ग्राहकों तक ऑनलाइन माध्यमों से पहुंचने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को जांचने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के मकसद से उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (यूपीएफएसडीए) ने पूरे राज्य में एक विशेष निरीक्षण अभियान की शुरुआत की है। इस प्रदेशव्यापी अभियान के तहत विभिन्न ई-कॉमर्स कंपनियों से जुड़े वेयरहाउस, डार्क स्टोर्स और खाद्य सामग्री आपूर्ति केंद्रों पर ताबड़तोड़ छापे मारे जा रहे हैं। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाला हर एक खाद्य उत्पाद पूरी तरह से सुरक्षित और तय मानकों के अनुरूप हो।
चार प्रमुख स्टोर्स के लाइसेंस निलंबित और कारोबार बंद
‘शुद्ध ही शुभ है’ नाम से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत अब तक की कार्रवाई में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन न करने पर चार अलग-अलग स्टोर्स के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं और उनके खाद्य कारोबार का संचालन पूरी तरह बंद करा दिया गया है। इसके साथ ही, इस दौरान कुल 149 निरीक्षण किए जा चुके हैं और गुणवत्ता की जांच के लिए 21 खाद्य नमूने एकत्र किए गए हैं। विभाग की टीमों द्वारा 79 मामलों में सुधार सूचना यानी इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी करने की संस्तुति भी की गई है। निरीक्षण के दौरान खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण, परिसर की साफ-सफाई, तापमान नियंत्रण, उत्पादों की वैधता अवधि और लाइसेंस की शर्तों की बहुत बारीकी से जांच की जा रही है।
गाजियाबाद के वेयरहाउस में मिली भारी गंदगी और कॉकरोच
गाजियाबाद में आरडीएल के निकट स्थित एक वेयरहाउस स्टोर की जब अधिकारियों ने जांच की, तो वहां हालात बेहद चिंताजनक मिले। निरीक्षण के दौरान पूरे परिसर में भारी गंदगी फैली हुई थी, दीवारों पर जाले लगे थे, फर्श पूरी तरह क्षतिग्रस्त था और सबसे गंभीर बात यह है कि खाद्य सामग्री रखे जाने वाले परिसर में कॉकरोच घूमते हुए पाए गए। खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े इन गंभीर उल्लंघनों को देखते हुए प्रतिष्ठान के खाद्य लाइसेंस को निलंबित करने की सख्त कार्रवाई की जा रही है। वेयरहाउस और डार्क स्टोर्स में स्वच्छता का उच्च स्तर बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यहीं से खाद्य पदार्थों का रखरखाव होता है और ग्राहकों के ऑर्डर्स के मुताबिक उनकी आपूर्ति तैयार की जाती है। ऐसे स्थानों पर गंदगी और कीटों का पाया जाना सीधे तौर पर खाद्य सामग्री की सुरक्षा को खतरे में डालता है।
कानपुर में भंडारण और लाइसेंस से जुड़ी बड़ी खामियां
कानपुर नगर में भी स्टोर्स की जांच के दौरान कई तरह की अनियमितताएं प्रकाश में आई हैं। जांच में पता चला कि संबंधित प्रतिष्ठानों के लाइसेंस में कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर और कोल्ड स्टोरेज व्यवस्था होने का प्रावधान तो दर्ज था, लेकिन मौके पर अपेक्षित चैंबर स्थापित ही नहीं किए गए थे। इसके अलावा, लाइसेंस में नामित नॉमिनी द्वारा लगभग दो साल पहले ही अपने पद से इस्तीफा दिए जाने के बावजूद उनका नाम कागजों में दर्ज पाया गया। कुछ कन्फेक्शनरी उत्पादों के मामले में बेस्ट बिफोर अवधि से जुड़ी निर्धारित 30 प्रतिशत सीमा के उल्लंघन का मामला भी सामने आया। इन तमाम कमियों को आधार बनाते हुए संबंधित प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं और जब तक सभी कमियों को दूर नहीं कर लिया जाता, तब तक उनका खाद्य कारोबार बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।
आगरा में हजारों रुपये के मखाने के पैकेट सीज
आगरा जिले में अधिकारियों ने जब एक स्टोर का औचक निरीक्षण किया, तो वहां से बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पकड़ी गईं। इस दौरान टीम ने मखाने के कुल 273 पैकेटों को पूरी तरह सीज कर दिया। इन सीज किए गए पैकेटों की कुल अनुमानित कीमत लगभग 68 हजार रुपये बताई जा रही है। जब्त किए गए इस खाद्य उत्पाद के संबंध में विभाग की तरफ से नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
भंडारण से लेकर डिलीवरी तक हर स्तर पर कड़ी निगरानी
इस विशेष अभियान के दायरे में खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण से लेकर उनकी डिलीवरी तक का पूरा चक्र शामिल है। टीमें इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही हैं कि खाद्य सामग्री को सही तापमान पर रखा जा रहा है या नहीं और क्या जरूरत के हिसाब से कोल्ड चेन मेंटेन की जा रही है या नहीं। इसके साथ ही, खाद्य सामग्रियों की खरीद और उनकी आगे की सप्लाई से जुड़े बिल-वाउचर और अन्य जरूरी अभिलेखों की भी दस्तावेजों के साथ मिलान किया जा रहा है। खाद्य कारोबार में सीधे तौर पर जुड़े कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, उनके स्वास्थ्य से जुड़े रिकॉर्ड और जरूरी प्रशिक्षण के दस्तावेजों को भी जांचा जा रहा है। विभाग की टीमें पेस्ट कंट्रोल की व्यवस्था और उसके रख-रखाव के रिकॉर्ड की भी पूरी जांच कर रही हैं।
पैकेजिंग और एक्सपायरी डेट पर विशेष नजर
निरीक्षण अभियान के दौरान खाद्य पदार्थों की बेस्ट बिफोर अवधि की बहुत गहराई से जांच की जा रही है। अभियान के तहत तय किए गए मानकों के मुताबिक 30 प्रतिशत और 45 दिन की सीमा से जुड़े प्रावधानों का ठीक से पालन हो रहा है या नहीं, इसे भी परखा जा रहा है। कन्फेक्शनरी उत्पादों में बेस्ट बिफोर अवधि से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आने के बाद अधिकारी इस पहलू पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इसके अलावा, खाद्य पदार्थों की पैकिंग, उनकी हैंडलिंग और ग्राहकों तक सामान पहुंचाने वाले डिलीवरी कर्मचारियों से जुड़े विवरणों की भी जांच की जा रही है। उपकरणों की साफ-सफाई और क्लीनिंग इन प्लेस यानी सीआईपी व्यवस्था की स्थिति भी देखी जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाली सतहें पूरी तरह से साफ और सुरक्षित हैं। इससे पहले भी यूपी के कई अन्य शहरों में रेस्टोरेंट्स पर खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा छापे मारे जा चुके हैं, जिनमें गाजियाबाद में गंदगी के बीच बन रही सोया चाप को नष्ट करने की कार्रवाई भी शामिल है।



















