चार राज्यों में एक लोकसभा और पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया पूरी हुई, जहां मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर मतदान केंद्रों का रुख किया। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में हुई वोटिंग को लेकर खासा राजनीतिक शोर सुनाई दिया। इस सियासी हलचल के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनावी दृश्य से पूरी तरह दूर रहीं, जबकि कांग्रेस के साथ-साथ खुद को बंगाल का ओवैसी बताने वाले नेता हुमायूं कबीर ने मतदान में गड़बड़ी और वोट लूट के आरोप लगाते हुए दोबारा चुनाव कराने की मांग उठाई। उधर दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला करने का दावा कर रहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस चुनावी तालमेल को लेकर आपसी खींचतान में उलझी नजर आ रही हैं। दिल्ली में भी राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के घटक दल वोट चोरी के आरोपों को लेकर लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में असदुद्दीन ओवैसी की 200 सीटों पर तैयारी
विपक्षी दलों के इस आंतरिक गतिरोध के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी रणनीति को नई धार देनी शुरू कर दी है। राज्यसभा चुनाव के घटनाक्रम के बाद अखिलेश यादव पहले से ही दबाव में दिखाई दे रहे थे, और अब ओवैसी की इस नई तैयारी ने समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। दरअसल असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सामने गठबंधन को लेकर जो समय सीमा रखी थी, वह 2 अक्टूबर को समाप्त हो चुकी है। उस मियाद के बीत जाने के बाद अब उनकी पार्टी ने राज्य में अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरने का खाका खींचा है।
तैयार की गई रणनीति के मुताबिक, असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश की कम से कम 200 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की योजना बना रहे हैं। इन 200 सीटों में से करीब 100 सीटें ऐसी हैं जो मुस्लिम बहुल आबादी वाले क्षेत्रों में आती हैं। इस कदम का सीधा असर उन इलाकों के पारंपरिक वोट समीकरणों पर पड़ सकता है, जहां समाजवादी पार्टी अपनी मजबूत पकड़ का दावा करती रही है।
टिकट से वंचित नेताओं पर नजर और गठबंधन की नई पेशकश
असदुद्दीन ओवैसी का इरादा उन मुस्लिम चेहरों को अपनी पार्टी का टिकट थमाने का है, जिन्हें समाजवादी पार्टी की तरफ से दरकिनार किया जाएगा या जिनका टिकट अखिलेश यादव काटेंगे। ऐसे असंतुष्ट नेताओं को अपने पाले में लाकर मजलिस चुनावी लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में है। हालांकि इस व्यापक चुनावी तैयारी के बीच ओवैसी ने एक बार फिर अखिलेश यादव के सामने गठबंधन का विकल्प खुला रखा है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह चेतावनी भी दी है कि उनके इस समझौते के प्रस्ताव को किसी भी रूप में उनकी कमजोरी समझने की भूल न की जाए।
श्रावस्ती की रैली में इंस्टाग्राम टिप्पणियों पर तंज
श्रावस्ती में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने अपने चिरपरिचित अंदाज में विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर आने वाले कमेंट्स का उल्लेख करते हुए खुद को 'बीवी पगलू' करार दिया। ओवैसी ने इस टिप्पणी का सहारा लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तीखे राजनीतिक हमले किए।
जनसभा में मौजूद समर्थकों से मुखातिब होते हुए ओवैसी ने कहा कि इंस्टाग्राम पर लोग उनसे अक्सर कहते हैं कि वह अपनी पत्नी के बारे में बहुत ज्यादा बात करते हैं। ओवैसी ने कहा कि किसी ने लिखा कि ओवैसी बीवी पगलू हो चुके हैं। इस पर उन्होंने मंच से ही लोगों से पूछा कि यहां कितने लोगों की शादी हो चुकी है, वे हाथ उठाएं। इसके बाद उन्होंने कहा, "हम यकीनन बीवी पगलू हैं और हम यह बात फख्र से कहते हैं।" उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि वे खुद अपनी पत्नी के लिए पगलू भले हों, लेकिन वे मोदी, बाबा और अखिलेश की तरह उत्तर प्रदेश और पूरे देश की जनता को पगलू नहीं बनाते हैं।
























