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जूनियर इंजीनियर परीक्षा परिणाम में देरी पर भड़के छात्र, लखनऊ में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के घर के बाहर प्रदर्शन के बाद आयोग हरकत में आयाउत्तर प्रदेश
2 सित॰ 2026, 12:18 am (1 घंटे पहले)· 1

जूनियर इंजीनियर परीक्षा परिणाम में देरी पर भड़के छात्र, लखनऊ में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के घर के बाहर प्रदर्शन के बाद आयोग हरकत में आया

लखनऊ में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की जूनियर इंजीनियर भर्ती के नतीजे न आने से आक्रोशित अभ्यर्थियों ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास के बाहर जमकर हंगामा किया। प्रदर्शन के बाद डिप्टी सीएम ने फोन पर आयोग के अध्यक्ष से वार्ता कर 5 प्रतिनिधियों को मिलकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।

लखनऊ में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के भर्ती परीक्षा परिणाम घोषित करने में हो रहे विलंब को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। जूनियर इंजीनियर पद के लिए परीक्षा दे चुके 30 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी लंबे समय से नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। लंबे इंतजार के बाद हताश होकर बड़ी संख्या में नौजवान उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास के बाहर जमा हो गए। हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचे इन छात्रों ने जोरदार नारेबाजी की और सरकार से सवाल किया कि आखिर उनका परीक्षा परिणाम कब जारी किया जाएगा।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने आवास से बाहर आकर सुनी अभ्यर्थियों की समस्याएं

आवास के बाहर अभ्यर्थियों के जमावड़े और नारेबाजी को देखते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक स्वयं घर से बाहर आए। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचकर उनकी शिकायतें और पीड़ा सुनी। नौजवानों ने बताया कि वे बीते दो वर्षों से इस भर्ती प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। विज्ञापन निकलने के बाद चार महीने पहले ही लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी, लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी चयन आयोग ने परिणाम की घोषणा नहीं की है। छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए डिप्टी सीएम ने तुरंत फोन उठाया और सीधे आयोग के अध्यक्ष से बात की।

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आयोग अध्यक्ष को फोन पर दिए सख्त निर्देश और पारदर्शिता बरतने की हिदायत

फोन कॉल के दौरान ब्रजेश पाठक ने आयोग अध्यक्ष से परिणाम में हो रही देरी का मुख्य कारण पूछा। उन्होंने अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे आज ही अभ्यर्थियों से मुलाकात करें और भर्ती प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति के बारे में उन्हें विस्तार से समझाएं। डिप्टी सीएम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि दूर-दराज के इलाकों से अपने किराए के पैसे खर्च करके आए ये बच्चे बेहद परेशान हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी हमारे अपने भाई-बहन हैं, इसलिए आयोग को पूरी पारदर्शिता के साथ इनसे संवाद करना चाहिए।

बातचीत के दौरान जब यह जानकारी मिली कि आयोग के अध्यक्ष फिलहाल किसी अन्य परीक्षा केंद्र के निरीक्षण दौरे पर हैं और दोपहर 12:30 बजे से 1:00 बजे के बीच वापस लौटेंगे, तब डिप्टी सीएम ने छात्रों के 5 प्रतिनिधियों का एक दल गठित कर उन्हें दोपहर 1:00 बजे आयोग कार्यालय जाकर अध्यक्ष से मिलने का समय निर्धारित करवाया।

4,612 पदों की भर्ती प्रक्रिया और हाईकोर्ट में लंबित याचिका की हकीकत

यह पूरा विवाद मार्च 2024 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार के अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने कुल 4,612 जूनियर इंजीनियर पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था। इस परीक्षा में प्रदेश भर के 30 हजार से अधिक युवाओं ने भाग लिया था। परीक्षा संपन्न हुए 4 महीने हो चुके हैं, परंतु परिणाम अटके होने के कारण अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। प्रदर्शनकारी नौजवानों की मांग है कि आयोग कम से कम दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करे ताकि अंतिम परिणाम जल्द से जल्द जारी किया जा सके।

आयोग सचिव हरिकेश चौरसिया ने मुलाकात कर बताई परिणाम रोकने की वजह

डिप्टी सीएम के कड़े रुख के बाद अभ्यर्थियों का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आयोग कार्यालय पहुंचा, जहां आयोग के सचिव हरिकेश चौरसिया ने छात्रों से मुलाकात की। सचिव ने अभ्यर्थियों को प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में विज्ञापन जारी होने के पश्चात कुछ अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उन्होंने वर्ष 2023 की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) पास की थी, इसलिए उन्हें भी 2024 की जूनियर इंजीनियर भर्ती में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए।

मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के कारण अदालत ने अंतिम परिणाम जारी करने पर रोक लगा रखी है। सचिव हरिकेश चौरसिया ने अभ्यर्थियों को आश्वस्त किया कि सितंबर महीने में इस मामले की अगली सुनवाई निर्धारित है। अदालत का फैसला आते ही आयोग तुरंत आगे की प्रक्रिया पूरी करते हुए परीक्षा का परिणाम घोषित कर देगा।

सवाल-जवाब

यूपीएसएसएससी जूनियर इंजीनियर भर्ती का विज्ञापन कब जारी किया गया था?
इस भर्ती का विज्ञापन मार्च 2024 में जारी किया गया था, जिसमें कुल 4,612 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे।
जूनियर इंजीनियर परीक्षा का परिणाम क्यों अटका हुआ है?
पीईटी 2023 पास अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है, जिसके कारण परिणाम घोषित नहीं हो पा रहा है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मुलाकात के बाद क्या कदम उठाया गया?
डिप्टी सीएम ने आयोग के अध्यक्ष से बात कर छात्रों के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को दोपहर 1:00 बजे वार्ता के लिए भेजा।
इस परीक्षा में कितने उम्मीदवारों ने भाग लिया था?
इस भर्ती परीक्षा में कुल 30 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने भाग लिया था।
हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
आयोग के सचिव के अनुसार हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई सितंबर महीने में निर्धारित की गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 मिनट पहले

जूनियर इंजीनियर भर्ती परीक्षा के परिणामों में देरी का यह मामला केवल प्रशासनिक सुस्ती का नहीं, बल्कि रोजगार और शासन की प्राथमिकताओं पर गहरे सवाल खड़े करता है। 30 हजार से अधिक युवाओं का चार महीने से अधिक समय तक नतीजों के लिए सड़कों पर उतरना यह दर्शाता है कि चयन आयोगों और शासन के बीच संवादहीनता कितनी गंभीर हो चुकी है। डिप्टी सीएम का हस्तक्षेप तात्कालिक राहत जरूर दे सकता है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय किए बिना इस तरह के संकट बार-बार उभरते रहेंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·2 मिनट पहले

यह गतिरोध सिर्फ एक प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि युवाओं के आर्थिक भविष्य और राज्य की रोजगार क्षमता पर सीधा आघात है। जब हजारों प्रशिक्षित इंजीनियरों को परिणामों के लिए संघर्ष करना पड़ता है, तो इससे न केवल उनका मनोबल गिरता है बल्कि राज्य की उत्पादकता और निवेश के माहौल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि चयन प्रक्रिया में डिजिटल पारदर्शिता और निश्चित समय-सीमा लागू नहीं की गई, तो यह असंतोष भविष्य में बड़े आर्थिक और सामाजिक संकट का रूप ले सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में चयन आयोगों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। तीन दशक से अधिक युवाओं का चार महीने से अधिक समय तक परीक्षा परिणाम के लिए सड़कों पर उतरना इस बात का संकेत है कि शासन और भर्ती एजेंसियों के बीच संवादहीनता बढ़ रही है। यदि आयोग ने मार्च 2024 की इस 4,612 पदों वाली प्रक्रिया में समय पर पारदर्शिता नहीं बरती, तो आगामी चुनावों और युवाओं के बीच यह नाराजगी राज्य सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह प्रशासनिक तंत्र और अर्ध-न्यायिक भर्तियों के बीच बढ़ते गतिरोध का स्पष्ट उदाहरण है। जब तीस हजार से अधिक अभ्यर्थी चार महीने तक परिणाम के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हों, तो यह सीधे तौर पर सार्वजनिक व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय की विफलता को दर्शाता है। आयोग की इस कार्यशैली से न केवल न्यायिक मामलों में उलझने की आशंका बढ़ जाती है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा और विधि-व्यवस्था के मोर्चे पर भी एक संवेदनशील स्थिति पैदा करता है।

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