दक्षिण गुजरात के इलाकों में मानसून ने एक बार फिर से अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने सूरत और वलसाड जैसे प्रमुख शहरों को जलमग्न कर दिया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि मौसम विभाग को सूरत शहर के लिए विशेष चेतावनी जारी करनी पड़ी है। ऊपरी इलाकों से आ रहे भारी पानी और थमने का नाम नहीं ले रही बारिश ने शहर के ड्रेनेज सिस्टम की पूरी तरह से पोल खोल कर रख दी है, जिससे हर तरफ जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है और आम लोगों का घरों से निकलना मुहाल हो गया है।
सूरत में आईएमडी का रेड अलर्ट और आधी रात का खौफ
बाढ़ के खतरे को देखते हुए मौसम विभाग (आईएमडी) ने सूरत के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि बुधवार रात 11 बजे से लेकर सुबह 4 बजे तक शहर में अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। इस रेड अलर्ट के बाद स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। प्रशासन की तरफ से नागरिकों से विशेष अपील की गई है कि वे रात के समय किसी भी अनावश्यक काम के लिए अपने घरों से बाहर न निकलें और पूरी तरह से सतर्क रहें। लगातार गिरते पानी और प्रशासन की चेतावनियों के कारण लोगों में दहशत का माहौल है और अधिकारी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।
खतरे के निशान के पार बह रही खाड़ियां
सूरत शहर से गुजरने वाली पांच प्रमुख खाड़ियों का जलस्तर इस भीषण बारिश के कारण तेजी से बढ़ा है और ये सभी अपने खतरे के निशान को छू रही हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति भेड़वाड़ खाड़ी की है, जो खतरे के निशान को पार करके उफान पर बह रही है। जलस्तर बढ़ने की वजह से उधना इलाके के संजय नगर में बाढ़ का पानी घुसने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लाउडस्पीकर के जरिए मुनादी करानी शुरू कर दी है, जिसमें लोगों से तुरंत अपने घर खाली करके महानगरपालिका द्वारा बनाए गए सुरक्षित राहत शिविरों में जाने की गुहार लगाई गई है। इस खौफनाक मंजर ने लोगों के जहन में 7 जुलाई को आई भयंकर खाड़ी बाढ़ की डरावनी यादें ताजा कर दी हैं।
करोड़ों के प्री-मानसून दावों पर उठे सवाल
शहर के हालात को देखकर स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष पनप रहा है। नागरिकों का सीधा आरोप है कि सूरत महानगरपालिका हर साल मानसून से पहले तैयारियों और ड्रेनेज की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। महज 4 इंच की बारिश में ही शहर की सभी खाड़ियां ओवरफ्लो होने लगी हैं। लोगों का कहना है कि पहले कभी इतनी आसानी से खाड़ियों का पानी बाहर नहीं आता था, लेकिन अब खाड़ियों के आसपास बनी बहुमंजिला इमारतों और बेतरतीब निर्माण कार्यों की वजह से पानी का प्राकृतिक बहाव रुक गया है, जिससे यह खतरनाक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो रही है।
वलसाड में भारी तबाही: 10 घंटे में 243 मिमी बारिश
दक्षिण गुजरात के वलसाड जिले में भी बारिश ने भारी तबाही मचाई है और जनजीवन को पूरी तरह से रोक दिया है। गांधीनगर स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, वलसाड शहर में बुधवार सुबह 6 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक, यानी सिर्फ 10 घंटे के भीतर 243 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इस भयानक बारिश के चलते शहर के कई निचले इलाकों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी भर गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जिले के सभी स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों में एहतियात के तौर पर छुट्टी घोषित कर दी है। इसके अलावा, बाढ़ के पानी के कारण जिले भर की 325 से अधिक सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह से बंद कर दी गई हैं, जिससे लोगों का संपर्क टूट गया है।
200 लोगों को सुरक्षित निकाला गया और आगे का अलर्ट
वलसाड शहर से गुजरने वाली औरंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से इसके किनारे बसे कश्मीर नगर जैसे निचले रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया। इसके बाद अधिकारियों ने फौरन कार्रवाई करते हुए कम से कम 200 प्रभावित लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। राहत और बचाव कार्य को तेज करने के लिए वलसाड में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की एक-एक टीम को तैनात किया गया है। वहीं, मौसम विभाग का अनुमान है कि गुरुवार को भी उत्तरी गुजरात के कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। गौरतलब है कि सूरत में हाल ही में हुई बारिश ने एक बड़ा हादसा भी देखा था। शहर की महावीर सोसायटी में छठ पूजा के लिए एक बड़ा गड्ढा खोदा गया था, जिसमें डूबने से दो छोटी बच्चियों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।



















