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ग्रेटर नोएडा में जाली नोट गिरोह का पर्दाफाश, अलीगढ़ के तीन तस्कर 2.54 लाख रुपये के साथ गिरफ्तारउत्तर प्रदेश
6 अक्तू॰ 2026, 6:05 pm (1 घंटे पहले)· 0

ग्रेटर नोएडा में जाली नोट गिरोह का पर्दाफाश, अलीगढ़ के तीन तस्कर 2.54 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा में पुलिस और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप ने 100 रुपये के 2,549 जाली नोटों के साथ तीन लोगों को दबोचा, जो रील देखकर नकली मुद्रा तैयार कर रहे थे।

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में पुलिस और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप की संयुक्त कार्रवाई में नकली मुद्रा छापने और उसे बाजार में खपाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। ईकोटेक 1 थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के दौरान तीन लोगों को रंगे हाथ पकड़ा गया। पकड़े गए व्यक्तियों के कब्जे से 100-100 रुपये मूल्यवर्ग के कुल 2,549 जाली नोट बरामद किए गए हैं, जिनका कुल अंकित मूल्य 2,54,900 रुपये है। नकदी के अलावा मौके से नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला प्रिंटर, कागज काटने वाली विशेष मशीन, चार मोबाइल फोन, एक स्कॉर्पियो कार, पहचान पत्र तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।

सिरसा गोल चक्कर पर तलाशी के दौरान पकड़ी गई गाड़ी

सोमवार रात को सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस और एसओजी की टीम सिरसा गोल चक्कर के पास सघन वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। उसी समय एक संदिग्ध स्कॉर्पियो कार वहां पहुंची, जिसे टीम ने रुकने का इशारा किया। गाड़ी में सवार तीनों व्यक्तियों की गतिविधियों पर संदेह होने पर जब वाहन और उनकी गहन तलाशी ली गई, तो भारी मात्रा में 100 रुपये के नोट बरामद हुए। इन नोटों की बारीकी से जांच करने पर पता चला कि सभी जाली नोटों पर एक ही सीरियल नंबर अंकित था। तीनों आरोपी इन नोटों की खेप को खुले बाजार में चलाने और बेचने के इरादे से ले जा रहे थे।

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गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान बन्टी अत्री, खुशदिल और उपेंद्र कुमार के तौर पर की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, ये तीनों व्यक्ति अलीगढ़ जिले के अलग-अलग गांवों के निवासी हैं और लंबे समय से इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।

प्रिंटर और केनरा बैंक की पर्चियों से ऐसे बनाते थे गड्डियां

नकली नोट बनाने के तरीके का ब्योरा देते हुए एडीसीपी अभय मिश्रा ने बताया कि आरोपी पहले 100 रुपये के एक असली नोट को उच्च गुणवत्ता पर स्कैन करते थे। इसके बाद कंप्यूटर और प्रिंटर की मदद से उसी समान सीरियल नंबर वाले दर्जनों जाली नोट कागजों पर प्रिंट किए जाते थे। प्रिंटिंग पूरी होने के बाद नोटों को सटीक आकार देने के लिए कटिंग मशीन का उपयोग किया जाता था।

बाजार में लोगों को धोखा देने के लिए गिरोह बेहद चालाकी से गड्डियां तैयार करता था। आरोपी 100 रुपये की जाली नोटों की गड्डी के सबसे ऊपर और सबसे नीचे असली नोट लगाते थे ताकि पहली नजर में किसी को शक न हो। इसके साथ ही बैंक से निकली असली गड्डी जैसा रूप देने के लिए गड्डी के दोनों सिरों पर केनरा बैंक के डिपॉजिट फॉर्म रखकर उन पर रबर बैंड चढ़ा दिया जाता था। इस पैकिंग के कारण सामान्य दुकानदार या व्यापारी नोटों की असलियत तुरंत नहीं पहचान पाते थे।

सोशल मीडिया की रील से सीखा तरीका, लागत आती थी 15 रुपये

पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने नकली नोट छापने की यह पूरी तकनीक इंस्टाग्राम पर वीडियो रील देखकर सीखी थी। आरोपी पिछले करीब 3 महीने से लगातार इस गोरखधंधे में सक्रिय थे। गिरोह के अनुसार, 100 रुपये का एक जाली नोट प्रिंट करने, काटने और तैयार करने में लगभग 15 रुपये का खर्च आता था। आरोपी इस कम लागत पर नोट तैयार कर बाजार में कई लोगों को जाली करेंसी थमाकर भारी चपत लगा चुके हैं। पुलिस अब इस बात की छानबीन कर रही है कि इन आरोपियों ने पिछले तीन महीनों में किन-किन बाजारों और व्यापारियों तक यह जाली करेंसी पहुंचाई है।

सवाल-जवाब

ग्रेटर नोएडा में कुल कितने मूल्य के जाली नोट पकड़े गए?
पुलिस ने 100-100 रुपये के कुल 2,549 जाली नोट बरामद किए, जिनका कुल मूल्य 2,54,900 रुपये है।
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी कहां के रहने वाले हैं?
गिरफ्तार आरोपी बन्टी अत्री, खुशदिल और उपेंद्र कुमार उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के अलग-अलग गांवों के निवासी हैं।
आरोपियों ने नकली नोट बनाना कहां से सीखा था?
पूछताछ के अनुसार आरोपियों ने इंस्टाग्राम की रील देखकर नकली नोट छापने का तरीका सीखा था।
100 रुपये का एक नकली नोट तैयार करने में कितनी लागत आती थी?
आरोपियों के अनुसार 100 रुपये का एक जाली नोट तैयार करने में लगभग 15 रुपये का खर्च आता था।
आरोपियों के पास से क्या-क्या सामान बरामद हुआ?
पुलिस ने नोट छापने वाला प्रिंटर, कटिंग मशीन, चार मोबाइल फोन, एक स्कॉर्पियो कार, आईडी कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए।
नकली नोटों की गड्डी को असली जैसा दिखाने के लिए आरोपी क्या करते थे?
वे गड्डी के ऊपर-नीचे असली नोट लगाते थे और दोनों सिरों पर केनरा बैंक के डिपॉजिट फॉर्म रबर बैंड से जोड़ देते थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·30 मिनट पहले

रील देखकर जाली नोट छापने लगे, कमाल है! अब सोशल मीडिया का यह इस्तेमाल कौन सोचता।

Ravikash Gupta@ravikash·30 मिनट पहले

अरे अर्जुन भाई, बात सिर्फ रील देखने की नहीं है। इतनी आसानी से कोई मशीन और बैंक की पर्चियां कैसे ले आया, कुछ तो गड़बड़ लगती है।

Rohan Verma@rohan-verma·52 मिनट पहले

अलीगढ़ से आकर ग्रेटर नोएडा में इंस्टाग्राम की रील देखकर नोट छापने लगे थे। सौ-सौ के नोटों के बीच में असली रखकर बैंक की पर्ची लगानी गजब चालाकी थी, पर पुलिस ने धर लिया।

Karan Malhotra@karan-malhotra·52 मिनट पहले

रोहन भाई, बात तो सही है पर मुझे लगता है सिर्फ इंस्टाग्राम रील देखकर इतना सब करना थोड़ा मुश्किल है। शायद पहले से कुछ और भी जानते होंगे ये लोग।

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