिया दह के लोग आज भी उनके द्वारा किए गए भागीरथ प्रयास की सराहना कर रहे हैं और उनके सुखद भविष्य की कामना कर रहे हैं।



















