सरकारी नौकरी की आस लेकर कानपुर पहुंचे युवाओं का गुस्सा गुरुवार की रात रिजर्व पुलिस लाइन परिसर में अचानक भड़क उठा। होमगार्ड के पदों के लिए चल रही चयन प्रक्रिया के दौरान मेडिकल टेस्ट में गंभीर धांधली के आरोप लगाए गए। अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्हें जानबूझकर छोटी-छोटी कमियां बताकर बाहर किया जा रहा है। हालात इतने बिगड़े कि प्रदर्शनकारियों ने मौके पर मौजूद एक कार से एक युवक को बाहर खींचकर उसकी पिटाई कर दी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और फौरन वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा।
मेडिकल परीक्षा में अनफिट करने का गंभीर आरोप
गुरुवार को रिजर्व पुलिस लाइन के मैदान में लगभग 200 अभ्यर्थी अपने मेडिकल परीक्षण के लिए एकत्रित हुए थे। जांच प्रक्रिया शुरू होने के कुछ समय बाद ही वहां मौजूद युवाओं ने मेडिकल प्रणाली पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षण के दौरान उन्हें कभी नाक की हड्डी टेढ़ी होने तो कभी आंखों की कमजोर रोशनी का हवाला देकर अनफिट घोषित किया जा रहा था। युवाओं का दावा है कि प्रक्रिया के नाम पर उनसे 15 हजार से 50 हजार रुपये तक की मांग की जा रही थी। जो लोग पैसे देने में असमर्थ थे या जिन्होंने मना कर दिया, उन्हें मेडिकल में असफल कर दिया गया। अभ्यर्थियों के मुताबिक इस तरह करीब 70 लोगों को अनफिट करार दिया गया था, हालांकि इन सभी दावों की सत्यता जांच के बाद ही पूरी तरह सामने आ सकेगी।
पर्ची पर नंबर और कथित वसूली का खेल
वसूली के इस कथित खेल को लेकर युवाओं ने कई खुलासे किए हैं। उनका कहना था कि मेडिकल जांच के दौरान कुछ खास पर्चियों पर मोबाइल नंबर लिखकर थमाए जा रहे थे और उन नंबरों पर संपर्क करने का निर्देश दिया जा रहा था। अभ्यर्थियों के अनुसार पुलिस लाइन परिसर के एक कोने में खड़ी कार में डॉक्टर प्रवीण का एक परिचित व्यक्ति बैठा हुआ था, जिसकी भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में संदिग्ध बताई जा रही है। युवाओं का दावा है कि रकम चुकाने के बाद ही कथित तौर पर फिटनेस की हरी झंडी दी जा रही थी। हालांकि इन तमाम आरोपों में किस स्तर तक सच्चाई है और वास्तव में कितने लोगों से पैसे वसूले गए, इस बात की पुष्टि अभी पुलिस जांच के दायरे में है।
रात आठ बजे उग्र हुआ प्रदर्शन और मारपीट
मेडिकल परीक्षण में बरती जा रही कथित अनियमितताओं को लेकर रोष लगातार बढ़ता गया और गुरुवार रात लगभग आठ बजे यह गुस्सा खुलकर बाहर आ गया। आक्रोशित भीड़ ने डॉक्टर की गाड़ी के पास पहुंचकर उसमें बैठे एक युवक को बाहर खींच लिया और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद पूरे पुलिस लाइन परिसर में नारेबाजी का दौर शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता की जांच कराई जाए और कथित रिश्वतखोरी में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए एसीपी कोतवाली अमित कुमार पांडेय और एसीपी कर्नलगंज अंजना दहिया समेत कई बड़े पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और नाराज युवाओं को शांत कराने का प्रयास किया।
25 अभ्यर्थियों द्वारा रकम देने का दावा
पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की जा रही है क्योंकि कई अभ्यर्थियों ने यह दावा भी किया है कि उनमें से लगभग 25 लोगों ने मेडिकल में पास होने के एवज में पैसे दिए थे। वहीं कुछ अन्य युवाओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उनसे भी रकम की मांग की गई थी लेकिन उन्होंने देने से इनकार कर दिया था। इन विरोधाभासी बयानों और गंभीर आरोपों के कारण पुलिस के लिए यह पता लगाना बेहद जरूरी हो गया है कि वास्तव में यह लेनदेन हुआ था या नहीं। यदि यह बात सच साबित होती है, तो इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे, इसका खुलासा भी जांच के बाद ही हो पाएगा।
डॉक्टर प्रवीण समेत दो लोग हिरासत में
इस पूरी घटना की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डॉक्टर प्रवीण समेत कुल दो लोगों को अपनी हिरासत में ले लिया है। दोनों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि मेडिकल परीक्षा के तौर-तरीकों, युवाओं को अनफिट ठहराने के आधार और पैसों के लेनदेन से जुड़े तमाम पहलुओं की सच्चाई का पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी केवल आरोप सामने आए हैं और किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि पूरी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही की जाएगी।



















