देश के अलग-अलग शहरों में महीनों से एक चोर गिरोह सक्रिय था, जो हर बार सिर्फ एक ही ज्वैलरी ब्रांड के शोरूम को निशाना बनाता था। दिल्ली और गाजियाबाद में वारदातें करने के बाद इस गिरोह ने आगरा का रुख किया, लेकिन इस बार पुलिस ने चालाकी से इन्हें दबोच लिया। जांच में सामने आया कि इस गिरोह के पास शोरूमों की तिजोरी खोलने का खास तरीका था, जिसकी वजह से यह हर बार एक ही कंपनी को निशाना बनाते थे।
आगरा में यूं हुआ खुलासा
8 जुलाई को थाना ताजगंज क्षेत्र के फतेहाबाद रोड पर स्थित जीवा (GIVA) ज्वैलरी शोरूम से चोरी की सूचना मिली थी। शोरूम मैनेजर ने पुलिस को बताया कि दुकान में रखे सोने चांदी के आभूषण और लाखों रुपए की नगदी गायब है। शिकायत मिलते ही पुलिस ने आसपास लगे कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की, जिसमें चोर कैद हो गए। इसी फुटेज के आधार पर जांच आगे बढ़ी और आखिरकार गिरोह के 5 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया।
सिर्फ एक ही कंपनी को निशाना क्यों बनाते थे
पूछताछ में इन चोरों ने बड़ा राज खोला। इन्होंने बताया कि जीवा ज्वैलरी कंपनी अपने आभूषणों की एक्जीविशन देश के अलग अलग जिलों में लगाती है और उसके बाद वही आभूषण शोरूम में रख दिए जाते हैं। खास बात यह थी कि कंपनी के हर शोरूम में एक जैसी तिजोरी इस्तेमाल होती थी और गिरोह के सदस्यों को उस तिजोरी को खोलने का तरीका पहले से मालूम था। यही वजह थी कि यह गिरोह देश में सिर्फ जीवा ज्वैलरी के शोरूमों को ही निशाना बनाता था, ताकि हर बार वही तरीका इस्तेमाल कर आसानी से आभूषण चुरा सकें।
रेकी से फरारी तक का पूरा तरीका
वारदात से पहले गिरोह के कुछ सदस्य शोरूम के बाहर खड़े होकर रेकी करते थे। अगर कोई अचानक शोरूम की तरफ आता दिखे, तो यह बाहर खड़े साथी अंदर मौजूद अपने साथियों को इशारा कर देते थे। आगरा में भी यही तरीका अपनाया गया और गिरोह लाखों रुपए के सोने चांदी के आभूषण और भारी नगदी लेकर फरार हो गया। आगरा को निशाना बनाने से पहले यह गिरोह दिल्ली के रोहिणी और प्रीत विहार में स्थित जीवा शोरूम के अलावा गाजियाबाद के जीवा शोरूम में भी चोरी कर चुका था।
नेपाल सीमा से जुड़े तार, डीसीपी ने बताई पूरी कहानी
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि पकड़े गए शातिर नेपाल की सीमा के पास बिहार के एक गांव के रहने वाले हैं और उसी गांव के ज्यादातर लोगों ने मिलकर यह चोरी गिरोह बना रखा था। उन्होंने बताया कि चोरी से पहले गिरोह का एक सदस्य पहुंचकर 2 से 3 दिन तक रेकी करता था, उसके बाद ही बाकी साथियों को बुलाया जाता था। वारदात को अंजाम देने के लिए यह शातिर ट्रेन से शहर में पहुंचते थे, लेकिन चोरी करने के बाद बस पकड़कर फरार हो जाते थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि फरारी के दौरान यह अलग अलग जिलों में जाकर बस भी बदल देते थे, ताकि पुलिस उनका पीछा न कर सके।
धुंधली सीसीटीवी फुटेज को AI तकनीक ने बनाया सुराग
आगरा पुलिस को जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज तो मिल गई थी, जिसमें चोर साफ कैद हुए थे, लेकिन तस्वीर इतनी धुंधली थी कि चेहरे ठीक से पहचान में नहीं आ रहे थे। इसके बाद पुलिस ने डिजिटल और AI तकनीक की मदद ली और उसी फुटेज के आधार पर चोरों के चेहरे तैयार कराए। इसके बाद अलग अलग टीमें बनाकर तलाश शुरू की गई और आखिरकार गिरोह के 5 शातिर सदस्य गिरफ्तार कर लिए गए।
आरोपियों से क्या-क्या हुआ बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से लाखों रुपए के सोने चांदी के आभूषण, 1.18 लाख रुपए नकद, 35 हजार नेपाली करेंसी, 6 मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद किए हैं। पूछताछ में यह भी पता चला कि यह गिरोह चोरी की ज्वैलरी को नेपाल ले जाकर बेच देता था। जो आभूषण बच जाते थे, उन्हें गिरोह के सदस्य देश के अलग अलग शहरों में गलवाकर बेच देते थे, ताकि आभूषणों की असली पहचान मिट जाए और पुलिस तक कोई सुराग न पहुंचे। फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया है।




















