उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक संतुलन को साधते हुए अपनी नई प्रदेश कार्यसमिति का ऐलान किया है। इस बार गठित की गई कार्यसमिति पार्टी के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी इकाई बनकर सामने आई है। संगठन की इस विशाल सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कुल 30 नेताओं को स्थायी आमंत्रित सदस्य का दर्जा दिया गया है। इसके अलावा 134 नेताओं को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। सूची का एक उल्लेखनीय पहलू यह भी है कि 92 वर्ष के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी को भी प्रदेश कार्यसमिति में स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।
तीन श्रेणियों में बंटे 712 नेताओं का संगठनात्मक ढांचा
भाजपा की ओर से जारी प्रदेश कार्यसमिति-2026 की सूची प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के माध्यम से सामने आई है। इस पूरी सूची में तीन अलग-अलग स्तरों पर कुल 712 पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें 30 स्थायी आमंत्रित सदस्य, 134 विशेष आमंत्रित सदस्य तथा 548 नियमित प्रदेश कार्यसमिति सदस्य शामिल हैं। संगठन ने क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों के साथ-साथ असंतोष थामने के संकेत भी दिए हैं। दातागंज के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य, जिन्होंने सोमवार की सुबह समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली थी, उन्हें शाम को भाजपा ने प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य घोषित कर दिया। इसी क्रम में पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट चल रहे कौशल किशोर को भी कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि उनकी पार्टी अपना जन-मन का घोषणापत्र कब सार्वजनिक करेगी।
लखनऊ में 30 अक्टूबर को मंथन, अमित शाह की मौजूदगी अहम
भाजपा की इस नवगठित प्रदेश कार्यसमिति की पहली औपचारिक बैठक 30 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित होने जा रही है। इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे। मुख्य बैठक से ठीक एक दिन पहले उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रमुख पदाधिकारियों का एक अलग सत्र भी बुलाया गया है। राज्य में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की दृष्टि से इस सांगठनिक जमावड़े और अमित शाह की सीधी सक्रियता को बेहद रणनीतिक माना जा रहा है।
2027 के विधानसभा चुनाव और राजनीतिक पृष्ठभूमि
साल 2013 में अमित शाह को उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रभारी बनाया गया था, जिसके बाद 2014 के आम चुनाव में पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 सीटों पर ऐतिहासिक विजय प्राप्त की थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लगा, जहां विपक्षी इंडिया गठबंधन ने 80 में से 43 सीटों पर जीत दर्ज की। उस दौरान अखिलेश यादव का पीडीए फॉर्मूला कारगर साबित हुआ, जिससे भाजपा को दलित और पिछड़े वर्ग के मतों में क्षति उठानी पड़ी। साथ ही कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और बूथ प्रबंधन की कमजोरियों को भी उस हार की मुख्य वजह माना गया था। अब उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य को साधने के लिए भाजपा अपनी हर संगठनात्मक खामी को दूर करने में जुटी है।


















