लखनऊ में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के भर्ती परीक्षा परिणाम घोषित करने में हो रहे विलंब को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। जूनियर इंजीनियर पद के लिए परीक्षा दे चुके 30 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी लंबे समय से नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। लंबे इंतजार के बाद हताश होकर बड़ी संख्या में नौजवान उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास के बाहर जमा हो गए। हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचे इन छात्रों ने जोरदार नारेबाजी की और सरकार से सवाल किया कि आखिर उनका परीक्षा परिणाम कब जारी किया जाएगा।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने आवास से बाहर आकर सुनी अभ्यर्थियों की समस्याएं
आवास के बाहर अभ्यर्थियों के जमावड़े और नारेबाजी को देखते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक स्वयं घर से बाहर आए। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचकर उनकी शिकायतें और पीड़ा सुनी। नौजवानों ने बताया कि वे बीते दो वर्षों से इस भर्ती प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। विज्ञापन निकलने के बाद चार महीने पहले ही लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी, लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी चयन आयोग ने परिणाम की घोषणा नहीं की है। छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए डिप्टी सीएम ने तुरंत फोन उठाया और सीधे आयोग के अध्यक्ष से बात की।
आयोग अध्यक्ष को फोन पर दिए सख्त निर्देश और पारदर्शिता बरतने की हिदायत
फोन कॉल के दौरान ब्रजेश पाठक ने आयोग अध्यक्ष से परिणाम में हो रही देरी का मुख्य कारण पूछा। उन्होंने अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे आज ही अभ्यर्थियों से मुलाकात करें और भर्ती प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति के बारे में उन्हें विस्तार से समझाएं। डिप्टी सीएम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि दूर-दराज के इलाकों से अपने किराए के पैसे खर्च करके आए ये बच्चे बेहद परेशान हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी हमारे अपने भाई-बहन हैं, इसलिए आयोग को पूरी पारदर्शिता के साथ इनसे संवाद करना चाहिए।
बातचीत के दौरान जब यह जानकारी मिली कि आयोग के अध्यक्ष फिलहाल किसी अन्य परीक्षा केंद्र के निरीक्षण दौरे पर हैं और दोपहर 12:30 बजे से 1:00 बजे के बीच वापस लौटेंगे, तब डिप्टी सीएम ने छात्रों के 5 प्रतिनिधियों का एक दल गठित कर उन्हें दोपहर 1:00 बजे आयोग कार्यालय जाकर अध्यक्ष से मिलने का समय निर्धारित करवाया।
4,612 पदों की भर्ती प्रक्रिया और हाईकोर्ट में लंबित याचिका की हकीकत
यह पूरा विवाद मार्च 2024 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार के अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने कुल 4,612 जूनियर इंजीनियर पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था। इस परीक्षा में प्रदेश भर के 30 हजार से अधिक युवाओं ने भाग लिया था। परीक्षा संपन्न हुए 4 महीने हो चुके हैं, परंतु परिणाम अटके होने के कारण अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। प्रदर्शनकारी नौजवानों की मांग है कि आयोग कम से कम दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करे ताकि अंतिम परिणाम जल्द से जल्द जारी किया जा सके।
आयोग सचिव हरिकेश चौरसिया ने मुलाकात कर बताई परिणाम रोकने की वजह
डिप्टी सीएम के कड़े रुख के बाद अभ्यर्थियों का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आयोग कार्यालय पहुंचा, जहां आयोग के सचिव हरिकेश चौरसिया ने छात्रों से मुलाकात की। सचिव ने अभ्यर्थियों को प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में विज्ञापन जारी होने के पश्चात कुछ अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उन्होंने वर्ष 2023 की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) पास की थी, इसलिए उन्हें भी 2024 की जूनियर इंजीनियर भर्ती में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए।
मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के कारण अदालत ने अंतिम परिणाम जारी करने पर रोक लगा रखी है। सचिव हरिकेश चौरसिया ने अभ्यर्थियों को आश्वस्त किया कि सितंबर महीने में इस मामले की अगली सुनवाई निर्धारित है। अदालत का फैसला आते ही आयोग तुरंत आगे की प्रक्रिया पूरी करते हुए परीक्षा का परिणाम घोषित कर देगा।























