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उत्तर प्रदेश चुनाव में गठबंधन से बाहर हुए ओवैसी, अखिलेश यादव पर साधा निशानाउत्तर प्रदेश
2 अक्तू॰ 2026, 10:26 pm (28 मिनट पहले)· 0

उत्तर प्रदेश चुनाव में गठबंधन से बाहर हुए ओवैसी, अखिलेश यादव पर साधा निशाना

सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा गठबंधन में शामिल करने से इनकार करने के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने बिहार चुनाव का हवाला देते हुए चेतावनी दी, वहीं अखिलेश ने पुराने साथियों को साधने का दांव चला है।

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी खेमे की सियासी हलचल तेज हो गई है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के मौजूदा चुनावी गठबंधन के दरवाजे पूरी तरह बंद हो गए हैं। ओवैसी ने गठबंधन में शामिल होने को लेकर अखिलेश यादव को 2 अक्टूबर तक का समय दिया था। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि तय समयसीमा तक समाजवादी पार्टी की ओर से कोई सकारात्मक फैसला नहीं आता है, तो उनकी पार्टी पूरे राज्य में अपनी पूरी ताकत झोंककर चुनावी मैदान में उतरेगी। निर्धारित समय सीमा समाप्त होते ही ओवैसी के सियासी तेवर पूरी तरह आक्रामक हो गए हैं।

बिहार के चुनावी नतीजों की याद और ओवैसी की दो टूक चेतावनी

अखिलेश यादव के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने उन्हें गंभीर चेतावनी दी है। ओवैसी ने कहा कि समाजवादी पार्टी प्रमुख को बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों का गहराई से विश्लेषण करना चाहिए। उनके अनुसार जो ऐतिहासिक भूल बिहार में तेजस्वी यादव ने दोहराई थी, ठीक उसी तरह की गलती अब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में कर रहे हैं। पौराणिक संदर्भ देते हुए ओवैसी ने कहा कि उन्होंने तो महाभारत के पांडवों की तरह केवल पांच गांव ही मांगे थे, लेकिन यदि अखिलेश यादव उतनी सीटें भी साझा करने को राजी नहीं हैं तो फिर चुनावी महाभारत होना बिल्कुल तय है।

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गठबंधन विस्तार पर अखिलेश यादव का साफ इनकार

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने ओवैसी के इन बयानों और चेतावनियों को खास तवज्जो नहीं दी। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि जो कोई भी भारतीय जनता पार्टी को पराजित करना चाहता है और देश के लोकतंत्र की रक्षा करने का इरादा रखता है, उसे ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे सीधे तौर पर बीजेपी को सियासी फायदा पहुंचे। जब उनसे स्पष्ट रूप से पूछा गया कि क्या समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में AIMIM को अपने साथ लेगी, तो उन्होंने साफ शब्दों में स्थिति स्पष्ट कर दी। अखिलेश ने कहा कि अब किसी नए चुनावी गठबंधन की कोई गुंजाइश नहीं बची है, और लोकसभा चुनाव के दौरान जो गठबंधन बना था, वही आगे भी जारी रहेगा।

राज्यसभा चुनाव के समीकरण और पुराने बागियों को खुला न्योता

ओवैसी के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करने के बाद अखिलेश यादव ने एक नया सियासी पासा फेंका है। उन्होंने उन नेताओं को दोबारा साथ आने का खुला प्रस्ताव दिया जो पिछले कुछ वर्षों के दौरान समाजवादी पार्टी का दामन छोड़कर चले गए थे। आगामी राज्यसभा चुनाव का हवाला देते हुए अखिलेश ने कहा कि यदि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर कोई नेता उनका साथ देना चाहता है और दोबारा गठबंधन में वापसी की इच्छा रखता है, तो उसका पूरा स्वागत है। इसके लिए वे पुरानी तमाम कड़वी बातों और मतभेदों को भुलाने के लिए भी तैयार हैं।

अखिलेश यादव का यह खुला संदेश मुख्य रूप से निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर जैसे नेताओं की ओर केंद्रित माना जा रहा है। ये दोनों ही नेता पूर्व में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में रह चुके हैं और बाद में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाले एनडीए खेमे में शामिल हो गए थे। राज्यसभा चुनाव में अपने तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए समाजवादी पार्टी को कम से कम 11 विधायकों के अतिरिक्त समर्थन की सख्त जरूरत है। इसी अंकगणित को साधने की खातिर अखिलेश यादव अपने पुराने सहयोगियों के प्रति नरम रुख दिखा रहे हैं।

संजय निषाद का पलटवार और सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस से खींचतान

सपा प्रमुख के इस सुलह वाले बयान पर संजय निषाद ने तत्काल कड़ा एतराज जताया। उन्होंने अखिलेश के इस प्रस्ताव को ठगी की सियासी चाल करार दिया। संजय निषाद ने दो टूक कहा कि उत्तर प्रदेश की सभी राजनीतिक पार्टियां और तमाम विधायक अखिलेश यादव की इन चालबाजियों को भलीभांति समझते हैं, इसलिए कोई भी नेता उनके बहकावे में आकर उनके साथ जाने वाला नहीं है।

इधर विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी राज्य की कुल सीटों में से कम से कम 350 सीटों पर खुद अपने उम्मीदवार उतारने की व्यापक तैयारी कर रही है। सपा अपने सहयोगी दल कांग्रेस को केवल 53 से 55 सीटें देने का विचार कर रही है। दूसरी ओर कांग्रेस के नेता राज्य में कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की मजबूत दावेदारी ठोक रहे हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी कांग्रेस को इससे अधिक सीटें देने के मूड में बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही है, जिससे सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच अंदरूनी खींचतान जारी है।

सवाल-जवाब

असदुद्दीन ओवैसी ने अखिलेश यादव को क्या अल्टीमेटम दिया था?
ओवैसी ने अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश चुनाव गठबंधन पर फैसला लेने के लिए 2 अक्टूबर तक का समय दिया था।
ओवैसी ने महाभारत और बिहार चुनाव का उल्लेख क्यों किया?
ओवैसी ने कहा कि उन्होंने पांडवों की तरह सिर्फ पांच सीटें मांगी थीं और चेतावनी दी कि अखिलेश वही गलती कर रहे हैं जो बिहार में तेजस्वी यादव ने की थी।
AIMIM को गठबंधन में लेने पर अखिलेश यादव का क्या रुख है?
अखिलेश यादव ने साफ किया कि किसी नए गठबंधन की गुंजाइश नहीं है और लोकसभा चुनाव वाला गठबंधन ही कायम रहेगा।
राज्यसभा चुनाव में सपा को कितने अतिरिक्त विधायकों की जरूरत है?
समाजवादी पार्टी को अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए कम से कम 11 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।
अखिलेश यादव के ऑफर पर संजय निषाद ने क्या प्रतिक्रिया दी?
संजय निषाद ने अखिलेश के साथ आने के प्रस्ताव को एक ठगी की चाल बताते हुए खारिज कर दिया।
यूपी विधानसभा चुनाव में सपा कांग्रेस को कितनी सीटें ऑफर कर रही है?
सपा कांग्रेस को 53 से 55 सीटें देने का ऑफर दे रही है, जबकि कांग्रेस कम से कम 150 सीटों की मांग कर रही है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·11 मिनट पहले

ओवैसी और अखिलेश का यह झगड़ा सीधे तौर पर यूपी की चुनावी तस्वीर को बदल रहा है। सपा के दरवाजे बंद होने के बाद अब मुस्लिम वोटों का बिखराव तय लग रहा है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 मिनट पहले

रोहन भाई, मुस्लिम वोटों के बिखरने की बात हर बार कही जाती है, पर ज़मीनी हक़ीक़त हमेशा वैसी नहीं होती जैसी दिखती है।

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