उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कलेक्ट्रेट परिसर से जुड़ा एक मामला इन दिनों सुर्खियों में है। यहां प्रशासन ने कुछ समय पहले परिसर में बनी एक अवैध मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था और जब मलबा हटाया गया तो जमीन के नीचे एक पुराना कुआं नजर आया। इस कुएं ने पूरे इलाके में नई बहस छेड़ दी है और अब इसकी उम्र पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI की टीम मौके पर पहुंच चुकी है।
क्या है पूरा विवाद
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद मस्जिद को प्रशासन ने अवैध बताते हुए हटाने की कार्रवाई की थी। इस कदम को लेकर विवाद अब तक थमा नहीं है और स्थानीय स्तर पर इस पर लगातार चर्चा हो रही है। ध्वस्तीकरण के दौरान जब जमीन खोदी गई तो वहां एक ढांचा सामने आया, जो देखने में पुराने कुएं जैसा लगा। यह ढांचा सामने आते ही लोगों के बीच इसकी उम्र और असली पहचान को लेकर उत्सुकता बढ़ गई, जिसके बाद प्रशासन ने इसकी जांच कराने का फैसला लिया।
सीढ़ी के सहारे अंदर उतरी ASI टीम
सोमवार को ASI की एक टीम कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंची और कुएं जैसी दिखने वाली इस संरचना की प्राथमिक जांच शुरू की। जांच के लिए टीम के अधिकारी सीढ़ी के सहारे संरचना के भीतर उतरे और वहां की बनावट को करीब से परखा। इस पूरी प्रक्रिया की अगुवाई ASI अधिकारी मनोज कुमार यादव ने की। निरीक्षण पूरा होने के बाद उन्होंने मौके पर मौजूद मीडिया को इसकी शुरुआती जानकारी दी।
200 से 300 साल पुराना बताया गया ढांचा
मनोज कुमार यादव ने बताया कि यह संरचना देखने में करीब 200 से 300 साल पुरानी लगती है, यानी इसका निर्माण मस्जिद बनने से भी पहले हुआ होगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इस तरह की पुरानी संरचनाएं मिलना कोई असामान्य बात नहीं है और इलाके में अन्य जगहों पर भी ऐसे ढांचे मौजूद हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह पक्के तौर पर अभी नहीं कहा जा सकता कि यह ढांचा असल में कुआं ही है या कुछ और। उनके मुताबिक यह ढांचा उत्तर मध्यकालीन युग की सभ्यता से जुड़ा हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि आगे की जांच के बाद ही होगी।
पूरी सच्चाई के लिए जरूरी होगी खुदाई
ASI अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस संरचना के बारे में विस्तृत जानकारी तभी मिल पाएगी जब इसकी खुदाई की जाएगी। उनके मुताबिक खुदाई का काम प्रशासन के स्तर पर किया जा सकता है और प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद ही यह प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। फिलहाल प्रशासन की ओर से सिर्फ इतना जानने की कोशिश की जा रही है कि यह संरचना कितनी पुरानी है, ताकि आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जा सके।
मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली की तरफ से भी बयान सामने आया है। उनका कहना है कि मस्जिद में नमाज से पहले वजू करने के लिए पहले से कुओं का इस्तेमाल होता रहा है और अब जो कुआं मिला है, वह भी उन्हीं में से एक था। यानी मुतवल्ली के मुताबिक यह ढांचा मस्जिद के इस्तेमाल का ही हिस्सा रहा है, जबकि ASI की शुरुआती जांच इसे मस्जिद से भी पुराना बता रही है। इन दोनों बातों में अंतर को देखते हुए अब सबकी निगाहें आने वाली खुदाई और ASI की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे इस कुएं और इससे जुड़े विवाद की असली तस्वीर साफ हो सकेगी।



















